Category: उत्तर प्रदेश

  • राजकीय और अनुदानित पॉलिटेक्निक संस्थानों की भांति निजी संस्थानों को भी एसआईआरएफ रैंकिंग में सम्मिलित किया जाए, गुणवत्ता सुनिश्चित कराई जाए: मुख्यमंत्री

    राजकीय और अनुदानित पॉलिटेक्निक संस्थानों की भांति निजी संस्थानों को भी एसआईआरएफ रैंकिंग में सम्मिलित किया जाए, गुणवत्ता सुनिश्चित कराई जाए: मुख्यमंत्री

    *एनबीए, एआईआरएफ एवं नैक मूल्यांकन हेतु संस्थान स्वप्रेरणा से आगे बढ़ें, पूर्ण तैयारी के साथ आवेदन करें: मुख्यमंत्री*

    *मुख्यमंत्री का निर्देश— छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए पात्र एक भी छात्र वंचित न रहे, समयबद्ध रूप से लाभ सुनिश्चित कराया जाए*

    *अगले शैक्षणिक सत्र से नवस्थापित बस्ती, गोंडा, मीरजापुर एवं प्रतापगढ़ राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज अपने परिसरों से होंगे संचालित*

    *तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा के विद्यार्थियों को उद्योगों से जोड़ें, इंटर्नशिप योजनाओं का अधिकाधिक लाभ सुनिश्चित कराएं: मुख्यमंत्री*

    *प्राविधिक शिक्षा को रोजगारपरक एवं परिणामोन्मुखी बनाए जाने पर मुख्यमंत्री का विशेष बल*

    *वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप युवाओं को तैयार करने हेतु तकनीकी शिक्षा में सतत सुधार अनिवार्य: मुख्यमंत्री*

    *एकेटीयू में 1.64 लाख सीटों पर हुआ नामांकन, 59.91 लाख रुपये वार्षिक तक का मिला पैकेज*

    *प्रदेश में संचालित 2139 पॉलीटेक्निक संस्थानों में नवाचार आधारित पाठ्यक्रमों पर विशेष ध्यान*

    *प्लेसमेंट डे, इंटर्नशिप एवं अप्रेंटिसशिप ने युवाओं को उपलब्ध कराया रोजगार का ठोस मंच*

    *डिजिटल कक्षाओं एवं फ्रंटियर टेक्नोलॉजी के समावेश से उत्तर प्रदेश बना तकनीकी शिक्षा में अग्रणी*

    *मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्राविधिक एवं व्यावसायिक शिक्षा की अद्यतन स्थिति की समीक्षा की*

    *मुख्यमंत्री का आह्वान, तकनीकी शिक्षा को परिणामोन्मुखी एवं व्यवहारिक बनाया जाए*

    लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्राविधिक एवं व्यावसायिक शिक्षा में नवाचारों के समावेश एवं व्यवहारिक प्रशिक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने कहा कि विगत आठ वर्षों में तकनीकी शिक्षा को अधिक सुलभ, गुणवत्तापूर्ण, नवाचारपरक एवं परिणामोन्मुखी बनाने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा अनेक ठोस पहलें की गई हैं, जिनके उत्साहवर्धक परिणाम परिलक्षित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुणवत्तापरक शिक्षा के लिए सभी प्राविधिक संस्थान नैक, एनबीए तथा एनआईआरएफ मूल्यांकन में प्रतिभाग करें, परंतु आवेदन से पूर्व व्यापक तैयारी अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए।

    मुख्यमंत्री ने राज्य संस्थागत रैंकिंग रूपरेखा (SIRF) के तहत राजकीय एवं अनुदानित पॉलिटेक्निक संस्थानों की रैंकिंग की सराहना करते हुए इसके अंतर्गत निजी संस्थानों को भी सम्मिलित करने के निर्देश दिए, ताकि समस्त संस्थानों में गुणवत्ता की समान मानक सुनिश्चित हो सकें।

    मुख्यमंत्री जी 2 मई, शुक्रवार को तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा विभागों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में प्राविधिक शिक्षा मंत्री श्री आशीष पटेल तथा व्यावसायिक शिक्षा मंत्री श्री कपिल देव अग्रवाल भी उपस्थित थे।

    बैठक के दौरान अवगत कराया गया कि डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय, लखनऊ में वर्ष 2024-25 हेतु कुल 1.64 लाख सीटों पर नामांकन हुआ है। विश्वविद्यालय द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप पाठ्यक्रमों का पुनर्गठन किया गया है, जिसमें MOOC आधारित अध्ययन, चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम, मल्टीपल एंट्री-एग्जिट तथा इंटीग्रेटेड प्रोग्राम सम्मिलित किए गए हैं। सत्र 2023-24 में विश्वविद्यालय के 12,739 छात्रों को रोजगार प्राप्त हुआ, जिसमें अधिकतम वार्षिक वेतन ₹59.91 लाख रहा। इसी प्रकार, एमएमएमयूटी, गोरखपुर में वर्ष 2023-24 में छात्रों को ₹52 लाख वार्षिक वेतन तक के पैकेज पर प्रतिष्ठित कंपनियों में प्लेसमेंट मिला।

    मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालयों एवं इंजीनियरिंग कॉलेजों में व्यवहारिक अध्ययन को और अधिक सशक्त बनाने के निर्देश दिए तथा गुणवत्तापूर्ण प्रयोगशालाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर बल दिया। उन्होंने शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक श्रेणी के सभी रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति प्रक्रिया पूर्ण करने के निर्देश भी दिए।

    मुख्यमंत्री ने निर्देशित किया कि नवस्थापित राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज बस्ती, गोंडा, मीरजापुर एवं प्रतापगढ़ के भवन निर्माण तथा परिसर विकास से जुड़ी सभी परियोजनाएं निर्धारित समयसीमा के भीतर पूर्ण की जाएं, ताकि अगले शैक्षणिक सत्र से यह कॉलेज अपने निजी परिसरों से संचालित हो सकें। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्थान में नए पाठ्यक्रमों की शुरुआत करते समय स्थानीय औद्योगिक आवश्यकताओं एवं संभावनाओं को प्राथमिकता दी जाए।

    तकनीकी शिक्षा के डिप्लोमा पाठ्यक्रमों की समीक्षा के दौरान जानकारी दी गई कि वर्तमान में प्रदेश में कुल 2139 पॉलीटेक्निक संस्थान संचालित हो रहे हैं, जिनमें 147 राजकीय, 18 पीपीपी मोड, 19 अनुदानित एवं 1948 निजी संस्थान शामिल हैं। इन संस्थानों में 2.68 लाख से अधिक प्रवेश क्षमता उपलब्ध है, जिनमें 1.15 लाख से अधिक छात्र अध्ययनरत हैं।

    विभाग द्वारा डिजिटल कक्षाएं, आधार आधारित बायोमैट्रिक उपस्थिति, उद्योग-संलग्न पाठ्यक्रम, तथा फ्रंटियर टेक्नोलॉजी जैसे ड्रोन टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी, डेटा साइंस एवं मशीन लर्निंग को पाठ्यक्रमों में समाहित किया गया है। वर्ष 2017 से अब तक प्रदेश में 39 नए राजकीय पॉलीटेक्निक स्थापित किए गए हैं तथा 13,000 से अधिक शिक्षकों एवं अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया है।

    मुख्यमंत्री को व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग द्वारा अवगत कराया गया कि वर्तमान में 324 राजकीय एवं 2982 निजी आईटीआई प्रदेश में संचालित हैं। टाटा टेक्नोलॉजी लिमिटेड के सहयोग से 212 राजकीय आईटीआई को आधुनिक प्रयोगशालाओं एवं कुशल प्रशिक्षकों से सुसज्जित कर उन्नत बनाया गया है। इन संस्थानों में दीर्घकालिक ट्रेड्स के साथ-साथ स्वल्पकालिक कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित किए जा रहे हैं।

    वर्ष 2024-25 में लगभग 1.25 लाख प्रशिक्षुओं को अप्रेंटिसशिप एवं रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं। प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के अंतर्गत अब तक 30,000 से अधिक छात्रों द्वारा आवेदन किया जा चुका है।

    यह भी अवगत कराया गया कि सीएसआर फंड के माध्यम से राज्य के 37 से अधिक जनपदों में प्रतिष्ठित औद्योगिक इकाइयों द्वारा आधुनिक कौशल प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं। साथ ही, मासिक प्लेसमेंट डे के आयोजन से युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने में सफलता मिली है। एनपीएस और सीएमएपीएस योजनाओं के अंतर्गत पिछले पाँच वर्षों में 2.67 लाख से अधिक अप्रेंटिस नियुक्त किए गए हैं।

    मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा को उद्योगों से और अधिक गहराई से जोड़ा जाए तथा प्रत्येक छात्र को प्रशिक्षण के साथ एक निश्चित अवधि की औद्योगिक इंटर्नशिप सुनिश्चित कराई जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश की युवा शक्ति को तकनीकी रूप से सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाना सरकार की प्राथमिकता है। शिक्षा केवल प्रमाण-पत्र प्राप्ति का माध्यम न होकर एक व्यवहारिक, कौशलपूर्ण एवं उपयोगी प्रणाली होनी चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि उत्तर प्रदेश तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में दूरदर्शी एवं सुदृढ़ नीति के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी योजनाओं एवं कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए और प्रत्येक युवा को उसके कौशल के अनुरूप अवसर उपलब्ध कराए जाएं, ताकि ‘आत्मनिर्भर भारत’ की परिकल्पना को साकार किया जा सके।

  • गोरखपुर में पांचवें विश्वविद्यालय की स्थापना प्रक्रिया तेज

    गोरखपुर में पांचवें विश्वविद्यालय की स्थापना प्रक्रिया तेज

    “मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कर रखी है, गोरखपुर में फॉरेस्ट्री एंड हॉर्टिकल्चर यूनिवर्सिटी बनाने की घोषणा”

    “वानिकी विश्वविद्यालय के लिए कैम्पियरगंज में जमीन चिन्हित, बदले में वन विभाग को खजनी में दी जाएगी 50 एकड़ जमीन”

    “वानिकी विश्वविद्यालय के लिए योगी सरकार बजट में कर चुकी है 50 करोड़ रुपये का प्रावधान”

    गोरखपुर, 3 मई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा के अनुरूप गोरखपुर में पांचवें विश्वविद्यालय के रूप में फॉरेस्ट्री एंड हॉर्टिकल्चर यूनिवर्सिटी की स्थापना की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ने लगी है। वांछित 50 हेक्टेयर जमीन चिन्हित होने के बाद इसकी डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) तैयार की जा रही है। इसके साथ ही नए विश्वविद्यालय के लिए प्रस्तावित अधिनियम भी शासन को प्रेषित की जा चुकी है। योगी सरकार वानिकी विश्वविद्यालय के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट में 50 करोड़ रुपये का प्रावधान फरवरी में ही कर रखा है।

    *उत्तर भारत का अपनी तरह का यह इकलौता विश्वविद्यालय होगा*

    6 सितंबर 2024 को सीएम योगी आदित्यनाथ ने कैम्पियरगंज में दुनिया के पहले राजगिद्ध जटायु (रेड हेडेड वल्चर) संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र के लोकार्पण अवसर पर गोरखपुर वन प्रभाग में फॉरेस्ट्री यूनिवर्सिटी (वानिकी विश्वविद्यालय) बनाने की घोषणा की थी। यह वानिकी विश्वविद्यालय न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि समूचे उत्तर भारत का अपने तरह का पहला विश्वविद्यालय होगा। यही नहीं, यह देश का दूसरा और पूरी दुनिया का चौथा वानिकी विश्वविद्यालय होगा। देश की पहली और दुनिया की तीसरी फॉरेस्ट्री यूनिवर्सिटी तेलंगाना में है जहां वानिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान संस्थान को अपग्रेड कर विश्वविद्यालय बनाया गया है। देहरादून में 1906 में स्थापित फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टिट्यूट डीम्ड यूनिवर्सिटी के रूप में है।

    गोरखपुर में फॉरेस्ट्री यूनिवर्सिटी खोलने की मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद प्रशासन और वन विभाग ने जमीन की तलाश शुरू की। इस तलाश में कैम्पियरगंज रेंज के भारी वैसी ब्लॉक में 50 हेक्टेयर भूमि को विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए उपयुक्त पाया गया। चूंकि यह चिन्हित भूमि आरक्षित वन है इसलिए फॉरेस्ट्री यूनिवर्सिटी बनाने हेतु वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम 2023 के तहत भारत सरकार से अनुमति लेनी जरूरी है। विधिवत अनुमति प्राप्त करने के लिए 50 हेक्टेयर गैर वन भूमि उपलब्ध कराकर इस पर प्रतिपूरक वनारोपण कराना होगा। इस संबंध में जिलाधिकारी कृष्णा करुणेश बताते हैं कि फॉरेस्ट्री यूनिवर्सिटी के लिए प्रयुक्त होने वाले 50 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि के गैर वानिकी प्रयोग के लिए वन भूमि हस्तांतरण को भारत सरकार से अनुमति प्राप्त करने के लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के परिवेश पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन किया जा चुका है उम्मीद है कि लैंड ट्रांसफर का काम इसी माह पूरा हो जाएगा। जिलाधिकारी के मुताबिक विश्वविद्यालय की डीपीआर भी जल्द ही अनुमोदित होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की तैयारी अगले तीन-चार माह में निर्माण कार्य शुरू कराने की है।

    प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) विकास यादव बताते हैं कि वानिकी विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए सैद्धांतिक प्रदेश शासन के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन अनुभाग-1 से प्राप्त हो चुकी है। इसके साथ ही प्रधान मुख्य वन संरक्षक द्वारा ‘उत्तर प्रदेश वानिकी विश्वविद्यालय’ की स्थापना हेतु तैयार अधिनियम शासन को भेज दिया गया है।

    *वानिकी के साथ कृषि वानिकी, सामाजिक और औद्यानिक वानिकी के भी डिग्री और डिप्लोमा कोर्स भी होंगे संचालित*

    इस विश्वविद्यालय में वानिकी के अलावा कृषि वानिकी, सामाजिक वानिकी और औद्यानिक के भी डिग्री और डिप्लोमा कोर्स संचालित कराने की योजना है ताकि बड़ी संख्या में युवाओं के सामने नौकरी और रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध हो सकें।

    *621 करोड़ रुपये से अधिक खर्च का अनुमान*

    फॉरेस्ट्री यूनिवर्सिटी की स्थापना के लिए वन विभाग की तरफ से लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने 621 करोड़ 26 लाख 90 हजार रुपये की कार्ययोजना तैयार की है। फरवरी माह में इसे प्रमुख सचिव वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को भेज दिया गया है। 50 हेक्टेयर की कार्ययोजना में 6 हेक्टेयर मुख्य भवन और हॉस्टल के लिए होगा जबकि 44 हेक्टेयर खुला क्षेत्र होगा।

    *गोरखपुर में पहले से संचालित हैं चार विश्वविद्यालय*

    वानिकी विश्वविद्यालय से पूर्व गोरखपुर में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय और महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय अस्तित्व में हैं। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद द्वारा स्थापित निजी क्षेत्र का पहला और महायोगी गुरु गोरखनाथ विश्वविद्यालय योगी सरकार की तरफ से राज्य का पहला आयुष विश्वविद्यालय हैं।

  • बढ़ती जा रही है विश्वविद्यालय की परीक्षाओं में अनियमितता

    बढ़ती जा रही है विश्वविद्यालय की परीक्षाओं में अनियमितता

    गोरखपुर। आए दिन विश्विद्यालय परीक्षा में अनिमियता बढ़ती जा रही हैं। सेन्टर और समय का कोई छात्रों को पता नहीं रह पाता।

    कल BA 1st ईयर के वार्षिक परीक्षा के दौरान सैकड़ो बच्चे पहले दीक्षा भवन पर खड़े रहें । फिर कला संकाय पर गए। वहां से जानकारी मिली कि परीक्षा महाराणा प्रताप पर होगी। छात्र 08:20 पर वहां पहुंचे, जबकि पेपर की टाइमिंग 08:00 से 09:30 तक ही था।

    आनन फानन में पेपर कराया जाता है, ना ही डेस्क स्लिप लगी थी और ना ही रूम में कोई लाइट थी। उसके बाद भी पेपर नियत समय से 10 मिनट पहले ही छीन लिया गया।

    परीक्षार्थीयों ने बताया कि हर परीक्षा में रोज का यहीं हाल है। पल्लवी पाण्डेय, रश्मि, विवेक, यश सहित तमाम छात्र और छात्राएं इस अव्यवस्था से दुखी और आक्रोशित थें।

  • मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति ने निकाला कैंडल मार्च, दिवंगत आत्माओं को दी श्रद्धांजलि

    मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति ने निकाला कैंडल मार्च, दिवंगत आत्माओं को दी श्रद्धांजलि

    “पहलगाम में हुए आतंकी हमला बेहद कायराना और मानवता को शर्मसार कर देने वाला जघन्य अपराध है : अरविंद राय”

    गोरखपुर। मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में पर्यटकों की हत्या के विरोध में शास्त्री चौक से सभा करने के बाद कैंडल मार्च निकाला। जुलूस का नेतृत्व मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति के अध्यक्ष अरविंद राय ने किया। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में निर्दोष पर्यटकों की हत्या के विरोध में शुक्रवार की देर शाम में मान्यता पत्रकार समिति ने शहर में कैंडल मार्च जुलूस निकाला तथा दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए सामूहिक प्रार्थना सभा आयोजित कर श्रद्धांजलि दी गयी। कैंडल मार्च जुलूस शास्त्री चौक से निकाल कर अंबेडकर चौक से होते हुए चेतन तिराहे पर पहुंचकर आतंकवाद का पुतला दहन किया गया। जुलूस के दौरान लोगों ने अपने हाथों में कैंडल जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया।
    इस मौके पर पत्रकारों, स्वयंसेवी संगठनों, सामाजिक संगठनों, ट्रेड यूनियन, डॉक्टरों, अधिवक्ताओं, सांस्कृतिक संगठनों के लोगों ने कैंडल हाथों में लिए दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए सामूहिक रूप से प्रार्थना की। साथ ही कैंडल मार्च के दौरान लोगों ने आतंकियों के विरोध में जमकर नारेबाजी की गयी।
    इस मौके पर मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति के अध्यक्ष अरविंद राय ने कहा कि पहलगाम में हुए आतंकी हमला बेहद कायराना और मानवता को शर्मसार कर देने वाला जघन्य अपराध है। उन्होंने इस नृशंस हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि पूरा देश आतंक के खिलाफ एकजुट हो चुका है। राय ने कहा कि “जम्मू-कश्मीर में लगातार हो रही आतंकी घटनाओं को देखते हुए अब केवल बयानों से काम नहीं चलेगा। सरकार को चाहिए कि वह ठोस कदम उठाकर क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि हमें आतंकवाद के खिलाफ कठोर रणनीति बनानी होगी। ताकि निर्दोष लोगों की जान की रक्षा हो सके। उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए कठोर चेतावनी पर संतोष जताते हुए आशा व्यक्त की कि भारतीय सेना इसका बदला जरूर लेगी।
    इस मौके पर मुख्य रूप से मदरसा हुसैनिया दीवान बाजार के शिक्षकों, छात्रों व उलमाओं ने भी कैंडल मार्च में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेकर आतंकवाद का पुरजोर विरोध किया।
    इस मौके पर मुख्य रूप से गोजए अध्यक्ष रत्नाकर सिंह, परिवहन निगम कर्मचारी संघ नेता महेश राय, समाचार पत्र विक्रेता संघ राम सिंह, पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष राधेश्याम सिंह, नवल किशोर नाथानी, सिख समाज जगनैन सिंह नीटू, शिक्षक नेता योगेश शुक्ला, भाजपा नेता अश्वनी राय, सपा नेता जियाउल इस्लाम, व्यापारी नेता रमेश चन्द गुप्ता, समाजसेवी कुलदीप पाण्डेय, नितिन जायसवाल, दुर्गेश यादव, हरेंद्र दुबे, आटो संघ नेता पन्ने लाल, बृजेश राम त्रिपाठी, रीतेश मिश्र, भूपेन्द्र द्विवेदी, ओंकार धर द्विवेदी, धीरेंद्र गुप्ता, कमलेश सिंह, सतीश पांडेय, सैयद मनव्वर रिजवी, शिया फेडरेशन से एजाज रिजवी एडवोकेट, सुल्तान रिजवी, पार्षद समद गुफरान, विवेक कुमार मिश्र, युसूफ आजाद, फैयाज अहमद, अजीत यादव, डीके गुप्ता, मुर्तजा हुसैन रहमानी, अभिनव चतुर्वेदी, राजेश, राजू सैनी, अजीत सिंह, मनोज यादव, मोहर्रम अली, गणेश निषाद, जफर खान, महेश यादव, जावेद खान, अरूण सिंह, गणेश श्रीवास्तव, सौरभ पाण्डेय, सरदार जसपाल सिंह, आनन्द चौधरी, शफी अंसारी, पंकज श्रीवास्तव, प्रिंस पाण्डेय, सूर्य प्रकाश गुप्ता, किर्तिनिधि पाण्डेय, दिलीप पटवा, शीतल मिश्र, अल्ताफ हुसैन, मोहम्मद रजी, बृजेश मिश्र सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।

  • गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर एसपी जीआरपी संदीप कुमार मीणा का निरीक्षण, सुरक्षा को लेकर प्रशासन अलर्ट

    गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर एसपी जीआरपी संदीप कुमार मीणा का निरीक्षण, सुरक्षा को लेकर प्रशासन अलर्ट

    गोरखपुर। हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के मद्देनजर पूरे देश में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। इसी क्रम में गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर जीआरपी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसपी जीआरपी) संदीप कुमार मीणा ने सोमवार को औचक निरीक्षण किया।

    निरीक्षण के दौरान उन्होंने न केवल रेलवे स्टेशन परिसर का बारीकी से जायजा लिया, बल्कि प्लेटफार्मों, वेटिंग हॉल, टिकट काउंटर, एंट्री और एग्जिट प्वाइंट्स के साथ-साथ ट्रेनों के अंदर भी सुरक्षा व्यवस्था की जांच की। स्टेशन के आसपास के परिसर में भी उन्होंने अधिकारियों के साथ मिलकर सघन निरीक्षण किया।

    एसपी संदीप मीणा ने संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है और इसे सुनिश्चित करने के लिए जीआरपी पूरी तरह अलर्ट मोड में है। हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखी जा रही है और नियमित रूप से चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है।

    उन्होंने यह भी कहा कि स्टेशन पर तैनात सुरक्षाकर्मियों को चौकन्ना रहने और हर यात्री व वस्तु की निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही बम स्क्वॉड और डॉग स्क्वॉड की मदद से स्टेशन और ट्रेनों में जांच की जा रही है।

    गोरखपुर रेलवे स्टेशन, जो एक प्रमुख जंक्शन है, वहां पर इस तरह की सुरक्षा तैयारियां यह सुनिश्चित करती हैं कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह तैयार है।

  • सुदृढ़ होगा सिटी का वेस्ट मैनेजमेंट का सिस्टम

    सुदृढ़ होगा सिटी का वेस्ट मैनेजमेंट का सिस्टम

    “9.89 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है गार्बेज ट्रांसफर स्टेशन (जीटीएस)”

    “मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे जीटीएस चरगांवा का लोकार्पण”

    “जीटीएस पर ही अलग-अलग कर दिया जाएगा सूखा और गीला कचरा”

    “कैप्सूल के रूप मे कम्प्रेस्ड कचरा जाएगा सुथनी स्थित एनटीपीसी के प्लांट”

    गोरखपुर: 28 अप्रैल। कचरा प्रबंधन के लिए मॉडल सिटी के रूप में विकसित हो रहें गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार को गार्बेज ट्रांसफर स्टेशन (जीटीएस) का लोकार्पण करेंगे। यहां प्रोसेस होने वाला कचरा सहजनवा के सुथनी में एनटीपीसी के प्लांट भेजा जाएगा और एनटीपीसी इस कचरे से चारकोल बनाकर ऊर्जा उत्पादन में मजबूत बनेगा।

    नेशनल एयर क्लीन प्रोग्राम के अंतर्गत नगर निगम के इस गार्बेज ट्रांसफर स्टेशन के निर्माण पर कुल 9.89 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इसकी क्षमता प्रतिदिन 200 टन कूड़ा निस्तारित करने की है। इस जीटीएस में महानगर के 40 वार्डों का कूड़ा निस्तारित करने की कार्ययोजना बनाई गई है।

    नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल के मुताबिक नगर निगम की डोर टू डोर वाहनों द्वारा कूड़ा एकत्र कर गार्बेज ट्रांसफर स्टेशन पर पहुंचाया जाएगा। यहां सूखा और गीला कचरा अलग अलग कर कम्प्रेसर में कंपैक्ट कर कैप्सूल रूप में परिवर्तित कर दिया जाएगा। कैप्सूल के रूप में कम्प्रेस्ड कूड़ा सुथनी (सहजनवा) में बने नेशनल थर्मल पावर कारपोरेशन (एनटीपीसी) के प्लांट पर भेज दिया जाएगा।

    इंटीग्रेटेड वेस्ट मैनेजमेंट सिटी के रूप में आकार ले रहे सुथनी में एनटीपीसी ने कूड़े से चारकोल बनाने का प्लांट लगाया है। गार्बेज ट्रांसफर स्टेशन के क्रियाशील हो जाने से खुले में कूड़े से मुक्ति मिलेगी। यहां कम्प्रेस्ड हुआ कूड़ा एक पूर्णतः बंद कैप्सूल के माध्यम से एनटीपीसी के प्लांट में भेजा जाएगा, लिहाजा इसके ट्रांसपोर्टेशन में वायु प्रदूषण भी नहीं होगा।

  • बाइलॉज संशोधन के लिए बनेगी पांच सदस्यीय कमेटी

    बाइलॉज संशोधन के लिए बनेगी पांच सदस्यीय कमेटी

    “गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब की आमसभा की बैठक में कार्यकारणी को किया गया अधिकृत”

    गोरखपुर, 27 अप्रैल। नीतिगत निर्णय के लिए कोरम के अभाव में 13 अप्रैल को स्थगित की गई गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब की बैठक दोबारा रविवार, 27 अप्रैल को प्रेस क्लब भवन के तृतीय तल पर स्थित सभागार में हुई। बैठक की अध्यक्षता अध्यक्ष रीतेश मिश्र ने की जबकि महामंत्री पंकज कुमार श्रीवास्तव की अस्वस्थता की दशा में संचालन का दायित्व बतौर कार्यवाहक महामंत्री, संयुक्त मंत्री अंगद कुमार प्रजापति ने निभाया।

    बैठक में कोरम की पूर्णता के बाद अध्यक्ष रीतेश मिश्र ने सदस्यता, पत्रकार कल्याण कोष, विधिक पैनल, महत्वपूर्ण प्रकरणों पर जांच, निष्प्रयोज्य सम्पतियों के निस्तारण और कई विषय वस्तुओं पर आवश्यक प्रेस क्लब के बाईलॉज में संशोधन के प्रस्ताव आमसभा के समक्ष रखें।

    इन सभी प्रस्तावों पर आमसभा ने कार्यकारिणी को अनुमति प्रदान की। आमसभा ने सर्वसम्मति से बाईलॉज संशोधन के लिए पांच सदस्यीय समिति बनाने के लिए कार्यकारिणी को अधिकृत किया। समिति के सदस्यों का नाम कार्यकारिणी तय करेगी। आमसभा की बैठक में सदस्यों के स्वास्थ्य सुरक्षा पर भी विशद चर्चा हुई और एक ऐसी कार्ययोजना की आवश्यकता जताई गई जिससे उन्हें इलाज के लिए परेशान होने से बचाया जा सके। बैठक में यह अपील की गई कि सभी सदस्य पत्रकार कल्याण कोष में अपना वार्षिक अंशदान जमा कर दें ताकि इस कोष से सहायता पाने की उनकी अर्हता रहें।

    बैठक में उपाध्यक्ष भूपेंद्र द्विवेदी, कोषाध्यक्ष प्रिन्स कुमार पांडेय, पुस्तकालय मंत्री विनय सिंह, कार्यकारिणी सदस्य राजीव कुमार पांडेय, संस्थापक सदस्य कौशल त्रिपाठी, श्रीकृष्ण त्रिपाठी, राकेश सारस्वत, पूर्व अध्यक्ष एसपी सिंह, डॉ. अरविंद कुमार राय, अशोक चौधरी, पूर्व मंत्री धीरज श्रीवास्तव, मनीष मिश्रा, विजय कुमार जायसवाल, ओंकार धर द्विवेदी, पूर्व उपाध्यक्ष राकेश सिंह, सुरेश राय, अजीत यादव, ब्रजेन्द्र सिंह, बागीश चंद्र श्रीवास्तव, डॉ. शेष नारायण पांडेय, राधेश्याम जायसवाल, कमलेश सिंह, राकेश कुमार राय, रजनीश त्रिपाठी, आशुतोष मिश्रा, मनोज मिश्र, पुरुषोत्तम राय, विवेक पांडेय, सतीश पांडेय, उमेश पाठक, रामचंद्र शाही, सलीम खान, राजेश पांडेय, अभयानंद त्रिपाठी, दामोदर उपाध्याय, जितेंद्र कुमार पांडेय, पीपीएन उपाध्याय, धूर्जटी भूतभावन मिश्र, दुर्गेश त्रिपाठी, पवन कुमार शाह, गिरिजा शंकर वर्मा, मुकेश पांडेय, जेपी दूबे, महेंद्र गौड़, हरेंद्र धर दूबे, दुर्गेश यादव, जितेंद्र कुमार, डॉ. जवाहर लाल निगम, कैलाश चंद यादव, शाहनवाज आलम, अमित कुमार, दिनेश यादव, जयप्रकाश यादव, अनुराग पांडेय, बेचन सिंह, संजय त्रिपाठी, राधेश्याम प्रजापति, अमरनाथ जायसवाल, संजय श्रीवास्तव, डॉ. विश्वमित्र भट्ट,अभिनव चतुर्वेदी, राम मनोहर त्रिपाठी, संगम दूबे, अरुण मुन्ना, राजेश राय, अनवर अली, निखिलेश प्रताप सिंह चंदन, अवधेश दूबे, विवेक श्रीवास्तव, अविनाश श्रीवास्तव, यतींद्र मिश्रा, उत्तम कुमार दूबे, कंचन त्रिपाठी, डॉ. मनोज मिश्रा, प्रमोद कुमार सिंह, अरविंद वर्मा, संजय कुमार, दुर्गेश चंद्र ओझा, आशीष भट्ट, बैजू गुप्ता, धनेश कुमार, राशिद नूर, शैलेंद्र सिंह, मनोज नवल, विनय शर्मा, आलोक कुमार श्रीवास्तव, तनवीर अहमद आजाद, अभिषेक श्रीवास्तव, सुशील कुमार, रेवती रमण भंडारी, अब्दुल लतीफ, विवेक कुमार अस्थाना, सुभाष कुमार शर्मा, सज्जाद अहमद, अशोक कुमार पांडेय, कुमार राजीव, मो. आतिफ, परवेज अहमद खान, फैयाज अहमद, जमाल अहमद, मनोज श्रीवास्तव, संजय कुमार पांडेय, गौरव त्रिपाठी, शिवहर्ष द्विवेदी, संदीप कुमार दूबे, अजीत कुमार यादव, अभिमन्यु चौधरी, दानपाल सिंह, आलोक शुक्ला, अनिल कुमार राय, किशोर मौर्या, अवनीश त्रिपाठी, रजनीश कुमार श्रीवास्तव, राजकुमार नायक, विजय सिंह, सुभाष गुप्ता, शकील अहमद, राशिद खान, नीरज श्रीवास्तव, सैयद शकील, संजय दूबे, रजनीश त्रिपाठी, हरिकेश सिंह, मुकेश कुमार उपाध्याय, मनोज कुमार, शफी अंसारी, दिलीप कुमार गुप्ता, राजेश, इशरत शमीम सिद्दीकी, राजेश सोनकर, जावेद खान, बालमुकुंद निषाद, अजीत सिंह, रविंदर यादव, राकेश गौड़, प्रदीप कुमार गौड़, अरविंद श्रीवास्तव, वेद प्रकाश पाठक, मोहर्रम अली उपस्थित रहें।

  • प्रवेश के लिए इस बार DDURN पंजीकरण जरूरी

    प्रवेश के लिए इस बार DDURN पंजीकरण जरूरी

    गोरखपुर। नयीं व्यवस्था में अब विश्वविद्यालय या उससे सम्बद्ध किसी कालेज में प्रवेश लेने के इच्छुक आवेदकों को सबसे पहले विश्वविद्यालय के प्रवेश पोर्टल पर जाकर पंजीकरण कराना होगा। इस रजिस्ट्रेशन के बाद उसे एक डीडीयूआरएन (डीडीयू रजिस्ट्रेशन नम्बर) प्राप्त होगा।

    यदि अभ्यर्थी विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश लेना चाहता है तो वह उसी पोर्टल पर प्रोग्राम का चयन करके अपना फार्म पूरा कर सकता है। ऐसे आवेदक जो किसी कालेज में प्रवेश लेना चाहते हैं वे सम्बन्धित महाविद्यालय में अपने डीडीयूआरएन का उल्लेख करते हुए वहां का फार्म भरेंगे। बिना डीडीयूआरएन के कालेज उनका प्रवेश नहीं करेंगे। प्रत्येक आवेदक का केवल एक पंजीकरण नंबर होगा। इसी के माध्यम से वह चाहे तो एक से अधिक पाठ्यक्रमों के आवेदन कर सकेगा।

    *ऐसे होगा DDURN पंजीकरण*

    1. दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की प्रवेश संबंधी आधिकारिक वेबसाइट https://dduguadmission.in/ पर जाएं।
    2. वेबसाइट पर उपलब्ध लिंक “Click here for Deen Dayal Upadhyaya Gorakhpur University Registration Number” पर क्लिक करें।
    3. खुले हुए पेज के दाहिनी ओर स्थित “New Registration” पर क्लिक करके अपना लॉगिन आईडी (Login ID) बनाएं।
    4. पंजीकरण ईमेल आईडी के माध्यम से किया जाएगा, और एक ईमेल आईडी से केवल एक ही पंजीकरण किया जा सकता है, जिसे बाद में बदला नहीं जा सकेगा। इसलिए मान्य (सही और सक्रिय) ईमेल आईडी का ही उपयोग करें, क्योंकि ओटीपी (OTP) उसी ईमेल पर भेजा जाएगा।
    5. बनाए गए Login ID एवं पासवर्ड को नोट करके सुरक्षित रखें।
    6. लॉगिन ID बनाने के बाद, उसी पेज पर दाहिनी ओर “Login” पर क्लिक करें और अपना पूर्ण विवरण (नाम, पिता का नाम, माता का नाम, ईमेल आदि) भरकर अपनी प्रोफाइल (Profile) को पूर्ण करें।
    7. प्रोफाइल पूर्ण करने के बाद पंजीकरण शुल्क का ऑनलाइन भुगतान करें ।
    8. यदि खाते से राशि कट जाए लेकिन भुगतान सफल (Successful) न हो, तो 48 घंटे तक दुबारा भुगतान न करें।
    9. भुगतान सफल होते ही आपका DDURN नंबर जनरेट हो जाएगा, जिसे नोट करके सुरक्षित रखें।
    10. आप अपने पंजीकरण (DDURN) का प्रिंट (Print Form) पर क्लिक करके कभी भी प्राप्त कर सकते हैं।
    11.पंजीकरण (DDURN) के उपरांत जो अभ्यर्थी दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में प्रवेश चाहते हैं, उन्हें कार्यक्रम अनुसार (Programme Wise) ऑनलाइन आवेदन करना होगा
    12. यदि कोई अभ्यर्थी महाविद्यालय में प्रवेश लेना चाहता है, तो उसे इस DDURN नंबर को लेकर महाविद्यालय में प्रस्तुत करना होगा।

  • योगी सरकार में सुदृढ़ हो रहें नदियों के तटबंध, बाढ़ से बचेंगे गांव

    योगी सरकार में सुदृढ़ हो रहें नदियों के तटबंध, बाढ़ से बचेंगे गांव

    *बाढ़ बचाव से जुड़ी 119 करोड़ रुपये की 27 परियोजनाओं का कार्य पूरा*

    *योगी सरकार ने राप्ती, रोहिन, घाघरा, कुआनो और गुर्रा नदियों के तटबंध पर कराए हैं कार्य*

    *सात विधानसभा क्षेत्रों की जनता को नहीं सताएगी बाढ़ की चिंता*

    गोरखपुर। दशकों तक बाढ़ की विभीषिका को झेलने के लिए अभिशप्त रहे गोरखपुर को बाढ़ बचाव के लिए संवेदनशील योगी सरकार की समयबद्ध कार्ययोजना का सकारात्मक परिणाम साल दर साल दिख रहा है। 2017 के बाद से लगातार हो रहे बाढ़ सुरक्षा के कार्यों से नदियों के तटबंध सुरक्षित होते गए और जिले में होने वाली व्यापक हानि में अभूतपूर्व कमी आई है। योगी सरकार में नदियों के तटबंधों को सुरक्षित करने का सिलसिला लगातार जारी है और इससे बड़े पैमाने पर गांवों को बाढ़ की त्रासदी से बचाने में कामयाबी मिली है। इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए इस साल भी बाढ़ की दस्तक से काफी पहले ही गोरखपुर में 119 करोड़ रुपये से अधिक की बाढ़ बचाव परियोजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं। आगामी दिनों में इन कार्यों का लोकार्पण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों संभावित है।

    गोरखपुर में बाढ़ खंड, बाढ़ खंड-2 और ड्रेनेज खंड ने कुल मिलाकर बाढ़ सुरक्षा की 27 परियोजनाओं को पूर्ण कर लिया है। सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता विकास सिंह के अनुसार ये परियोजनाएं राप्ती, रोहिन, घाघरा, गुर्रा, कुआनो नदियों के तटबंधों और इन तटबंधों के आसपास बसे गांवों को मानसून में बाढ़ की त्रासदी से बचाने की हैं। इन परियोजनाओं का लाभ जिले की सात विधानसभा क्षेत्रों गोरखपुर ग्रामीण, चौरीचौरा, खजनी, बांसगांव, सहजनवां, कैम्पियरगंज और चिल्लूपार की जनता को मिलेगा। उल्लेखनीय है कि बीते कुछ सालों से गोरखपुर में बाढ़ की स्थिति पर काफी नियंत्रण पा लिया गया है। जबकि एक लंबे समय तक बाढ़ की त्रासदी इसकी पहचान से जुड़ गई थी। 1998 की प्रलयंकारी बाढ़ तो आज भी लोगों को याद है। बाढ़ पर काबू पाने का सिलसिला तब शुरू हुआ जब 2017 में योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने। अपने संसदीय कार्यकाल से ही वह जिले में आने वाली बाढ़ से वाकिफ थे। लिहाजा मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने कार्ययोजना बनवाकर जहां जरूरत हुई वहां नदियों की ड्रेजिंग कराई, नदियों की धारा को चैनलाइज कराया, बड़े पैमाने पर बंधों पर बोल्डर पिचिंग के काम कराए।

    *बाढ़ खंड द्वारा कराए गए कार्य*
    1- राप्ती नदी के मलौनी तटबंध पर डुहिया गांव के समीप बाढ़ सुरक्षात्मक कार्य, लागत 6 करोड़ 57 लाख 86 हजार रुपये।
    2- राप्ती नदी के नौसढ़-कलानी तटबंध पर बोल्डर पिचिंग एवं टो-बाल बनाने का कार्य, लागत 1 करोड़ 67 लाख 76 हजार रुपये।
    3- राप्ती नदी के छितहरी-थुन्ही तटबंध पर ग्राम गोपालपुर के पास बाढ़ सुरक्षात्मक कार्य, लागत 2 करोड़ 49 लाख 61 हजार रुपये।
    4- राप्ती नदी के कनईल-मझगांवा बांध पर बाढ़ सुरक्षा के कार्य, लागत 6 करोड़ 26 लाख 63 हजार रुपये।
    5- राप्ती नदी के कौड़ीराम-मलौली तटबंध पर टीकर गांव के समीप स्लोप पिचिंग की पुनर्स्थापना, लागत 7 करोड़ 88 लाख 3 हजार रुपये।
    6- राप्ती नदी के कनईल-मझगांवा बांध के दाएं तट पर तथा मलौनी तटबंध के बाएं तट के पास से निकलने वाली गुर्रा नदी उद्गम पर गुर्रा नदी के आंशिक डायवर्जन की परियोजना, लागत 1 करोड़ 56 लाख 51 हजार रुपये।
    7- राप्ती नदी के बाएं और गुर्रा नदी के दाएं तट पर स्थित बरहीपाथ तटबंध पर बांध पुनर्स्थापना का कार्य, लागत 6 करोड़ 26 लाख 30 हजार रुपये।
    8- राप्ती नदी के मलौनी तटबंध पर मुगलहा स्पर की पुनर्स्थापना, लागत 3 करोड़ 16 लाख 42 हजार रुपये।
    9- गुर्रा नदी पर स्थित राजधानी-सिलहटा तटबंध पर पुनर्स्थापना कार्य, लागत 6 करोड़ 25 लाख 8 हजार रुपये।
    10- गुर्रा नदी/फरेन नाला पर नेकवार-बोहावार विस्तार तटबंध का उच्चीकरण एवं सुदृढ़ीकरण, लागत 7 करोड़ 13 लाख 18 हजार रुपये।
    ————
    *बाढ़ खंड -2 द्वारा कराए गए कार्य*
    1- राप्ती नदी के असवनपार-गहिराघाट तटबंध पर कटान स्थल के पास बाढ़ सुरक्षा के कार्य, लागत 4 करोड़ 37 लाख 55 हजार रुपये।
    2- घाघरा नदी के बाएं तट पर स्थित ग्रामसभा धोबहिया, बुढ़नपुरा, नरहरपुर, खडेसरी के सुरक्षार्थ बाढ़ बचाव कार्य, लागत 5 करोड़ 64 लाख 39 हजार रुपये।
    3- घाघरा नदी के बाएं तट पर स्थित बड़हलगंज टाउन के सुरक्षार्थ लेटाघाट के अपस्ट्रीम में बाढ़ सुरक्षा की परियोजना, लागत 7 करोड़ 3 लाख 9 हजार रुपये।
    4- घाघरा नदी के बाएं स्थित मल्लाह टोली, बिसरा और अर्जुनपुर गांवों को बाढ़ से बचाव के कार्य, लागत 7 करोड़ 29 लाख 6 हजार रुपये।
    5- राप्ती नदी के दाएं तट पर स्थित बोकटा-बरवार तटबंध पर स्लोप पिचिंग कार्य, लागत 8 करोड़ 12 लाख 6 हजार रुपये।
    6- घाघरा नदी के बाएं तट पर स्थित गोनघट, खैराटी और बगहा देवार की कटान से सुरक्षा तथा सीधेगौर-बेल्थर के पास स्पिल बंद करने की परियोजना, लागत 1 करोड़ 79 लाख 7 हजार रुपये।
    7- राप्ती नदी के दाएं तट पर स्थित बोकटा-बरवार तटबंध पर परक्यूपाइन लगाने की परियोजना, लागत 80 लाख 64 हजार रुपये।
    8- कुआनो नदी के बाएं तट पर स्थित प्राचीन धोलेश्वरनाथ मंदिर और धुरियापार बाजार के सुरक्षार्थ बाढ़ बचाव की परियोजना, लागत 2 करोड़ 9 लाख 11 हजार रुपये।
    9- घाघरा नदी के बाएं तट पर स्थित मठरामगिरी, बेलाव आदि गांवों की बाढ़ से बचाव की परियोजना, लागत 97 लाख 73 हजार रुपये।
    10- राप्ती नदी के कंसासुर-खुटभार रिंग तटबंध पर बाढ़ सुरक्षा की परियोजना, लागत 74 लाख 42 हजार रुपये।
    11- कुआनो नदी के दाएं तट पर बेलवा, शाहपुर और जिगिनिया के बाढ़ बचाव की परियोजना, लागत 1 करोड़ 25 लाख 97 हजार रुपये।
    —————-
    *ड्रेनेज खंड द्वारा कराए गए कार्य*
    1- रोहिन नदी पर स्थित मानीराम-डोमिनगढ़ तटबंध के सुदृढ़ीकरण की परियोजना, लागत 3 करोड़ 95 लाख 67 हजार रुपये।
    2- राप्ती नदी पर स्थित बढ़याकोठा तटबंध पर कटाव निरोधक कार्य, लागत 5 करोड़ 87 लाख 78 हजार रुपये।
    3- रोहिन नदी पर स्थित बनरहा तटबंध पर कटाव निरोधक कार्य, लागत 7 करोड़ 84 लाख 11 हजार रुपये।
    4- राप्ती नदी पर स्थित सहजनवा-डुमरिया बाबू तटबंध पर सिसई पुल के डाउनस्ट्रीम में कटाव निरोधक कार्य, लागत 2 करोड़ 68 लाख 46 हजार रुपये।
    5- राप्ती नदी के बेलसर-रिगौली तटबंध पर कटाव निरोधक कार्य, लागत 5 करोड़ 38 लाख 95 हजार रुपये।
    6- राप्ती नदी पर स्थित सहजनवा-डुमरिया बाबू तटबंध पर किमी 12 से किमी 12.5 तक कटाव निरोधक कार्य, लागत 3 करोड़ 90 लाख 42 हजार रुपये।

  • सरकारी चादर में शामिल हुए अजमेर शरीफ के गद्दीनशीन सैय्यद सलमान चिश्ती

    सरकारी चादर में शामिल हुए अजमेर शरीफ के गद्दीनशीन सैय्यद सलमान चिश्ती

    सरकारी चादर में शामिल हुए अजमेर शरीफ के गद्दीनशीन सैय्यद सलमान चिश्ती

    “दहशतगर्द इंसानियत के दुश्मन, इनका कोई धर्म मज़हब नहीं-सैय्यद सलमान चिश्ती”

    संवाददाता: शिशिर श्रीवास्तव

    गोरखपुर। क़दीमी दरग़ाह हज़रत बाबा मुबारक खान शहीद(र.अ) का सालाना उर्स व मेला 25 अप्रैल को धार्मिक आयोजन के साथ शुरू हो गया है। उर्स व मेले के दूसरे दिन सुबह आस्ताने पर गुस्ल व संदल पोशी की रस्म अदा करने के बाद नमाजे फजर कुरान खानी और मिलाद शरीफ का प्रोग्राम आयोजित किया गया। 12:15 बजे कुल शरीफ बाद मगरिब सरकारी चादर और गागर के जुलूस में अजमेर शरीफ के गद्दीनशीन और चिश्ती फाउंडेशन के चेयरमैन हाजी सैय्यद सलमान चिश्ती साहब ने सरकारी चादर को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। सरकारी चादर में दरगाह कमेटी के अध्यक्ष इक़रार अहमद ,उपाध्यक्ष शमशीर अहमद शेरू,हाजी खुर्शीद अहमद खान, हाजी कलीम फरजंद, सैयद शहाब ,अहमद हसन, रमजान खान, कुतुबुद्दीन खान ,हमजा मोहम्मद इरशाद समेत अन्य लोग मौजूद रहें।

    “चिश्ती साहब के स्वागत के लिए उमड़ा जन सैलाब”

    हजरत बाबा मुबारक खान शहीद (र. अ) के अस्ताने लिए रिवायती सरकारी चादर व गागर में बड़ी संख्या में दूरदराज से बाबा के अकीदतमंद लोग शामिल हुए, जिसमें महिलाएं, पुरुष,बच्चे व बुजुर्ग चादर के साथ बड़े ही अदबो एहतेराम के साथ चलते रहे। सरकारी चादर में घोड़ा, बग्घी, बैण्ड बाजा, रंगबिरंगी लाइटों के साथ आधुनिक कारें भी शामिल रही।

    सैयद सलमान चिश्ती के स्वागत के लिए जगह-जगह मंच लगाए गए थे, जहां पर सूफी अंदाज में उनका फूलों की वर्षा करके इस्तकबाल किया गया।