गोरखपुर डीडीयू स्थित महायोगी गुरु श्रीगोरक्षनाथ शोधपीठ में सोमवार को ‘नाथ पंथ का अफगानिस्तान में प्रभाव’ विषय पर एक महत्वपूर्ण परिचर्चा आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र की रिसर्चर अनुश्री ने अफगानिस्तान में नाथ पंथ पर किए गए अपने शोध और अनुभवों को साझा किया, जो आकर्षण का केंद्र रहे।
डीडीयू के कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. राजवन्त राव ने परिचर्चा की शुरुआत करते हुए नाथ पंथ के पश्चिमी भारत, अफगानिस्तान और पाकिस्तान में विस्तार पर ऐतिहासिक और पुरातात्विक संदर्भों में प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गोरखनाथ के समय को 9वीं सदी से पूर्व नहीं रखा जा सकता और नाथ पंथ शैव एवं बौद्ध परंपरा के समन्वय का परिणाम है।
रिसर्चर अनुश्री ने अफगानिस्तान में नाथ पंथ के प्रमुख केंद्रों जैसे गजनी, नागरहाल और काबुल का उल्लेख करते हुए बताया कि वहां के पश्तून मुसलमानों में नाथ पंथ के प्रति गहरी श्रद्धा है। उन्होंने यह भी बताया कि तालिबान ने बौद्ध स्थलों को नष्ट किया, लेकिन नाथ पंथ के मंदिरों और स्थलों को सुरक्षित रखा।
आईक्यएसी के निदेशक प्रो. सुधीर श्रीवास्तव, डॉ. पद्मजा सिंह और किशोर टोकेकर ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। गोरक्षनाथ शोधपीठ के उप निदेशक डॉ. कुशलनाथ मिश्र ने स्वागत किया, और सहायक निदेशक डॉ. सोनल सिंह ने आभार ज्ञापित किया।
इस अवसर पर सहायक ग्रंथालयी डॉ. मनोज द्विवेदी, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. हर्षवर्धन सिंह, अतुल, रवि, अवधेश, चिन्मयानंद मल्ल आदि उपस्थित रहे।
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