Category: ब्रेकिंग न्यूज़

  • जीआरपी 35 लाख का 240 मोबाइल बरामद कर मोबाइल स्वामियों को किया सुपुर्द

    जीआरपी 35 लाख का 240 मोबाइल बरामद कर मोबाइल स्वामियों को किया सुपुर्द

    संवाददाता: सूर्य प्रकाश ओझा

    गोरखपुर। पुलिस अधीक्षक रेलवे ने सर्विलांस सेल के माध्यम से खोए हुए 240 एन्ड्रायड मोबाइल, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 35 लाख को बरामद कर उनके स्वामियों को सुपुर्द किया। पुलिस ऑफिस रेलवे पर पुलिस अधीक्षक जीआरपी गोरखपुर लक्ष्मी निवास मिश्र ने प्रेस वार्ता कर बताया कि हमारे क्षेत्रान्तर्गत वर्ष 2025 माह मई तक कुल 240 खोए हुए मोबाइलों को जीआरपी अनुभाग गोरखपुर की सर्विलांस शाखा पुलिस टीम प्रभारी सर्विलांस के अथक प्रयासों से उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों व अन्य राज्यों दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, झारखण्ड, बिहार, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, पंजाब मे जाकर खोये हुए मोबाइलों को बरामद किया बरामदशुदा मोबाइलों में ज्यादतर मोबाइलों की कीमत 35-40 हजार तक है। सभी बरामदशुदा मोबाइलों की अनुमानित कीमत लगभग 35 लाख रुपए है। बरामदशुदा मोबाइलों को उनके स्वामियों को पुलिस अधीक्षक रेलवे कार्यालय गोरखपुर पर बुलाकर सकुशल सुपुर्द किया गया। मोबाइल स्वामियों द्वारा अपना-अपना खोया हुआ मोबाइल पाकर प्रफुल्लित हो उठे और हर्षोत्साहित होकर राजकीय रेलवे पुलिस अनुभाग गोरखपुर पुलिस की भूरि-भूरि प्रशंसा की गयी।

     

  • पिपराइच में नकली पनीर की फैक्ट्री पकड़ी गई

    पिपराइच में नकली पनीर की फैक्ट्री पकड़ी गई

    गोरखपुर। पिपराइच क्षेत्र के ग्राम बरईपुर में सहायक खाद्य सुरक्षा अधिकारी छापा मारकर बड़ी मात्रा में नकली पनीर बनाए जाने की फैक्ट्री को पकड़ा और फैक्ट्री में बन रहें फर्जी सामानों को नष्ट कराया। कुछ सैंपलिंग हुई फैक्ट्री का कोई रजिस्ट्रेशन कागज भी नहीं था। यह लंबे अरसे से नकली पनीर बनाकर क्षेत्र में शादी विवाह में थोक रूप से सप्लाई कर रहा था। छापे के दौरान सहायक आयुक्त सुधीर कुमार सिंह, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी हितेंद्र मोहन त्रिपाठी, खाद्य सुरक्षा अधिकारी शैलेंद्र श्रीवास्तव, अंकुर नागेंद्र, आशुतोष, उमाशंकर, विनय, प्रतिमा, श्रीनिवास, विद्यानंद, स्वामी नाथ, नागेंद्र, कमल नारायण छापे में शामिल रहें । पाउडर दूध, सैकरीन, ग्लूकोस, डिटर्जेंट, व्हाइटनर, के नमूने लिए गए छापे से क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। सबको मालूम हो गया है कि नकली पनीर भी बनता है। अब सब लोग पनीर खरीदने में विशेष सावधानी बरतेंगे। यहां से पनीर भारी मात्रा में आसपास के शहरों में सप्लाई किया जा रहा था, जिसका भंडाफोड़ आज हुआ है।

     

  • गीडा प्रशासन द्वारा यज्ञ स्थल को ध्वस्त करने पर ग्रामीण हुए आक्रोशित

    गीडा प्रशासन द्वारा यज्ञ स्थल को ध्वस्त करने पर ग्रामीण हुए आक्रोशित

    “गीडा प्रशासन के खिलाफ ग्रामीण सड़क पर उतरे पुलिस ने ग्रामीणों को समझा कर सड़क से हटाया”

    सहजनवा/ गोरखपुर।  गीडा थाना क्षेत्र के बड़गहन में श्रीराम यज्ञ का आयोजन 28 मई से 5 जून तक होना था। जिसके लिए ग्रामीणों ने यज्ञ शाला का निर्माण कराया था। जिसके लिए प्राण प्रतिष्ठा भी किया जा चुका था। मंगलवार को गीडा प्रशासन ने ग्रामीणों द्वारा निर्माण कराए गए यज्ञ स्थल को ध्वस्त करा दिया जिसके विरोध में भारी संख्या में ग्रामीण जुट गए और गीडा प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए सड़क उतर आए इस दौरान करीब 1 घंटे जाम की स्थित बनी रही। सूचना पर पहुंची गीडा पुलिस ने ग्रामीणों से वार्ता कर शांत कराया। और उन्हें सड़क से हटा कर तब आवागमन शुरू कराया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जब यज्ञ स्थल का निर्माण कराया जा था तो गीडा प्रशासन ने नहीं रोका। कार्य पूर्ण होने के बाद मनमानी तरीके से यज्ञ स्थल को ध्वस्त करा दिया गया। सुबह से ग्रामीण गीडा प्रशासन से मिलने की कोशिश किए लेकिन मुलाकात न कराने पर ग्रामीण आक्रोशित होकर सड़क पर उतर आए थे।

    इस संदर्भ में एसीईओ गीडा आर डी पांडेय ने कहा कि कोई यज्ञ स्थल नहीं तोड़ा गया है। आरोप बेबुनियाद है।
    इस दौरान उमेश यादव,मनीष पांडे,अभिनंदन पांडेय,धनुषधारी पांडेय, निरई यादव ,बलवंत यादव,रवि सिंह,राजकुमार यादव,सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद थे।

  • फितना से नरसंहार तक: पाकिस्तान के डीप स्टेट में निहित नरसंहार की मानसिकता

    फितना से नरसंहार तक: पाकिस्तान के डीप स्टेट में निहित नरसंहार की मानसिकता

    “पाकिस्तान: सांप्रदायिक हिंसा में 80 से ज़्यादा लोगों की मौत” : 22 अप्रैल, 2025 को जम्मू और कश्मीर में पहलगाम के पास बैसरन घाटी के शांत परिदृश्य अकल्पनीय भयावहता के दृश्य में बदल गए। M4 कार्बाइन और AK-47 राइफलों से लैस पाँच हथियारबंद आतंकवादियों ने गैर-मुस्लिम पर्यटकों पर क्रूर हमला किया, जिसमें उनके धर्म के आधार पर लोगों को निशाना बनाया गया। धार्मिक रूप से प्रेरित आतंकवाद के इस खौफनाक कृत्य में 26 नागरिक मारे गए- उनमें से 25 पर्यटक थे, जिनमें से ज़्यादातर हिंदू थे, साथ ही एक ईसाई और एक बहादुर स्थानीय मुस्लिम टट्टू संचालक भी था जिसने हमलावरों का विरोध करने की कोशिश की थी। पुरुषों को उनकी नवविवाहित पत्नियों के सामने ही गोली मार दी गई, जिससे परिवार बिखर गए और एक राष्ट्र की अंतरात्मा हिल गई।

    पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का एक प्रतिनिधि माना जाने वाला द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने शुरू में हमले की जिम्मेदारी ली थी। उनका औचित्य? अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद, 2019 के बाद क्षेत्र में गैर-स्थानीय लोगों के बसने का कथित विरोध। हालाँकि बाद में TRF ने अपने दावे को वापस ले लिया, लेकिन पैटर्न बहुत परिचित है: नकाबपोश वापसी, धुंधला खंडन और सीमा पार से आतंकी समर्थन के स्पष्ट सबूत। 2008 के मुंबई हमलों के बाद से नागरिकों के खिलाफ भारत का सबसे घातक यह हमला, सीमाओं से परे आतंकवाद की संरचनाओं में गहरी सड़न को उजागर करता है।यह भीषण घटना कोई अकेली घटना नहीं थी, बल्कि एक प्रणालीगत बीमारी यानी पाकिस्तान के गहरे पैठे आतंकी परिसर का लक्षण थी। अपनी स्वघोषित इस्लामी पहचान के बावजूद, पाकिस्तान आधुनिक दुनिया में सबसे गैर-इस्लामी शासनों में से एक बन गया है। इसने **सांप्रदायिक हिंसा यानी फ़ितना** को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित किया है, जो इस्लाम में सख्त वर्जित है। पिछले कई दशकों से पाकिस्तान के शिया और अहमदिया मुस्लिम अल्पसंख्यकों को व्यवस्थित तरीके से निशाना बनाया गया है, सताया गया है और लगभग विलुप्त होने की स्थिति में पहुंचा दिया गया है।

    राष्ट्र के सामाजिक ताने-बाने के अभिन्न अंग, इन समुदायों को फुसफुसाहट तक सीमित कर दिया गया है, जो पाकिस्तान के आंतरिक धार्मिक रंगभेद की याद दिलाता है।
    अधिक परेशान करने वाली बात यह है कि पाकिस्तान ने निर्दोष लोगों के खिलाफ हिंसा के भयावह सामान्यीकरण को एक रणनीतिक राज्य नीति बना दिया है। चाहे प्रत्यक्ष कार्रवाई के माध्यम से हो या छद्म आतंकवादी संगठनों के माध्यम से, नागरिकों, विशेष रूप से गैर-मुसलमानों को निशाना बनाना; भू-राजनीतिक हेरफेर का एक साधन बन गया है। मदरसों में गरीब परिवारों के बच्चों का दिमाग धोया जाता है और उन्हें जिहाद के लिए तोप का चारा बनाया जाता है, जबकि सैन्य अभिजात वर्ग और उनके राजनीतिक साथी देश की संपत्ति को लंदन, दुबई और स्विट्जरलैंड में विदेशी ठिकानों में ले जाते हैं।

    पहलगाम नरसंहार ने भारत की ओर से एक त्वरित और दृढ़ प्रतिक्रिया को प्रेरित किया। 7 मई को, भारत ने पाकिस्तान में आतंकवादी ढांचे के खिलाफ एक लक्षित मिसाइल अभियान, ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया, विशेष रूप से जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर जैसे समूहों पर ध्यान केंद्रित किया। जवाबी कार्रवाई में, पाकिस्तान ने नागरिक हताहतों का दावा किया और भारतीय सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए ऑपरेशन बनयान अल-मर्सस के साथ जवाब दिया। संक्षिप्त लेकिन तीव्र संघर्ष में दो परमाणु-सशस्त्र राष्ट्रों के बीच पहली बार ड्रोन युद्ध हुआ, जिसने एक बार फिर दक्षिण एशिया को युद्ध के कगार पर पहुंचा दिया।

    इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान के दोगलेपन को भी उजागर किया। जबकि उसके प्रधानमंत्री ने 11 मई को एक खोखली “जीत” और राष्ट्रीय अवकाश की घोषणा की, दुनिया ने एक ऐसे देश को देखा जो लगातार संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित आतंकवादियों को पनाह देता है और उन्हें राष्ट्रवाद और धर्म के पर्दे के पीछे छिपाता है। धर्मनिष्ठा के मुखौटे के पीछे अपराध का एक गठजोड़ छिपा है: दुष्ट मौलवियों, हवाला ऑपरेटरों और सेना के जनरलों द्वारा संरक्षित आतंकी नेटवर्क जिन्होंने देश को चरमपंथ के लिए अभयारण्य में बदल दिया है।
    अब समय आ गया है कि वैश्विक समुदाय पाकिस्तान की दोहरी भाषा पर ध्यान देना बंद करे। एक ऐसा देश जो अपने ही अल्पसंख्यकों को चुप करा देता है, धर्म के नाम पर निर्दोष लोगों को मारता है और राज्य के प्रायोजन से आतंक का निर्यात करता है, वह नैतिक रूप से उच्च स्थान का दावा नहीं कर सकता। पहलगाम हमला केवल भारतीय नागरिकों पर हमला नहीं था; यह मानवता, आस्था और शांति के मूल ढांचे पर हमला था।

    इस त्रासदी के सामने भारत की दृढ़ता और उसके सैद्धांतिक प्रतिशोध से पता चलता है कि देश आतंक के सामने झुकने को तैयार नहीं है। लेकिन असली न्याय तभी होगा जब दुनिया पाकिस्तान को न केवल पहलगाम के लिए बल्कि दशकों के धोखे, खून-खराबे और विश्वासघात के लिए जवाबदेह ठहराएगी।

  • अमृत स्टेशन योजना के अन एनईआर के बलरामपुर रेलवे स्टेशन का हुआ कायाकल्प, आधुनिक सुख-सुविधाओं के साथ कई महानगरों को सीधे रेल मार्ग से जोड़ता है

    अमृत स्टेशन योजना के अन एनईआर के बलरामपुर रेलवे स्टेशन का हुआ कायाकल्प, आधुनिक सुख-सुविधाओं के साथ कई महानगरों को सीधे रेल मार्ग से जोड़ता है

    वरिष्ठ संवाददाता- शिशिर श्रीवास्तव

    गोरखपुर। पूर्वोत्तर रेलवे के गोण्डा-गोरखपुर लूप लाइन रेल खंड पर स्थित बलरामपुर रेलवे स्टेशन पूर्वोत्तर रेलवे का एन.एस.जी. 5 श्रेणी का एक प्रमुख स्टेशन है, जो सीधी ट्रेन सेवा से दिल्ली, मुम्बई, कानपुर, लखनऊ, गोरखपुर, कटिहार, बहराइच, भोपाल, ग्वालियर आदि नगरों से जुड़ा हुआ है। विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने की ओर अग्रसर भारतीय रेल द्वारा पुराने बलरामपुर स्टेशन को भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, ‘अमृत स्टेशन योजना‘ के अन्तर्गत रू. 10.78 करोड़ की लागत से आधुनिक सुख-सुविधाओं से युक्त स्टेशन भवन विकसित किया गया है।

    पूर्वोत्तर रेलवे गोरखपुर के मुख्य जन संपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने बताया कि स्थानीय वास्तुकला एवं संस्कृति को ध्यान में रखते हुये स्टेशन भवन में सुधार का कार्य किया गया। फलस्वरूप स्टेशन भवन को आकर्षक कर स्वरूप मिला है। साथ ही पोर्च का निर्माण किया गया है। यात्रियों की सुविधा हेतु अलग-अलग प्रवेश एवं निकास द्वार बनाया गया है। यात्रियों को धूप एवं वर्षा से बचाव हेतु प्लेटफॉर्मों पर 15-बे के यात्री छाजन का प्रावधान किया गया है। इस स्टेशन पर 4,700 वर्ग मीटर में सर्कुलेटिंग एरिया का विस्तार एवं विकास किया गया है, जिससे यहाँ आने वाले यात्रियों को आवागमन हेतु पर्याप्त स्थान उपलब्ध हुआ है। स्टेशन के दोनों प्लेटफॉर्मों का उच्चीकरण कर उनके सतह में व्यापक सुधार करते हुए ग्रेनाइट पत्थर भी लगाया गया है, जिससे वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, बच्चों एवं दिव्यांगजनों को ट्रेनों में चढ़ने व उतरने में सुविधा हो रही है। स्टेशन पर 209 वर्ग मीटर में अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त यात्री प्रतीक्षालय का निर्माण किया गया है। इसके अतिरिक्त उच्च श्रेणी प्रतीक्षालय, रिटायरिंग रूम, महिला-पुरुष हेतु अलग-अलग प्रतीक्षालय, वी.आई.पी. लाउंज का प्रावधान किया गया है। स्टेशन परिसर में चार पहिया एवं दो पहिया वाहनों की पार्किंग हेतु अलग-अलग पार्किंग की व्यवस्था की गई है। यात्रियों की सुविधा हेतु अन्तरराष्ट्रीय मानक के साइनेजेज का प्रावधान किया गया है। स्टेशन परिसर में रेल यात्रियों को सुविधाजन्य तरीके से टिकट उपलब्ध कराने हेतु आरक्षित टिकट खिड़की, अनारक्षित टिकट खिड़की व ए.टी.वी.एम. का प्रावधान किया गया है। यहाँ यात्रियों की सहायता हेतु पूछताछ काउंटर खोला गया है। पीने के पानी हेतु स्टेशन पर पर्याप्त नल की व्यवस्था की गई है. साथ ही ठंडे पानी हेतु वाटर कूलर तथा खान-पान की दुकान का प्रावधान किया गया है।

    “फुट ओवरब्रिज व फसाड लाइट है खास”

    एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म पर जाने हेतु एक फुट ओवर ब्रिज (एफ.ओ.बी.) का प्रावधान किया गया है. पूरे स्टेशन परिसर में उन्नत प्रकाश का प्रावधान करने के साथ ही आधुनिक फसाड लाइटिंग लगाई गई है, जो स्टेशन की सुन्दरता में चार चाँद लगा रही है. पुनर्विकसित बलरामपुर स्टेशन पर आने वाले यात्रियों को निश्चय ही सुविधाजनक एवं आरामदाय रेल यात्रा के साथ ही आनन्द की अनुभूति होगी।

    शक्तिपीठ देवी पाटन मंदिर

    “28 साल पहले अस्तित्व में आया बलरामपुर जिला ऐतिहासिक दृष्टि से भी है खास”

    तराई क्षेत्र में राप्ती नदी के तट पर स्थित बलरामपुर उत्तर प्रदेश के आकांक्षी जिलों में से एक है। इसे 1997 में गोंडा जिले से अलग कर बनाया गया था. बलरामपुर से 29 किमी. दूरी पर स्थित श्रावस्ती है, जो प्राचीन कौशल राज्य की राजधानी थी। यह नगर वर्तमान में सहेत-महेत या टॉप्सी-टर्वी टाउन के नाम से जाना जाता है. भगवान बुद्ध ने यहीं पर अपने जीवन के 24 वर्षाकाल व्यतीत किए। बलरामपुर जिला मुख्यालय से लगभग 27 किलोमीटर की दूरी पर स्थित तुलसीपुर में देवीपाटन में देवी सिद्ध पीठ का स्थान है, यहॉ प्रत्येक वर्ष चैत्र माह में लगने वाले मेले के लिये विख्यात है. पौराणिक कथाओं के अनुसार इस मंदिर को देवी दुर्गा के 51 ‘‘शक्तिपीठ‘‘ में शामिल होने का गौरव प्राप्त है. बलरामपुर जनपद मुख्य रूप से कृषि आधारित है. यहाँ चीनी मिल जैसे बड़े उद्योग भी हैं।

  • अमृत स्टेशन योजना: महात्मा बुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी जाने वाले यात्रियों को मिलेगी आधुनिक सुविधाएं, एनईआर के सिद्धार्थनगर रेलवे स्टेशन का हुआ कायाकल्प

    अमृत स्टेशन योजना: महात्मा बुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी जाने वाले यात्रियों को मिलेगी आधुनिक सुविधाएं, एनईआर के सिद्धार्थनगर रेलवे स्टेशन का हुआ कायाकल्प

    वरिष्ठ संवाददाता: शिशिर श्रीवास्तव

    महिला विश्रामालय में विश्राम व स्तनपान कराने की सुविधा

    गोरखपुर‌। हिमालय की तराई क्षेत्र में स्थित सिद्धार्थ नगर उत्तर प्रदेश के आकांक्षी जिलों में से एक है। वर्ष 1988 में बस्ती जनपद के उत्तरी क्षेत्र को विभजित कर सिद्धार्थनगर जनपद का गठन किया गया। जनपद का नाम बौद्ध धर्म के प्रवर्तक महात्मा बुद्ध के बचपन के नाम सिद्धार्थ पर रखा गया है, जिनका जन्म कपिलवस्तु के पावन क्षेत्र लुम्बिनी में हुआ था।

    पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने बताया कि सिद्धार्थनगर रेलवे स्टेशन का कायाकल्प अमृत स्टेशन योजना के तहत किया गया है। महात्मा बुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी जाने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए सिद्धार्थनगर रेलवे स्टेशन को काफी आधुनिक सुविधाओं से युक्त बनाया गया है। कायाकल्प के बाद इस स्टेशन को तमाम अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ जोड़कर यात्रियों की सुखद यात्रा की परिकल्पना को साकार किया गया है।

    यह मान्यता है कि 249 ईसा पूर्व में सम्राट अशोक ने अपने प्रवास के दौरान यहाँ एक 36 फुट ऊँचे स्तम्भ का निर्माण कराया था, जिस पर यह अंकित है कि यहाँ पर महात्मा बुद्ध का जन्म हुआ था। कालान्तर में तराई का वन आच्छादित यह क्षेत्र शाक्य वंशजों के अधीन रहा। वर्ष 1897-98 में डब्लू.सी. पेपे ने पिपरहवा स्तूप की खोज की, जो कि लुम्बिनी से कुछ दूरी पर स्थित है। यहाँ से एक अद्भुत कलश मिला था, जिसमें महात्मा बुद्ध के अवशेष प्राप्त हुये थे। यह बताना आवश्यक है कि गोरखपुर-सिद्धार्थ नगर रेल मार्ग पर स्थित पीपीगंज रेलवे स्टेशन, इन्हीं डब्लू.सी. पेपे के नाम पर रखा गया था। यह क्षेत्र गौतम बुद्ध की जीवन घटनाओं से परिपूर्ण है।

    सिद्धार्थ नगर रेलवे स्टेशन लुम्बिनी जाने वाले बौद्ध अनुयायियों के लिये प्रवेश द्वार है तथा सबसे निकटवर्ती स्टेशन है। यह स्टेशन पूर्वोत्तर रेलवे के गोरखपुर-गोंडा लूप रेल खंड पर स्थित एन.एस.जी. 3 श्रेणी का एक प्रमुख स्टेशन है। सिद्धार्थ नगर स्टेशन सीधी ट्रेन सेवा के माध्यम से दिल्ली, मुम्बई, कानपुर, लखनऊ, गोरखपुर, कटिहार, बहराइच, भोपाल आदि प्रमुख नगरों से जुड़ा हुआ है।

    विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने की ओर अग्रसर भारतीय रेल द्वारा पुराने सिद्धार्थ नगर स्टेशन को आने वाले लगभग 50 वर्ष की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुये, ‘अमृत स्टेशन योजना‘ के अन्तर्गत 10.92 करोड़ रुपए की लागत से आधुनिक व उन्नत यात्री सुख-सुविधाओं से परिपूर्ण स्टेशन भवन को विकसित किया गया है। भगवान बुद्ध को समर्पित इस स्टेशन भवन को स्थानीय संस्कृति एवं आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। स्टेशन भवन में सुधार करते हुये पोर्च का निर्माण किया गया है, जो स्टेशन भवन को भव्यता प्रदान कर रहा है। महात्मा बुद्ध के जन्मस्थली के निकट होने के कारण स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया एवं स्टेशन में उनकी आकर्षक प्रतिमा लगाई गई है, जो स्टेशन भवन एवं परिसर को भव्यता प्रदान कर रही है। यहाँ पर एप्रोच रोड में सुधार के साथ ही 4,714 वर्ग मीटर में सर्कुलेटिंग एरिया का विस्तार एवं विकास किया गया है, जिससे यहाँ आने वाले यात्रियों को आवागमन आसान एवं सुगम हुआ है। यात्रियों को धूप एवं वर्षा से बचाव हेतु प्लेटफॉर्मों पर 10-बे के यात्री छाजन का प्रावधान किया गया है। स्टेशन के तीनों प्लेटफार्मों के सतह में व्यापक सुधार करते हुए 1,700 वर्ग मीटर में ग्रेनाइट लगाया गया है, जिससे यात्रियों को काफी सुविधा हो रही है। स्टेशन पर अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त यात्री प्रतिक्षालय का निर्माण किया गया है। स्टेशन पर यात्रियों के बैठने हेतु पर्याप्त संख्या में स्टील व कंक्रीट बेंचों का प्रावधान किया गया हैं । इसके अतिरिक्त महिला प्रतीक्षालय व रिटायरिंग रूम का भी प्रावधान स्टेशन पर किया गया है। स्टेशन परिसर में वाहनों की पार्किंग हेतु उत्तम पार्किंग की व्यवस्था की गई है। यात्रियों की सुविधा हेतु अन्तरराष्ट्रीय मानक के साइनेजेज का प्रावधान किया गया है।

    रेल यात्रियों को सुविधाजन्य तरीके से स्टेशन परिसर में टिकट उपलब्ध कराने हेतु आरक्षित टिकट खिड़की, अनारक्षित टिकट खिड़की व ए.टी.वी.एम. का प्रावधान किया गया है। पीने के पानी हेतु स्टेशन पर पर्याप्त संख्या में नल की व्यवस्था की गई है, साथ ही खान-पान स्टाल का प्रावधान किया गया है। एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म पर जाने हेतु एक फुट ओवर ब्रिज (एफ.ओ.बी.) का प्रावधान किया गया है। दो नये प्रसाधन बनाये गए हैं। पूरे स्टेशन परिसर में उन्नत प्रकाश का प्रावधान करने के साथ ही आधुनिक लाइटिंग लगाई गई है, जो स्टेशन की सुन्दरता को भव्यता प्रदान कर रही है। पुनर्विकसित सिद्धार्थ नगर स्टेशन पर आने वाले यात्रियों को सुगम एवं आरामदायक रेल यात्रा के साथ ही महात्मा बुद्ध की पावन नगरी का भी एहसास हो रहा है।

  • एक बेगुनाह की मौत, एक गांव की चीख

    एक बेगुनाह की मौत, एक गांव की चीख

    संवाददाता: सूर्य प्रकाश ओझा

    गोरखपुर। एक शख्स जो परदेस में पसीना बहाकर अपनों के लिए रोटी कमाता था, वह अपने ही गांव की मिट्टी में खून से लथपथ पाया गया। 52 वर्षीय रामकेवल निषाद की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने मंगलपुर की नींदें उड़ा दी हैं।
    बीएसएनएल एक्सचेंज की छत से नीचे फेंककर की गई हत्या ने कई सवालों को जन्म दे दिया है सवाल जो केवल न्याय की मांग नहीं करते, बल्कि इंसानियत को झकझोरते हैं।

    स्थानीय सूत्रों की मानें तो बीएसएनएल एक्सचेंज अब सरकारी इमारत कम, और देर रात चलने वाली पार्टियों का अड्डा ज़्यादा बन चुका है। शराब, मांस और शोर-गुल के बीच दब गई एक ज़िंदगी की आवाज़ ।

    *हत्या के बाद सन्नाटा क्यों*?

    सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि रामकेवल की मौत के बाद न तो उन्हें अस्पताल ले जाया गया, न पुलिस को खबर दी गई। क्या कोई कुछ छिपा रहा था? क्यों नहीं दी गई तत्काल सूचना?

    *पुलिस जांच और उम्मीद की किरण*

    गश्त पर निकली पुलिस की सतर्कता से हुआ खुलासा, मौके पर पहुंची फॉरेंसिक टीम और गुलरिहा थाना की संयुक्त कार्रवाई ने जांच को तेज कर दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतज़ार है, जिससे हत्या की असली वजह सामने आने की उम्मीद है।

    *रामकेवल कौन था*?

    बेंगलुरु में मेहनत से अपना नाम और काम कमाने वाला एक ठेकेदार – जिसके जाने से न सिर्फ़ एक परिवार उजड़ गया, बल्कि एक गांव को अपने भीतर झांकने पर मजबूर कर गया। एक सवाल, जो सबको परेशान कर रहा है: क्या सचमुच एक्सचेंज के भीतर कुछ ऐसा चल रहा है जो कानून और इंसानियत दोनों के खिलाफ है? मंगलपुर मांग रहा है जवाब। एक बेगुनाह की मौत, कई गुनहगारों की चुप्पी और एक गांव की पुकारः “हमें सच चाहिए, हमें न्याय चाहिए। साथ ही इस मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए है।
    मृतक की गतिविधियों को एक्सचेंज से जोड़कर देखा जा रहा है, जिससे संदेह गहरा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस एक्सचेंज के भीतर कुछ ऐसा चल रहा है जो न सिर्फ कानून बल्कि मानवता के भी खिलाफ है। क्या इसमें कोई संगठित गिरोह शामिल है? क्या यह हत्या किसी आर्थिक या व्यापारिक संघर्ष के चलते हुई? ये सवाल अब सिर्फ एक गांव के लिए नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था के लिए चुनौती बन गए हैं।

  • आकाशीय बिजली गिरने से मृतक युवक के परिजनों से मिले विधायक बढ़ाया ढाढस

    आकाशीय बिजली गिरने से मृतक युवक के परिजनों से मिले विधायक बढ़ाया ढाढस

    “परिवार की शासन स्तर से हर संभव होगी मदद: ई. सरवन निषाद”

    चौरी चौरा/ गोरखपुर। चौरी चौरा विधायक ई. सरवन निषाद ने मंगलवार को छबैला टोला मुहम्मदपुर निवासी सूरज सिंह के परिजनों से मिलकर ढांढस बंधाया और परिवार को सांत्वना दिलाते हुए अधिकारियों से वार्ता करके हर सम्भव मदद का भरोसा दिलाया और कहा कि नौजवान की मौत जो सेना की तैयारी कर रहा था वह बेहद ही दुखद है । सोमवार को भोर में आकाशीय बिजली गिरने से उसकी मौत हो गया था। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार के साथ पूरी कटिबद्धता के साथ खड़ा हूं और शासन स्तर से परिवार की मदद करवाऊंगा। चौरी चौरा विधानसभा के लोगों का दुख मेरा दुख है। नगर पंचायत अध्यक्ष सन्नी जायसवाल ,बलदेव निषाद प्रधान , सुनिल निषाद प्रधान , रामदयागर निषाद विधायक प्रतिनिधि, तारकेश्वर जायसवाल मंडल अध्यक्ष, अवध नारायन , अमित जयसवाल सहित तमाम लोग मौजूद रहें।

  • भारत से भेजे गए आमों की खेप को अमेरिका ने लेने से किया मना

    भारत से भेजे गए आमों की खेप को अमेरिका ने लेने से किया मना

    अमेरिका भारत से आमों का सबसे बड़ा खरीदार है, हाल ही में अमेरिका ने भारत से हवाई जहाज से भेजे गए आमों की 15 खेप को लौटा दिया। इसका कारण डॉक्यूमेंट्स में गड़बड़ी बताया गया है।

    अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि या तो इन आमों को अमेरिका में ही नष्ट कर दिया जाए या वापस भारत भेज दिया जाए। इन आमों की कीमत 4 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई जा रही है। ये खेप लॉस एंजिल्स, सैन फ्रांसिस्को और अटलांटा जैसे एयरपोर्ट पर रोकी गई।

    अमेरिकी अधिकारियों ने विकिरण प्रक्रिया से जुड़े कागजात में गलतियां बताई। निर्यातकों के अनुसार, समस्या कीड़ों की वजह से नहीं थी, बल्कि कीड़ों को मारने की प्रक्रिया के कागजात में गड़बड़ी के कारण हुई। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार इस आमों के कीड़े मारने की प्रक्रिया का सही तरीके से पालन नहीं हुआ था। इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार आमों के जल्दी खराब होने और उन्हें वापस भारत भेजने के ज्यादा खर्च के कारण, सभी निर्यातकों ने उन्हें नष्ट करने का फैसला किया। ये आम 8 और 9 मई को मुंबई में विकिरणित (irradiation) किए गए थे।

  • PMCH में यूट्यूबर मनीष कश्यप की पिटाई, जूनियर डॉक्टरों पर 3 घंटे बंधक बनाकर रखने का आरोप

    PMCH में यूट्यूबर मनीष कश्यप की पिटाई, जूनियर डॉक्टरों पर 3 घंटे बंधक बनाकर रखने का आरोप

    मशहूर यूट्यूबर और पूर्व भाजपा नेता मनीष कश्यप की सोमवार को पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में जूनियर डॉक्टरों के साथ कहासुनी हुई जिसके बाद जूनियर डॉक्टरों ने उन्हें एक कमरे में बंधक बनाकर जमकर पिटाई कर दी.

    जानकारी के मुताबिक मनीष कश्यप सोमवार दोपहर पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में किसी मरीज की पैरवी करने के लिए पहुंचे थे और इस दौरान वह वहां पर काम करने वाली एक महिला जूनियर डॉक्टर के साथ उलझ गए. इसके बाद मामला तूल पकड़ने लगा. बताया जा रहा है कि इसी दौरान मनीष कश्यप इस पूरे मामले को लेकर अस्पताल प्रांगण में वीडियो बनाने लगे जिसके बाद जूनियर डॉक्टर भड़क गए.