नई कमेटी के गठन के साथ ही वक्फ अंजुमन इस्लामिया में सालों से चल रही लूट का हुआ पर्दाफाश

गोरखपुर: शहर में चर्चित मदरसा अंजुमन इस्लामिया के घोटाले से सम्बंधित खबरों के बीच नई खबर ये है कि भ्रष्टाचार और घोटाले की तमाम शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए वक्फ अंजुमन इस्लामिया की नई कमेटी को – सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने मान्यता दे दी है। आपको बताते चलें की इमामबाड़ा स्टेट के बाद गोरखपुर में अंजुमन इस्लामिया के पास वक्फ की सबसे ज़्यादा सम्पत्ति है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक 1986 में चौधरी अब्दुल रहमान की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी का गठन वक्फ बोर्ड ने किया था। 29 जून 1989 को कमेटी का कार्यकाल पूरा होने के बाद किसी भी नई कमेटी को बोर्ड द्वारा मान्यता नही दी गई। वहीं दूसरी तरफ अंजुमन इस्लामिया का अंतिम आडिट 1986 में हुआ। हैरानी की बात ये है कि अंजुमन इस्लामिया की तरफ से 1986 के बाद सुन्नी सेंट्रल

अहमद अनस (अनस चौधरी) की अध्यक्षता में 7 सदस्यीय कमेटी का हुआ गठन

1986 के बाद कोई हिसाब किताब नही, पुटानी कमेटी ने बिना परमिशन किया कई निर्माण

करोडों के घोटाले और भ्रष्टाचार पर सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की बड़ी कार्यवाही

वक्फ बोर्ड से किसी भी तरह का न तो पत्राचार किया गया और न ही बोर्ड में कोई अंशदान ही जमा किया गया। इसके अलावा अंजुमन इस्लामिया के नाम पर जो निर्माण हुआ उसके लिए वक्फ बोर्ड से किसी भी तरह की कोई परमिशन नही ली गई जबकि पिछले लगभग 15 से 20 सालों में कुछ चुनिंदा लोगों द्वारा वक्फ अंजुमन इस्लामिया की सम्पत्ति को निजी सम्पत्ति बनाकर करोड़ों रुपये का वारा न्यारा कर लिया गया। फिलहाल सुत्री सेंट्रल वक्फ बोर्ड द्वारा 13 दिसम्बर 2024 को जारी तौलियत प्रमाण पत्र, द्वारा जो कमेटी गठित की गई है उसमें अहमद अनस को अध्यक्ष, मोहम्मद फारूक को उपाध्यक्ष जबकि नूर उल हक को सचिव और सिकंदर को उप सचिव के साथ ही हाफिज बदरुद्दीन, सरफराज हसन और सन्नू को सदस्य बनाया गया है। अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह बाबू और महबूब सईद हारिस वाली तथाकथित कमेटी के अज़ीम सामानी और आमिर सामानी के चंगुल से अंजुमन इस्लामिया की मुक्ति और नई कमेटी का गठन गोरखपुर के वक्फ इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा।

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