Category: ब्रेकिंग न्यूज़

  • ऑक्सीजन सिलेंडर गोदाम में रिफलिंग के दौरान तेज धमाका,एक की हुई मौत

    ऑक्सीजन सिलेंडर गोदाम में रिफलिंग के दौरान तेज धमाका,एक की हुई मौत

    मथुरा: शहर के BSA कॉलेज रोड पर स्थित एक ऑक्सीजन सिलेंडर गोदाम में रिफलिंग के दौरान तेज धमाका हुआ, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई।

    इस ब्लास्ट में 1 व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि 2 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

    घायलों का इलाज अस्पताल में चल रहा है। धमाका मिश्रित आबादी इलाके मेंथा ऑक्सीजन सिलेंडर के गोदाम में हुआ।

    घटना के बाद दमकल और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में किया। कैसे बना गैस का गोदाम, जांच कर रही है पुलिस।

  • नीलकंठ महादेव बनाम जामा मस्जिद केस मे सुनवाई आज

    नीलकंठ महादेव बनाम जामा मस्जिद केस मे सुनवाई आज

    बदायूं ब्रेकिंग:नीलकंठ महादेव बनाम जामा मस्जिद केस मे सुनवाई आज।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नहीं हो सकता कोई आदेश।

    सुनवाई मे तय हो सकता है कि केस सुनवाई योग्य है या नहीं ।

    सिविल जज सीनियर डिवीजन / फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट मे होंगी सुनवाई।

  • मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह का आयोजन फरवरी में, युवतियों ने आवेदन शुरू किए

    मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह का आयोजन फरवरी में, युवतियों ने आवेदन शुरू किए

    मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह का आयोजन फरवरी में, युवतियों ने आवेदन शुरू किए

    समाज कल्याण विभाग की ओर से इस वित्तीय वर्ष में दूसरी बार मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह का आयोजन फरवरी में किसी तिथि को किया जा सकता है। इसके लिए युवतियों ने आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है।

    बीते 1 दिसंबर को फर्टिलाइजर परिसर में आयोजित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1678 नवदंपत्तियों को आशीर्वाद दिया था। अब खरमास के बाद इस आयोजन की तैयारियाँ फिर से शुरू हो गई हैं। विवाह समारोह में शामिल होने के लिए युवतियों से आवेदन आने लगे हैं।

    विभाग की ओर से आयोजन की तिथि और मुख्यमंत्री की उपस्थिति को लेकर मंथन जारी है। इस बार जिले में 3800 से अधिक युवतियों के विवाह कराए जाने का लक्ष्य रखा गया है। जिला समाज कल्याण अधिकारी वशिष्ठ नारायण सिंह ने बताया कि फरवरी में प्रस्तावित इस सामूहिक विवाह समारोह की तैयारियाँ जोरों पर हैं।

  • लखनऊ में युवती संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हुई

    लखनऊ में युवती संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हुई

    लखनऊ में युवती संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हुई,

    पिता ने युवक पर अपहरण का आरोप लगाया, FIR दर्ज।

    लखनऊ के सरोजनी नगर से एक 24 वर्षीय युवती लापता हो गई।

    काफी खोजबीन के बाद युवती का पता नहीं चला। पिता ने सरोजनी नगर थाने में अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया है।

    पिता ने बिजनौर के ठकुराइन खेड़ा गांव में रहने वाले शिवम यादव उर्फ नीतू के खिलाफ बेटी को शादी की नीयत से अगवा कर ले जाने की रिपोर्ट दी है।

    पीड़ित का कहना है कि बीती 9 जनवरी को सुबह करीब 6:30 बजे शिवम उसकी 24 वर्षीया बेटी को घर के बाहर से बहला फुसला कर अपनी मोटरसाइकिल पर बिठा ले गया।

    बेटी के गायब होने के जानकारी होने के बाद उसकी रिश्तेदारी और परिचितों के यहां काफी तलाश की गई।

    पीड़ित ने बेटी के साथ अप्रिय घटना होने की आशंका जाहिर की है।

    सरोजनी नगर थाने में मंगलवार रात आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।

    पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर युवती और आरोपी की तलाश शुरू कर दी है।

  • ‘एक भुट्टे के 525 रु’, विराट कोहली के रेस्टोरेंट में जाकर पछताई लड़की

    ‘एक भुट्टे के 525 रु’, विराट कोहली के रेस्टोरेंट में जाकर पछताई लड़की

    ‘एक भुट्टे के 525 रु’, विराट कोहली के रेस्टोरेंट में जाकर पछताई लड़की,

    हैदराबाद में विराट कोहली के रेस्टोरेंट में जाने पर एक लड़की को काफी पछतावा हो रहा है, जिसका दर्द उसने X पर एक पोस्ट के जरिए बयां किया। लड़की ने बताया कि ने One8 कम्यून रेस्टोरेंट से पेरी पेरी कॉर्न रिब्स ऑर्डर किए, जिसकी कीमत 525 रुपए है। लेकिन उसे सिर्फ ‘भुट्टे’ के कुछ स्लाइस मिले।

    अब यह पोस्ट तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद यूजर्स भी इस पर जमकर अपने रिएक्शन दे रहे हैं।

  • जस्टिस कृष्णन विनोद चंद्रन ने आज सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में शपथ ली

    जस्टिस कृष्णन विनोद चंद्रन ने आज सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में शपथ ली

    जस्टिस कृष्णन विनोद चंद्रन ने आज सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में शपथ ली। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना ने जस्टिस चंद्रन को शपथ दिलाई।

  • हाई कोर्ट के जस्टिस राम मंदिर पर आंदोलन परसंबोधित करेंगे आयोजन

    हाई कोर्ट के जस्टिस राम मंदिर पर आंदोलन परसंबोधित करेंगे आयोजन

    इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस शेखर कुमार यादव 22 जनवरी को राम मंदिर आंदोलन पर होने वाले एक आयोजन को संबोधित करेंगे। उन्होंने 8 दिसंबर को एक बयान दिया था कि देश की व्यवस्था बहुसंख्यकों के अनुसार ही चलेगी। इसके अलावा मुस्लिम समुदाय को संबोधित करते हुए उन्होंने ‘कठमुल्ला’ शब्द का इस्तेमाल किया था, जिस पर विवाद हुआ था। उनके खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव संसद में लाने का ऐलान विपक्ष ने किया है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ जांच शुरू की है। इस बीच अब वह 22 जनवरी को ‘राम मंदिर आंदोलन और गोरक्षपीठ’ शीर्षक से आयोजित होने वाली सेमिनार में वक्ता के तौर पर शामिल होंगे।

    यह सेमिनार महाकुंभ मेला क्षेत्र में ही 22 तारीख को होना है। इसी तारीख को बीते साल अयोध्या में बन रहे राम मंदिर में रामलला की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा हुई थी। कार्यक्रम के संयोजक शशि प्रकाश सिंह का कहना है कि यह आयोजन रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के एक साल पूरा होने के मौके पर कराया जा रहा है। जस्टिस शेखर कुमार यादव के अलावा इस कार्यक्रम को आरएसएस के सीनियर प्रचारक अशोक बेरी संबोधित करेंगे। इसके अलावा विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठा दिनेश कुमार भी रहेंगे। वह वीएचपी के महामंत्री हैं और लंबे समय तक आरएसएस के प्रचारक रहे हैं। जस्टिस शेखर यादव ने इस कार्यक्रम में कहा था कि देश में बहुसंख्यकों के हिसाब से ही व्यवस्था चलेगी। हमारे परिवारों में भी ऐसा ही होता है कि जिस बात के लिए ज्यादा लोग कहते हैं, वही होता है।

  • प्लेन के इंजन में लगी आग

    प्लेन के इंजन में लगी आग

    नेपाल की बुद्धा एयरलाइंस की एक फ्लाइट को लेफ्ट इंजन में आग लगने के बाद काठमांडू के त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी. प्लेन में चालक दल के सदस्यों समेत 76 यात्री सवार थे. विमान ने वीओआर लैंडिंग की और सुरक्षित एयरपोर्ट पर लौट आया. फिलहाल किसी के घायल होने की सूचना नहीं है. त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने एक बयान जारी करके इस इमरजेंसी लैंडिंग के संबंध में जानकारी दी.

  • महाकुंभ 2025 और मकर संक्रांति का वैज्ञानिक आधार

    महाकुंभ 2025 और मकर संक्रांति का वैज्ञानिक आधार

    वीर बहादुर सिंह नक्षत्र शाला ( तारामण्डल) गोरखपुर, उत्तर प्रदेश के
    खगोल विद अमर पाल सिंह के द्वारा एक संक्षिप्त खगोलीय विश्लेषण
    यह बात आज से लगभग हजारों वर्षों पहले की है, जब से मानव सभ्यता का प्रादुर्भाब हुआ है तब से आज तक मानव सभ्यताओं ने जाने या अनजाने में ही सही लेकिन आकाश को अपने अपने नजरियों से निहारा तो है ,चाहें हम बात करें उन प्राचीन कालीन मानव सभ्यताओं की जिन्होने रात्रि के आकाश में टिमटिमाते आकाश दीपों को देख कर और उनसे निर्मित कुछ विशिष्ट आकार प्रकार की आकृतियों को अपने अपने हिसाब से समय, देश काल और परिस्थितियों में अनेकों कहानियों को भी गढ़ा ,जिस से आगे आने वाली पीढ़ियों को भी निरन्तर इस गूढ़ ज्ञान की धारा का विशेष लाभ ,खगोलीय ज्ञान और भान के रूप में होता रहे और जिस ज्ञान की अविरल धारा को आगे चलकर खगोल विज्ञान कहा गया ,इस प्रकार हम पाते हैं कि तमाम भारतीय प्राचीन कालीन पर्व और त्यौहारों में भी विज्ञान सम्मिलित है जिनमें कुछ प्राचीन तो कुछ आधुनिक वैज्ञानिक आधार भी प्राप्त होते हैं, आज हम एक प्राचीन कालीन पहलू पर बात करेंगे, जैसा कि हम जानते हैं कि परिवर्तन ब्रह्मांडीय नियम है जो होता है ,होता था ,और होता रहेगा, और होना अपरिहार्य है, उसी कड़ी में मानव सभ्यताओं ने भी समय के साथ अपने आप को भी ढाला है और इस बदलाव रूपी ऊबड़ खाबड़ ढलान से गुजरते हुए प्राचीन कालीन सभ्यताओं से भी समय के साथ में, आगे चल कर केबल कुछेक रीति रिवाजें , संस्कृति ,परंपराएं और रूढ़ी वादियां छूट गईं और कुछ समय विशेष के साथ रूढ़ हो गईं और कुछ समय के साथ परिभाषित होकर परिवर्तित हो गईं और कुछ ख़ास ने मानवीय परंपराओं का रूप ले लिया उनमें से एक विशेष है मकर संक्रांति और महाकुम्भ महोत्सव का संयोजन, खगोल विद अमर पाल सिंह आपको बताने जा रहे हैं इन दोनों से सम्बन्धित कुछ ख़ास बातें , जोकि जनहित में अति महत्वपूर्ण हैं,
    महाकुंभ और मकर संक्रांति दोनों का गहरा वैज्ञानिक और खगोलीय महत्व भी है, जो आकाशीय पिंडों की गतिविधियों और पृथ्वी पर उनके प्रभाव में निहित है। इन घटनाओं के पीछे का वैज्ञानिक आधार कुछ इस प्रकार है: खगोल विद अमर पाल सिंह के अनुसार:

    मकर संक्रांति: वैज्ञानिक व्याख्या, यह एक खगोलीय घटना है , खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि मकर संक्रांति के पीछे का विज्ञान_ पृथ्वी का अपने अक्ष पर घूर्णन के कारण हम दिन ब रात का अनुभव करते हैं, लेकिन ये दिन ब रात सम्पूर्ण पृथ्वी पर सब जगह एक जैसा नहीं होता है , जितनी सूर्य की किरणें प्रथ्वी के जिस भाग पर पड़ रही होती हैं उसी हिसाब से दिन तय होता है, जैसे प्रथ्वी को दो गोलार्धों में बांटा गया है एक उत्तरी गोलार्ध ब दूसरा दक्षिणी गोलार्ध जिनमें जिस पर पड़ने बाली सूर्य की किरणें प्रथ्वी पर दिन तय करती हैं, और इसका अपने अक्ष पर 23.5 अंश झुके होने के कारण दोनो गोलार्धों में मौसम भी अलग अलग होता है, अगर हम बात करें उत्तरायण ब दक्षिणायन की तो हम पाते हैं कि यह एक खगोलीय घटना है, 14/15 जनवरी के बाद सूर्य उत्तर दिशा की ओर अग्रसर या जाता हुआ होता है,जिसमें सूर्य दक्षिणी गोलार्ध से उत्तरी गोलार्ध में प्रवेश ( दक्षिण से उत्तर की ओर गमन प्रतीत ) करता है, इसे उत्तरायण या सूर्य उत्तर की ओर के नाम से भी जाना जाता है, वैज्ञानिकता के आधार पर इस घटना के पीछे का मुख्य कारण है पृथ्वी का छः महीनों के समय अवधि के उपरांत उत्तर से दक्षिण की ओर बलन करना,जो कि एक प्राकृतिक प्रक्रिया है ,जो लोग उत्तरी गोलार्ध में रहते हैं उनके लिए सूर्य की इस राशि परिबर्तन के कारण 14/15 जनवरी का दिन मकर संक्रांति के तौर पर मनाते हैं,और उत्तरी गोलार्ध में निवास करने वाले व्यक्तियों द्वारा ही समय के साथ धीरे धीरे मकर मण्डल के आधार पर ही मकर संक्रांति की संज्ञा अस्तित्व में आई है, मकर संक्रांति का अर्थ है सूर्य का क्रांतिवृत्त के दक्षिणायनांत या उत्तरायनारंभ बिंदु पर पहुंचना, प्राचीन काल से सूर्य मकर मण्डल में प्रवेश करके जब क्रांतिवृत्त के सबसे दक्षिणी छोर से इस दक्षिणायनांत या उत्तरायनारंभ बिंदु पर पहुंचता था, तब वह दिन ( 21 या 22 दिसंबर) सबसे छोटा होता था, अमर पाल सिंह ने बताया कि मगर अब सूर्य जनवरी के मध्य में मकर मण्डल में प्रवेश करता है, वजह यह है कि अयन चलन के कारण दक्षिणायनांत (या उत्तरायनारंभ) बिंदु अब पश्चिम की ओर के धनु मण्डल में सरक गया है, अब बास्तबिक मकर संक्रांति (दक्षिणायनांत या उत्तरायनारंभ बिंदु) का आकाश के मकर मण्डल से कोई लेना देना नहीं रह गया है, मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में संक्रमण का प्रतीक होता है जो सूर्य की उत्तर की ओर यात्रा (उत्तरायण) का संकेत देता है,
    यह परिवर्तन शीतकालीन संक्रांति के बाद होता है जब उत्तरी गोलार्ध में दिन लंबे होने लगते हैं, जो गर्मी और नवीनीकरण की शुरुआत का भी प्रतीक है,
    सौर विकिरण में परिवर्तन
    सूर्य के कर्क रेखा की ओर बढ़ने से उत्तरी गोलार्ध में सौर ऊर्जा बढ़ती है, जो जलवायु और कृषि चक्र को तो प्रभावित करती ही है और साथ साथ यह संक्रमण जैविक लय को प्रभावित करता है, जोकि इस समय ख़ासकर उत्तरी गोलार्ध में निवास करने वाले लोगों में कायाकल्प और जीवन शक्ति को प्रोत्साहित करता है,
    जैसे कि विटामिन डी का अवशोषण आदि
    इस अवधि के दौरान, लोग पारंपरिक रूप से धूप सेंकते हैं या धूप में अधिक समय बिताते हैं, जिससे शरीर को अधिक विटामिन डी का उत्पादन करने में मदद मिलती है, जो हड्डियों के स्वास्थ्य और प्रतिरक्षा के लिए एक हद तक आवश्यक होता है।
    इसके साथ ही अगर हम बात करें संस्कारों में निहित वैज्ञानिक आधारों की तो हम पाते हैं कि कुछ संस्कारों का वैज्ञानिक आधार भी प्राप्त होता है, खगोल विद अमर पाल सिंह ने बताया कि जैसे कि
    तिल और गुड़ का सेवन केवल सांस्कृतिक ही नहीं है ,बल्कि ये खाद्य पदार्थ पोषक तत्वों से भी भरपूर होते हैं जो ठंड के महीनों के दौरान शरीर को गर्म और ऊर्जावान बनाए रखने में मदद करते हैं,

    अब हम बात करते हैं महाकुम्भ और इसमें निहित वैज्ञानिक आधारों की तो हम पाते हैं कि
    खगोल विद अमर पाल सिंह ने बताया कि
    महाकुंभ और इसकी वैज्ञानिक व्याख्या में हम पाते हैं कि यह अति प्राचीन एवं बृहद त्यौहार भी खगोलीय संरेखण पर आधारित हैं,
    जैसा हम जानते हैं कि आज की अंतर्राष्ट्रीय खगोल वैज्ञानिक संघ की ग्रहीय परिभाषा के अनुसार आज हमारे सौर मंडल में आठ ग्रह हैं , जिनका सूर्य से दूरी के क्रम में नाम निम्नानुसार है बुद्ध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण और बरुण हैं,उनमें से सबसे बड़ा ग्रह है बृहस्पति, जिसे गुरु भी कहा जाता है,प्राचीन कालीन सभ्यताओं ने भी पांच ग्रहों को अपनी साधारण आंखों से ही पहचान लिया था, जिनमें से बृहस्पति भी एक था, आज के समय में भी अगर आप भी थोड़ा अधिक प्रयास करेंगे तो अलग अलग रात्रि के दौरान दिखाई देने वाले इन पांचों ग्रहों को विभिन्न समय पर आप भी पहचान सकते हैं , बृहस्पति जोकि शुक्र ग्रह के बाद सबसे ज्यादा चमकीला पिण्ड है, यह मुख्य रूप से लगभग 75 प्रतिशत हाइड्रोजन और 24 प्रतिशत हीलियम ब अन्य से बना हुआ है, दूरबीन से देखने पर इस पर बाहरी वातावरण में दृश्य पट्टियां भी दिखाई देती हैं और एक लाल धब्बा भी है जिसे ग्रेट रेड स्पॉट कहा जाता है , जिसे गैलीलियो ने 17वीं सदी में अपनी दूरबीन से देखा था, और सर्व प्रथम 1610 में गैलीलियो गैलिली ने इसके चार बड़े चंद्रमाओं को भी खोजा था, जिनके नाम हैं, गैनिमेड, यूरोपा, आयो, कैलिस्टो, खगोलीय अनुसंधान से प्राप्त जानकारी से यूरोपा पर निकट या दूर भविष्य में ही सही लेकिन इस पर जीवन की प्रबल संभावना है क्योंकि इस पर पानी का भण्डार जो मौजूद है, अगर हम बृहस्पति ग्रह की तुलना अपनी पृथ्वी से करें तो हम पाते हैं कि इसमें लगभग 1331 पृथ्वियां समा सकती हैं, और इसका चुंबकीय क्षेत्र पृथ्वी की तुलना में 14 गुना ज्यादा शक्तिशाली है, और यह सूर्य से लगभग 77 करोड़ 80 लाख किलोमीटर दूर है, और सूर्य का एक चक्कर लगाने में 11.86 वर्ष का समय लगता है जोकि लगभग 12 बर्ष के बराकर होता है, बृहस्पति का अक्षीय झुकाब केबल 3.13 डिग्री है जिस कारण इस पर कोई मौसम परिवर्तन नहीं होता है, यह बहुत तेज़ गति से घूर्णन करता है अपने अक्ष पर 09 घंटा 56 मिनट्स में एक बार घूमता है, इसका मतलब होता है कि इसका दिन लगभग 10 घंटे का ही होता है,
    अमर पाल सिंह ने बताया कि इसे आधुनिक खगोल विज्ञान में वैक्यूम क्लीनर भी कहा जाता है, जोकि पृथ्वी पर आने वाली धूमकेतुओं से भी बचाता है, बृहस्पति ग्रह जिसे गुरु भी कहा जाता है का हमारे देश में एक विशेष स्थान है क्योंकि भारत में कुम्भ मेला आयोजित होता है, कुम्भ का शाब्दिक अर्थ होता है कलश, कलश का मतलब होता है घड़ा, सुराही या पानी रखने वाला बर्तन और मेला का मतलब होता है कि जहां पर मिलन होता है, इस मेला के दौरान शिक्षा, प्रवचन, सामूहिक सभाएं, मनोरंजन और यह सामुदायिक वाणिज्यिक उत्सव भी हैं, बड़ी बात यह है कि यह त्यौहार दुनिया की सबसे बड़ी सभा माना जाता है, इस उत्सव को यूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया गया है, खगोलीय गणनाओं के हिसाब से यह मेला मकर संक्रांति के दिन प्रारंभ होता है और जब एक ख़ास खगोलीय संयोजन घटित होता है तभी यह मेला घटित होता,
    महाकुंभ तब आयोजित होता है जब सूर्य मकर राशि में, चंद्रमा मेष राशि में और बृहस्पति कुंभ राशि में होता है, इस बार वर्ष 2025 में प्रयागराज में पूर्ण कुम्भ मेला आयोजित किया जा रहा है,
    महाकुम्भ मेला प्रयाग में प्रत्येक 144 वर्ष अर्थात 12 पूर्ण कुम्भ मेलों के बाद आयोजित होता है, महाकुम्भ मेला अगली बार 2157 में लगेगा, जब गुरु कुम्भ राशि में सूर्य मेष राशि में और चन्द्रमा धनु राशि में होता है तब कुम्भ मेला हरिद्वार में लगता है, और जब गुरु वृषभ राशि में सूर्य, चन्द्रमा मकर राशि में होते हैं तब प्रयागराज में कुम्भ मेला आयोजित होता है, और जब गुरु सिंह राशि में सूर्य,चन्द्रमा कर्क राशि में होते हैं तो नासिक में कुम्भ मेला आयोजित होता है और जब गुरु सिंह राशि में सूर्य, चन्द्रमा मेष राशि में होते हैं तो कुम्भ मेला उज्जैन में आयोजित होता है जब गुरु सिंह राशि में होते हैं तो त्रांबकेशर नासिक और उज्जैन में आयोजित होता है जिसे सिंहस्थ कुंभ मेला भी कहा जाता है,
    निष्कर्ष के तौर पर कह सकते हैं कि दोनों घटनाएँ, मकर संक्रांति और महाकुंभ, महत्वपूर्ण खगोलीय गतिविधियों के साथ संरेखित होती हैं जो मौसमी परिवर्तनों, मानव शरीर विज्ञान और पर्यावरण को प्रभावित करती हैं। जोकि हमारे पूर्वजों के विशिष्ट प्राचीन ज्ञान को भी दर्शाते हैं जो खगोलीय ज्ञान को स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देने वाली प्रथाओं के साथ एकीकृत भी करता है ।

    https://youtube.com/shorts/CQRMp6a2CJw?si=Rj6J9fHTnu3ltpSi

  • गोरखपुर जीएसटी की टीम ने फ्लोटिंग रेस्टोरेंट पर मारा छापा

    गोरखपुर जीएसटी की टीम ने फ्लोटिंग रेस्टोरेंट पर मारा छापा

    गोरखपुर जीएसटी की टीम ने कर चोरी की जांच के लिए रामगढ़ताल स्थित फ्लोटिंग रेस्टोरेंट पर छापा मारा, जीएसटी की तीन टीमों ने रेस्टोरेंट से संबंधित तीन अलग-अलग परिसरों पर एक साथ छापा मारा है। यह छापा डिप्टी कमिश्नर जीएसटी की अगुवाई में 6 सदस्यीय टीम के द्वारा कर चोरी की आशंका के चलते मारा गया है। इसके अतिरिक्त फॉरेस्ट क्लब में संचालित एक रेस्टोरेंट पर भी एक टीम जांच करने गई है।
    सूत्रों के द्वारा ज्ञात हुआ है कि इनकी एक टीम फ्लोट रेस्टोरेंट के निदेशक के दूसरे दफ्तरों पर भी जांच के लिए गई है।
    दरअसल फ्लोट के निदेशक के परिसर पर पिछले पांच दिनों से आयकर विभाग का छापा चल रहा है और आयकर विभाग उनके सभी सम्बंधित जरूरी दस्तावेजों की जांच कर रही है। इसी बीच जीएसटी की टीम ने भी यह छापा मार दिया।