” बाढ़ व बरसात के जलभराव से बरबाद होंगी सैकड़ों एकड़ फसल, जलमग्न होंगे आधा दर्जन गांव “
ब्यूरो प्रभारी — विनय तिवारी
बड़हलगंज/गोरखपुर(निष्पक्ष टुडे): बड़हलगंज विकास खण्ड के आधा दर्जन से अधिक गांवों की जलनिकासी के लिए पूर्व में बने भरैना नाले का अस्तित्व रामजानकी बाईपास मार्ग की भेंट चढ गया है। एनएचएआई द्वारा रामजानकी बाईपास के निर्माण में तरैना नाला को पाट कर सडक में मिला दिया गया है। ऐसे में ग्रामीण परेशान हैं। लोगों ने इसकी शिकायत कार्यदायी विभाग एवं जनप्रतिनिधियों से की लेकिन समस्या का निराकरण नहीं हो सका है।
बताते चलें कि मरवट गांव से करीब दो सौ मीटर पूरब से भरैना नाला गुजरता है। जो खडेसरी से मोहाल जलकर होते हुए राप्ती नदी में जाकर मिलता है। इस तरैना नाले से नरहरपुर,कृतपुरा, बुढनपुरा, कल्यानपुर,चिल्लूपार, नौका पूरा, संसारपार, बसावनपुर, मरवट,रामपुर गनेशी, आदि गांव जुडे हैं। किसान नागेन्द्र सिंह रघुवंशी, योगेंद्र सिंह, प्रेम तिवारी, मानवेंद्र मिश्र, अतुल सिंह,अमीर यादव, उमेश यादव, स्वामीनाथ यादव, रमाशंकर, रामनिवास आदि का कहना है कि बरसात के दिनों में लगभग हजारों एकड़ जमीन से तमाम गांवों का पानी निकल कर राप्ती नदी में चला जाता था। इतना ही नहीं सरयू नदी का पानी भी बरसात के दिनों में डा शमीम आबिदी के पूरब बनी पुलिया से इसी रास्ते राप्ती में चला जाता था लेकिन इस नाले को पाट देने से बडी समस्या उत्पन्न हो गई है। रामजानकी बाईपास मार्ग पर जो भी पुलिया बनी है वो सब जमीन के लेबल पर है जबकि नहर का लेबल जमीन से चार पांच फिट नीचे है। बाढ के समय सरयू व राप्ती का पानी पुलिया से सडक ओवरफ्लो कर नाले के रास्ते भेडीताल होकर चला जाता था लेकिल एकमात्र पुलिया को भी समाप्त कर दिया गया है। संसारपार गांव के किसान नेता नागेंद्र सिंह रघुवंशी ने कार्यदायी संस्था एनएचएआई के प्रोजेक्ट मैनेजर सुमित सिंह से शिकायत की। जिसके बाद जीएम मनीष चौहान ने स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने कहाकि उनके प्रोजेक्ट में कहीं भी कलवर्ट का प्रावधान नहीं है। वहीं किसानों का कहना है कि अगर नाले का अस्तित्व खत्म किया गया तो इसमें ज्यादातर किसानों के खेत ताल बन जाएंगे जिससे सैकड़ों एकड़ खेती बर्बाद हो जाएगी।
Leave a Reply