दूध उत्पादन समिति के चेयरमैन का चुनाव रद्द

“गोरखपुर मंडल दुग्ध विभाग चेयरमैन चुनाव रद्द, मतदाताओं में नाराजगी, फैसले पर उठे सवाल”

ब्यूरो प्रभारी: संतोष कुमार त्रिपाठी, खजनी गोरखपुर।

खजनी। गोरखपुर मंडल के दुग्ध विभाग के बहुप्रतीक्षित चेयरमैन चुनाव सुबह 8:30 बजे से पराग डेयरी प्रांगण हरैया हाल में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदान प्रक्रिया शुरू हुई थी, जो शाम 4 बजे तक चलनी थी। कुल सात मतदाता, जिनमें प्रत्याशी प्रस्तावक भी शामिल थे, सुबह से ही मतदान स्थल पर पहुंचे और मतदान प्रक्रिया में उत्साहपूर्वक शामिल हुए।
चेयरमैन के चुनाव में सात प्रत्याशी थे जिसमें मुख्य मुकाबला कौशल्या देवी (पत्नी दिलीप यादव) और रणजीत सिंह (पुत्र शिवाजी) के बीच में था। सुबह से ही दोनों पक्ष अपने-अपने समर्थकों के साथ प्रांगण में डटे रहे और कड़ा मुकाबला देखने को उत्सुक था। मतदाताओं का उत्साह इस कदर था कि चुनाव को लेकर माहौल पूरी तरह पारदर्शी और शांतिपूर्ण बना हुआ था। प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे, जिससे किसी भी प्रकार की अशांति की गुंजाइश न रहे।

चेयरमैन प्रत्याशी कौशल्या देवी ने बताया सभी सात मतदाता थे जिसमें पांच मेरे साथ थे और मैं चुनाव जीतने वाली थी तभी दोपहर 3 बजे अचानक चुनाव रद्द करने की सूचना ने पूरे माहौल को बदल दिया। चुनाव अधिकारी की ओर से कैंसिल का नोटिस टांगा दिया गया जिसके बाद मतदान स्थल पर मौजूद मतदाताओं में हड़कंप मच गया। मेरी जीत लगभग तय थी। ऐसे में अचानक चुनाव रद्द किए जाने से मतदाताओं और प्रत्याशियों में आक्रोश फैल गया।

चुनाव रद्द होने की खबर मिलते ही मतदाता जिला अधिकारी कार्यालय पहुंचे लेकिन मौके से जिलाधिकारी अपने कार्यालय में नहीं मिले।

आरोप लगाया कि चुनाव में अनियमितता और दबाव के चलते यह कदम उठाया गया है। वहीं समर्थकों का कहना था कि जब माहौल शांतिपूर्ण और मतदान पारदर्शी तरीके से हो रहा था, तो चुनाव को बीच में रद्द करने का औचित्य समझ से परे है।
एक ओर जहां मतदाता इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ बता रहे हैं, वहीं प्रशासनिक हलकों में भी इस फैसले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। फिलहाल जिला प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है।

गोरखपुर मंडल दुग्ध विभाग का यह चुनाव किसानों और दुग्ध उत्पादकों के हितों से जुड़ा माना जा रहा था। अब चुनाव रद्द होने के बाद न सिर्फ उम्मीदवारों बल्कि मतदाताओं के बीच भी असंतोष गहराता जा रहा है। सभी की निगाहें अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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