Category: न्यूज़

Your blog category

  • गोरखपुर को ₹40 करोड़ की सौगात, 119 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास

    गोरखपुर को ₹40 करोड़ की सौगात, 119 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास

    गोरखपुर ब्यूरो निष्पक्ष टुडे :-

    कल्याण मंडपम का उद्घाटन, नगर निगम के 115 कार्यों का शिलान्यास; CM योगी ने कानून-व्यवस्था, रोजगार और पेंशन को लेकर गिनाईं सरकार की उपलब्धियां


    गोरखपुर, 16 सितंबर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को गोरखपुर को करीब ₹40 करोड़ की 119 विकास परियोजनाओं की सौगात दी। जंगल नकहा नंबर-2 में नवनिर्मित कल्याण मंडपम का लोकार्पण करने के साथ कई विकास कार्यों का शिलान्यास किया गया।

    🔴 मुख्य Highlights

    🏗️ ₹40 करोड़ की 119 परियोजनाएं
    करीब ₹40 करोड़ की लागत वाली 119 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास।
    इनमें नगर निगम, जीडीए और ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के कार्य शामिल।
    नगर निगम के 115 विकास कार्यों का शिलान्यास।

    🏛️ ₹3.09 करोड़ में तैयार हुआ कल्याण मंडपम

    जंगल नकहा नंबर-2 में 2461 वर्गमीटर भूमि पर दो मंजिला कल्याण मंडपम बनाया गया है।

    खास सुविधाएं:

    👥 300 लोगों की क्षमता

    बड़ा आयोजन हॉल
    किचन और स्टोर
    ऑफिस और चेंज रूम
    महिला एवं पुरुषों के लिए अलग टॉयलेट
    पर्याप्त पार्किंग
    लॉन और फव्वारा
    यहां रियायती दर पर मांगलिक और सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किए जा सकेंगे।

    ⚖️ कानून-व्यवस्था पर CM योगी का बड़ा दाव :-

    मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास और जनोपयोगी सुविधाओं के लिए कानून का राज और सुरक्षित वातावरण जरूरी है।
    उन्होंने दावा किया कि 2017 के बाद यूपी में कानून-व्यवस्था में बदलाव आया है।

    माफिया को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी में माफिया “या तो जेल में हैं या फिर दूसरे लोक की यात्रा पर जा चुके हैं।”

    📈 ‘यूपी अब बीमारू राज्य नहीं’

    CM योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब बीमारू राज्य नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बन रहा है।
    उन्होंने इसके पीछे बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, उद्योग और कनेक्टिविटी को प्रमुख कारणों के रूप में बताया।

    🦟 इंसेफेलाइटिस से लेकर एम्स तक का जिक्र :-

    मुख्यमंत्री ने गोरखपुर के बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने इंसेफेलाइटिस, मच्छर और माफिया जैसी चुनौतियों पर काम किया।

    उन्होंने गोरखपुर में—

    खाद कारखाने का पुनः संचालन → फोरलेन कनेक्टिविटी → फ्लाईओवर/ओवरब्रिज → रामगढ़ताल का पर्यटन विकास → बीआरडी मेडिकल कॉलेज → एम्स
    जैसे विकास कार्यों का जिक्र किया।

    👨‍💼 6 महीने में 1 लाख सरकारी नौकरियों का दावा :-

    CM योगी के मुताबिक उनकी सरकार अब तक साढ़े 9 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दे चुकी है।
    उन्होंने कहा कि अगले 6 महीने में 1 लाख और युवाओं को सरकारी नौकरी देने की दिशा में सरकार काम कर रही है।
    गीडा को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि वहां करीब 500 कारखाने लगे हैं और लगभग 50 हजार युवाओं को रोजगार मिला है।

    💰 1.10 करोड़ लोगों को पेंशन :-

    मुख्यमंत्री के अनुसार सरकार करीब 1 करोड़ 10 लाख वृद्धजन, निराश्रित महिलाओं और दिव्यांगजन को सालाना ₹12 हजार पेंशन दे रही है।

    उन्होंने कहा कि जल्द ही पेंशन की राशि और लाभार्थियों की संख्या बढ़ाई जाएगी।

    🏠 वंचित पात्र लोगों के लिए विशेष शिविर :-

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आवास, शौचालय, राशन, रसोई गैस और बेटियों की पढ़ाई-विवाह जैसी योजनाओं से पात्र लोगों को लाभ दिया जा रहा है।

    उन्होंने बताया कि जो पात्र लोग अभी भी किसी कारण से लाभ से वंचित हैं, उन्हें योजनाओं से जोड़ने के लिए 7 अक्टूबर से एक सप्ताह का विशेष शिविर लगाया जाएगा।

    🌱 कल्याण मंडपम में पौधरोपधन :-

    लोकार्पण से पहले मुख्यमंत्री ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच फीता काटकर कल्याण मंडपम का उद्घाटन किया।
    निरीक्षण के बाद उन्होंने परिसर में मौलश्री का पौधा लगाया और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

    📌 एक नजर में बड़े आंकड़ा :-

    मुद्दा
    आंकड़ा
    कुल परियोजनाएं
    119
    कुल लागत
    करीब ₹40 करोड़
    नगर निगम के कार्य
    115
    नगर निगम कार्यों की लागत
    ₹28.91 करोड़
    कल्याण मंडपम की लागत
    ₹3.09 करोड़
    मंडपम की क्षमता
    300 लोग
    अब तक सरकारी नौकरी का दावा
    9.5 लाख
    अगले 6 महीने का नौकरी लक्ष्य
    1 लाख
    पेंशन लाभार्थी
    1.10 करोड़
    वार्षिक पेंशन
    ₹12,000

    निष्पक्ष टुडे की नजर :-

    गोरखपुर में विकास परियोजनाओं के साथ मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था, रोजगार, पेंशन और सरकारी योजनाओं को लेकर सरकार का पक्ष रखा। रोजगार और अन्य उपलब्धियों के आंकड़े मुख्यमंत्री द्वारा कार्यक्रम में बताए गए हैं।

  • लखनऊ में रिश्तों का विवाद बना सड़क पर बवाल, युवती को कार से कुचलने की कोशिश

    लखनऊ में रिश्तों का विवाद बना सड़क पर बवाल, युवती को कार से कुचलने की कोशिश

    लखनऊ ब्यूरो निष्पक्ष टुडे :-

    जनेश्वर मिश्र पार्क के गेट नंबर-4 के सामने हुआ विवाद, CCTV में कैद घटनाक्रम; कार की पहचान के बाद


    शाहनवाज हिरासत में

    लखनऊ: गोमतीनगर स्थित जनेश्वर मिश्र पार्क के गेट नंबर-4 के सामने एक युवती को कार से टक्कर मारने और बोनट पर घसीटने का मामला सामने आया है। घटना का CCTV वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की है।

    🔴 क्या है पूरा मामला?

    • 📍 जगह: जनेश्वर मिश्र पार्क, गेट नंबर-4, गोमतीनगर
    • 👩 युवती: अनामिका सिंह
    • 👨 युवक: शाहनवाज
    • ❤️ रिश्ता: दोनों के करीब एक साल से रिलेशनशिप में होने की बात सामने आई है।
    • ⚠️ विवाद: आरोप है कि अनामिका ने शाहनवाज को दूसरी युवती के साथ देख लिया था।

    🔥 दूसरी युवती को लेकर बढ़ा विवाद

    बताया जा रहा है कि दूसरी युवती को लेकर अनामिका और शाहनवाज के बीच जनेश्वर मिश्र पार्क के पास विवाद हुआ।

    कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह दावा भी किया गया है कि शाहनवाज ने अनामिका को अपना नाम “यश ठाकुर” बताया था। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि जांच के स्तर पर स्पष्ट होना बाकी है।

    🎥 CCTV में क्या दिखा?

    CCTV फुटेज में युवती कार के सामने आती दिखाई देती है।

    इसके बाद कार आगे बढ़ती है और युवती बोनट पर गिर जाती है।

    कार कुछ दूरी तक आगे जाती दिखाई देती है और युवती बोनट पर घिसटती नजर आती है।

    घटना के बाद चालक के मौके से निकल जाने की बात सामने आई।

    🚔 पुलिस की कार्रवाई

    घटना का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।

    कार के नंबर और पहचान के आधार पर पुलिस ने शाहनवाज को हिरासत में लिया है।

    अब पुलिस उससे पूछताछ कर रही है और घटना की पूरी परिस्थितियों को जांच रही है।

    🎙️ पुलिस की बाइट

     

    ❓ अब जांच में इन सवालों के जवाब जरूरी

    1️⃣ विवाद की असली वजह क्या थी?

    2️⃣ कार किस परिस्थिति में आगे बढ़ी?

    3️⃣ क्या युवती को जानबूझकर टक्कर मारी गई या घटना की परिस्थितियां अलग थीं?

    4️⃣ “यश ठाकुर” नाम से पहचान बताने का दावा सही है या नहीं?

    5️⃣ CCTV और प्रत्यक्षदर्शियों के आधार पर पुलिस की जांच में क्या सामने आता है?

    ⚖️ पुलिस जांच पर टिकी नजर

    फिलहाल घटना से जुड़े कई दावे मीडिया और सोशल मीडिया में सामने आ रहे हैं। इनमें से जिन बातों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, उन्हें आरोप या दावा ही माना जाना चाहिए।

    CCTV फुटेज, वाहन की पहचान, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और पुलिस पूछताछ से अब इस मामले की पूरी तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।

    निष्पक्ष टुडे — खबर वही, जिसमें सवाल भी हों और तथ्यों की पड़ताल भी।

  • बालाजी दरबार में गणेश चतुर्दशी और हरितालिका तीज की धूम, भक्ति में डूबीं मातृशक्तियां

    बालाजी दरबार में गणेश चतुर्दशी और हरितालिका तीज की धूम, भक्ति में डूबीं मातृशक्तियां

    गोरखपुर ब्यूरो निष्पक्ष टुडे :-

    सुबह से देर रात तक गूंजे पूजा-अर्चना के स्वर, भगवान नर्वदेश्वर के पूजन के लिए बड़ी संख्या में पहुंचीं महिलाएं; बालाजी सेवा समिति ट्रस्ट ने संभाली व्यवस्थाओं की कमान


    गोरखपुर। गणेश चतुर्दशी और हरितालिका तीज के पावन अवसर पर श्री बालाजी मंदिर में आस्था और भक्ति का विशेष नजारा देखने को मिला। सुबह होते ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हुआ और देखते ही देखते बड़ी संख्या में मातृशक्तियां भगवान नर्वदेश्वर के पूजन-अर्चन के लिए पहुंच गईं।

    जल, दूध, अक्षत और पुष्प से हुआ पूजन

    श्रद्धालु महिलाओं ने भगवान नर्वदेश्वर को जल, अक्षत, दूध और पुष्प अर्पित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। धार्मिक अनुष्ठानों का यह सिलसिला सुबह से शुरू होकर देर रात तक चलता रहा।

    मंदिर परिसर में दिनभर श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना रहा। तीज के अवसर पर महिलाओं ने अपने परिवार की सुख-समृद्धि और मंगलकामना के लिए भगवान से प्रार्थना की।

    श्रद्धालुओं की सुविधा पर खास फोकस

    धार्मिक आयोजन के साथ श्रद्धालुओं की सुविधा और व्यवस्था को लेकर भी विशेष ध्यान दिया गया। बालाजी सेवा समिति ट्रस्ट के अध्यक्ष जितेंद्र मणि तिवारी और उपाध्यक्ष अमितेश्वर कुमार दुबे की देखरेख में समिति के सदस्यों ने व्यवस्थाओं को संभाला।

    आयोजकों के मुताबिक, कोशिश रही कि मंदिर पहुंचने वाले किसी भी श्रद्धालु को पूजा-अर्चना के दौरान परेशानी का सामना न करना पड़े।

    इनकी रही अहम भूमिका

    आयोजन को सफल बनाने में पंडित शुभम शास्त्री, कामाख्या नारायण सिंह, रंजन बाबा, राकेश राय और सक्षम दुबे समेत समिति के अन्य सदस्यों का सहयोग रहा।

    आस्था के साथ दिखी सेवा की भावना

    गणेश चतुर्दशी और हरितालिका तीज के इस पावन अवसर ने श्री बालाजी मंदिर को पूरे दिन भक्ति और श्रद्धा के केंद्र में बनाए रखा। पूजा-अर्चना के साथ श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए की गई व्यवस्थाओं ने आयोजन को व्यवस्थित रूप देने में अहम भूमिका निभाई।

    बालाजी सेवा समिति ट्रस्ट की ओर से इस अवसर पर सभी श्रद्धालुओं के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की गई।

    मुख्य बिंदु

    • गणेश चतुर्दशी एवं हरितालिका तीज पर विशेष आयोजन
    • बड़ी संख्या में मातृशक्तियों ने किया पूजन-अर्चन
    • भगवान नर्वदेश्वर को जल, दूध, अक्षत और पुष्प अर्पित किए गए
    • सुबह से देर रात तक जारी रहा पूजा-अर्चना का सिलसिला
    • बालाजी सेवा समिति ट्रस्ट ने संभाली श्रद्धालुओं की व्यवस्थाएं
    • अध्यक्ष जितेंद्र मणि तिवारी और उपाध्यक्ष अमितेश्वर कुमार दुबे की देखरेख में आयोजन
  • ट्रॉफी से ज्यादा अहम टीम का सम्मान! नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार पर BCCI ने दी सफाई

    ट्रॉफी से ज्यादा अहम टीम का सम्मान! नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार पर BCCI ने दी सफाई

    स्पोर्ट्स डेस्क निष्पक्ष टुडे :-

    पहलगाम हमले के बाद बदले भारत-पाक रिश्तों का असर क्रिकेट तक पहुंचा; देवजीत सैकिया बोले—देश की भावनाएं BCCI तक पहुंच रही थीं, टीम के प्रदर्शन और 2028 टी20 वर्ल्ड कप पर है अब पूरा फोकस


    नई दिल्ली।एशिया कप की ट्रॉफी… मैदान पर भारत की शानदार जीत… और उसके बाद ऐसा फैसला, जिसने क्रिकेट से ज्यादा भारत-पाकिस्तान रिश्तों की चर्चा छेड़ दी।

    टीम इंडिया ने एशिया कप का खिताब जीतने के बावजूद ट्रॉफी पाकिस्तान के एशियन क्रिकेट काउंसिल अध्यक्ष मोहसिन नकवी के हाथों से लेने से इनकार कर दिया। इस फैसले पर अब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी BCCI की ओर से सफाई सामने आई है।

    BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने कहा है कि उनके लिए ट्रॉफी से ज्यादा महत्वपूर्ण भारतीय टीम का प्रदर्शन है।

    पहलगाम हमले के बाद बदले हालात

    सैकिया के मुताबिक, करीब डेढ़ साल पहले तक भारत और पाकिस्तान के क्रिकेट संबंधों को लेकर परिस्थितियां अलग थीं। लेकिन अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद हालात काफी बदल गए।

    देश में पाकिस्तान को लेकर भावनाएं पहले से कहीं ज्यादा मुखर हुईं और इन भावनाओं का असर क्रिकेट बोर्ड तक भी पहुंचा।

    यही वजह रही कि एशिया कप के फाइनल के बाद जब ट्रॉफी प्रेजेंटेशन का वक्त आया, तो टीम इंडिया ने नकवी के हाथों से ट्रॉफी स्वीकार नहीं की।

    एक घंटे से ज्यादा चला ट्रॉफी विवाद!

    फाइनल में भारत ने पाकिस्तान को हराकर खिताब अपने नाम किया।

    लेकिन इसके बाद असली विवाद मैदान पर नहीं, बल्कि ट्रॉफी प्रेजेंटेशन समारोह में दिखाई दिया।

    रिपोर्ट के मुताबिक, प्रेजेंटेशन में एक घंटे से ज्यादा की देरी हुई और इसके बाद मोहसिन नकवी ट्रॉफी लेकर मैदान से चले गए।

    यानी भारत ने खिताब तो जीत लिया, लेकिन ट्रॉफी लेने के तरीके ने एक नया सवाल खड़ा कर दिया—

    क्या क्रिकेट की ट्रॉफी से ज्यादा बड़ी हो गईं भारत की राष्ट्रीय भावनाएं?

    सैकिया बोले—टीम का प्रदर्शन ट्रॉफी से ज्यादा महत्वपूर्ण
    देवजीत सैकिया ने साफ कहा कि उनके लिए ट्रॉफी से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण भारतीय टीम का प्रदर्शन है।

    उन्होंने कहा कि टीम इंडिया ने मैदान पर शानदार खेल दिखाया और अपने विरोधियों को एकतरफा अंदाज में हराया।
    यानी BCCI का संदेश स्पष्ट है—

    ट्रॉफी हाथ में आई या नहीं, लेकिन मैदान पर भारत की जीत सबसे बड़ी है।

    अब निशाना 2028 टी20 वर्ल्ड कप!

    BCCI सचिव के मुताबिक भारतीय टीम और बोर्ड का ध्यान अब आने वाली बड़ी प्रतियोगिताओं पर है।

    खास तौर पर 2028 टी20 वर्ल्ड कप को लेकर तैयारी पर फोकस किया जा रहा है।

    सैकिया का कहना है कि टीम का लक्ष्य आने वाले बड़े टूर्नामेंट जीतना है और भारतीय खिलाड़ी उसी दिशा में मेहनत कर रहे हैं।

    महिला टीम ने भी बढ़ाया देश का गौरव

    इसी बीच भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने भी एशिया कप में शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया।

    पूरे टूर्नामेंट में भारतीय टीम का दबदबा देखने को मिला और फाइनल में श्रीलंका को हराकर टीम इंडिया चैंपियन बनी।

    इससे पहले भारत ने 2022 में भी एशिया कप जीता था, जबकि 2024 के फाइनल में श्रीलंका ने भारत को हराकर खिताब अपने नाम किया था।

    2026 में एक बार फिर भारतीय महिला टीम ने एशिया कप पर कब्जा कर लिया।

    बड़ा सवाल: ट्रॉफी या देश की भावना?

    यह पूरा विवाद सिर्फ एक ट्रॉफी लेने या न लेने का मामला नहीं रह गया है।

    एक तरफ क्रिकेट की परंपरा और खेल भावना है, तो दूसरी तरफ पहलगाम हमले के बाद भारत-पाकिस्तान रिश्तों में आई तल्खी और देश की भावनाएं।

    BCCI की सफाई के बाद बहस और तेज हो सकती है—

    क्या टीम इंडिया का ट्रॉफी स्वीकार न करना सही था?

    क्या खेल और कूटनीति को अलग रखा जाना चाहिए?

    या फिर कुछ मौकों पर राष्ट्रीय भावना ही सबसे ऊपर होती है?

    फिलहाल BCCI ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है—

    ट्रॉफी से ज्यादा जरूरी है भारतीय टीम का प्रदर्शन और देश की भावनाएं।

    निष्पक्ष सवाल यही है—मैदान पर भारत की जीत बड़ी थी या ट्रॉफी को लेकर पैदा हुआ विवाद?

  • जिला अस्पताल में एक्स-रे के नाम पर कथित वसूली? संविदा कर्मी का वीडियो वायरल

    जिला अस्पताल में एक्स-रे के नाम पर कथित वसूली? संविदा कर्मी का वीडियो वायरल

    गोरखपुर ब्यूरो निष्पक्ष टुडे :-

    जल्दी एक्स-रे और रिपोर्ट देने के नाम पर पैसे लेने का आरोप; करीब 5 मिनट के वायरल वीडियो में पर्चे के साथ रुपये लेते दिख रहा शख्स, जांच की मांग


    गोरखपुर। गोरखपुर जिला चिकित्सालय में मरीजों से कथित अवैध वसूली का मामला सामने आया है। अस्पताल की पैथोलॉजी में संविदा पर तैनात एक कर्मचारी पर एक्स-रे कराने और रिपोर्ट जल्दी देने के नाम पर पैसे लेने का आरोप लगा है। इस पूरे मामले से जुड़ा करीब 5 मिनट का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

    वीडियो में क्या दिख रहा है?

    वायरल वीडियो में एक व्यक्ति अस्पताल के कर्मचारी के पास जाता दिखाई दे रहा है। वीडियो बनाने वाले शख्स के मुताबिक, कर्मचारी का नाम गुड्डू है और उसने एक्स-रे जल्दी कराने के नाम पर रुपये लिए।

    वीडियो में कर्मचारी के हाथ में मरीज का पर्चा और रुपये दिखाई देते हैं। इसके बाद वह कथित तौर पर पैसे लेकर संबंधित व्यक्ति को एक्स-रे कराने के लिए ले जाता हुआ नजर आ रहा है।


    जल्दी एक्स-रे और रिपोर्ट देने का आरोप
    वीडियो बनाने वाला व्यक्ति यह दावा करता सुनाई दे रहा है कि संविदा कर्मी ने जल्दी एक्स-रे कराने और रिपोर्ट उपलब्ध कराने के नाम पर पैसे लिए। हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और वीडियो में दिखाई दे रहे व्यक्ति की पहचान की भी आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।

    अस्पताल प्रशासन की भूमिका पर सवाल :-

    वायरल वीडियो में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह जिला अस्पताल की व्यवस्था और मरीजों से जुड़े सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

    महत्वपूर्ण बिंदु:

    जिला चिकित्सालय में संविदा कर्मी पर कथित वसूली का आरोप।

    एक्स-रे के नाम पर रुपये लेने का दावा।

    जल्दी एक्स-रे और रिपोर्ट देने के बदले पैसे लेने का आरोप।

    करीब 5 मिनट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल।

    वीडियो में पर्चे और रुपये लेते हुए शख्स दिखाई दे रहा है।

    वीडियो बनाने वाले ने कर्मचारी का नाम गुड्डू बताया।

    आरोपों की आधिकारिक पुष्टि और अस्पताल प्रशासन का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

    निष्पक्ष टुडे का बड़ा सवाल:

    क्या सरकारी अस्पताल में भी मरीजों को जल्दी जांच और रिपोर्ट के लिए कथित तौर पर पैसे देने पड़ रहे हैं? अगर आरोप सही हैं, तो जिम्मेदार कौन है?

  • बाढ़ प्रभावित गांवों का एडीएम ने किया दौरा, खाद्य पैकेट वितरण के निर्देश

    बाढ़ प्रभावित गांवों का एडीएम ने किया दौरा, खाद्य पैकेट वितरण के निर्देश

    कोलखास समेत बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का अधिकारियों ने किया निरीक्षण, ग्रामीणों से ली जानकारी

                      ब्यूरो प्रभारी —-विनय तिवारी
    बडहलगंज/गोरखपुर(निष्पक्ष टुडे)बड़हलगंज क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बुधवार को प्रशासनिक अधिकारियों ने पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व जय प्रकाश और उपजिलाधिकारी गोला मनीष कुमार ने ग्राम पंचायत पटना के राजस्व ग्राम कोलखास समेत अन्य बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने प्रभावित परिवारों से बातचीत कर उनकी समस्याएं जानीं और मौके पर मौजूद कर्मचारियों से बाढ़ की स्थिति की जानकारी ली।
    निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने गांव में जलभराव और आवागमन की स्थिति का जायजा लिया। ग्रामीणों ने बताया कि बाढ़ का पानी बढ़ने से दैनिक जरूरतों को पूरा करने में परेशानी हो रही है। कई स्थानों पर रास्ते प्रभावित होने से लोगों को आने-जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अधिकारियों ने ग्रामीणों को प्रशासन की ओर से हरसंभव मदद उपलब्ध कराने का भरोसा दिया।
    एडीएम वित्त एवं राजस्व जय प्रकाश ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को बाढ़ प्रभावित परिवारों को खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के लिए फूड पैकेट का वितरण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। जरूरतमंद परिवारों को चिह्नित कर प्राथमिकता के आधार पर राहत उपलब्ध कराई जाए।
    एसडीएम गोला मनीष कुमार ने भी स्थानीय कर्मचारियों से प्रभावित गांवों की स्थिति की जानकारी लेते हुए राहत कार्यों की निगरानी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बाढ़ के दौरान ग्रामीणों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर रख रहा है।
    पटना ग्राम प्रधान (प्रशासक) रानी देवी, प्रधान प्रतिनिधि संजय गुप्ता ने एसडीएम को पत्र देकर घाघरा, सरयू और राप्ती नदियों में आई बाढ़ के कारण फसलों को हुए नुकसान के संबंध में फसल बीमा कम्पनी से जाच करा कर फसल की क्षतिपूर्ती दिलाने का किया अनूरोध।

  • एक पानी की पाइपलाइन टूटी और पूरा वार्ड प्यासा!

    एक पानी की पाइपलाइन टूटी और पूरा वार्ड प्यासा!

    गोरखपुर ब्यूरो निष्पक्ष टुडे :-

    धोबी गली के सामने हरहवाफाटक रोड पर सीवर लाइन की खुदाई के दौरान मुख्य पाइपलाइन क्षतिग्रस्त—दोपहर से पानी के लिए भटकते रहे लोग


    गोरखपुर। वार्ड नंबर 16 में मंगलवार को पानी की मुख्य पाइपलाइन टूटने से बड़ी आबादी को घंटों पानी की समस्या झेलनी पड़ी। जनप्रिय विहार, दिग्विजयनगर और धोबी गली समेत आसपास के इलाकों में दोपहर से पानी की सप्लाई बाधित रही।

    🔴 दोपहर से सूखे रहे नल, पानी के लिए भटकती रही जनता

    पानी बंद होने के बाद घरों में रोजमर्रा के काम प्रभावित हो गए। पीने के पानी से लेकर खाना बनाने, बर्तन धोने और अन्य जरूरी कामों के लिए लोगों को परेशानी उठानी पड़ी।

    बच्चों और बुजुर्गों वाले परिवारों की मुश्किलें और बढ़ गईं।

    🔴 20 लीटर के कैन और बाल्टियां लेकर RO सेंटर पहुंचे लोग

    पानी की किल्लत के बीच कई लोग 20 लीटर के कैन और बाल्टियां लेकर RO पानी लेने पहुंचे।

    दोपहर से शाम तक लोग इस इंतजार में रहे कि आखिर नलों में पानी कब आएगा।

    ⚠️ एक पाइपलाइन की खराबी से पूरा क्षेत्र प्रभावित क्यों?

    सबसे बड़ा सवाल पानी की इंटरकनेक्टिंग पाइपलाइन व्यवस्था को लेकर उठा।

    स्थानीय लोगों के मुताबिक, एक जगह पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने पर उसका असर बड़े इलाके की सप्लाई पर पड़ा।

    सवाल यह है कि क्या नेटवर्क में बाईपास या वैकल्पिक सप्लाई की ऐसी व्यवस्था नहीं होनी चाहिए, जिससे एक लाइन खराब होने पर सिर्फ प्रभावित क्षेत्र की सप्लाई बंद हो और बाकी इलाकों में पानी चलता रहे?

    जनता का सवाल:
    “एक पाइप टूटे तो पूरा वार्ड क्यों प्यासा हो?”

    🔴 बारिश ने बढ़ाई मरम्मत की मुश्किल

    धोबी गली के सामने हरहवाफाटक रोड पर सीवर लाइन की खुदाई के दौरान पानी की पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने की जानकारी सामने आई।

    दोपहर में हुई बारिश के कारण खुदाई वाली जगह पर पानी भर गया, जिससे मरम्मत कार्य में भी दिक्कत आई।

    काफी मशक्कत के बाद रात करीब 9:45 बजे पानी की सप्लाई बहाल की गई।

    पानी आते ही लोगों ने राहत की सांस ली।

    🟠 अगले दो दिन रात 8 बजे फिर बंद हो सकती है सप्लाई

    ठेकेदार सतीश के अनुसार, हुमायूंपुर चौराहे के आगे पाइप कनेक्शन का काम किया जाना है।

    दिन में भीड़ अधिक होने के कारण रात में काम किया जा रहा है। उनके मुताबिक अगले दो दिनों तक रात करीब 8 बजे पानी की लाइन बंद की जा सकती है।

    ऐसे में आज की परेशानी के बाद लोगों के सामने अब अगली चिंता है—

    क्या पानी बंद करने से पहले लोगों को पर्याप्त सूचना दी जाएगी?

    और सबसे अहम—

    क्या इस दौरान वैकल्पिक पानी की व्यवस्था की जाएगी?

    🟡 विकास कार्य जरूरी, लेकिन व्यवस्था भी जरूरी

    सीवर लाइन डालने का काम विकास से जुड़ा जरूरी कार्य है, लेकिन इसके साथ पेयजल पाइपलाइन की सुरक्षा और वैकल्पिक सप्लाई व्यवस्था भी अहम है।

    आज की घटना ने दिखाया कि एक पाइपलाइन में खराबी होने पर अगर बड़ा क्षेत्र प्रभावित होता है, तो लोगों की परेशानी कितनी बढ़ सकती है।

    ❓ अब सबसे बड़ा सवाल

    क्या पानी के नेटवर्क में ऐसा बाईपास सिस्टम तैयार किया जा सकता है, जिससे भविष्य में किसी एक पाइपलाइन के टूटने पर पूरा वार्ड प्रभावित न हो?

    जनता को सिर्फ पाइपलाइन की मरम्मत नहीं, बल्कि ऐसी स्थायी व्यवस्था चाहिए जिससे अगली बार एक पाइप टूटे तो पूरा इलाका पानी के लिए न तरसे।

    निष्पक्ष टुडे की ग्राउंड रिपोर्ट — सवाल व्यवस्था से, मकसद समाधान।

  • झांसी SC/ST राहत मामला: एक परिवार को ₹23.36 लाख सहायता, 10-12 और दावे; हाईकोर्ट ने जांच के निर्देश दिए

    झांसी SC/ST राहत मामला: एक परिवार को ₹23.36 लाख सहायता, 10-12 और दावे; हाईकोर्ट ने जांच के निर्देश दिए

    झांसी/प्रयागराज ब्यूरो निष्पक्ष टुडे :-

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने झांसी के मामलों की 3 महीने में जांच और पूरे उत्तर प्रदेश में राहत दावों की व्यवस्था की व्यापक समीक्षा के निर्देश दिए

    SC/ST (Prevention of Atrocities) Act के तहत मिलने वाली राहत राशि से जुड़े झांसी के एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण जांच के निर्देश दिए हैं।

     

    राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि अधिवक्ता संतोष कुमार दोहरे और उनके परिवार के सदस्यों को विभिन्न आपराधिक मामलों में कुल ₹23,36,250 की राहत और वित्तीय सहायता मिल चुकी है, जबकि करीब 10 से 12 अन्य मामले राहत के दावों के साथ लंबित हैं। इसके बाद हाईकोर्ट ने झांसी में निष्पक्ष जांच और पूरे उत्तर प्रदेश में राहत दावों व वितरण की व्यवस्था की व्यापक समीक्षा के निर्देश दिए।

    महत्वपूर्ण: अदालत ने संतोष कुमार दोहरे या उनके परिवार के किसी सदस्य को दोषी घोषित नहीं किया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि बार-बार मामले दर्ज होना या राहत का दावा करना अपने-आप कानून के दुरुपयोग का प्रमाण नहीं है।

    एक नजर में मामला :-

    ₹23,36,250 — राज्य सरकार के अनुसार विभिन्न मामलों में मिली कुल राहत/वित्तीय सहायता।

    10 से 12 मामले — जिला स्तरीय समिति के समक्ष राहत दावों के साथ लंबित बताए गए।

    3 महीने में जांच — झांसी के मामलों और राहत दावों की निष्पक्ष जांच का निर्देश।

    पूरे यूपी में समीक्षा — बार-बार किए जाने वाले राहत दावों और सार्वजनिक धन के वितरण की व्यवस्था की जांच।

    कोई दोष सिद्ध नहीं — जांच के बाद ही तथ्यों पर अंतिम निष्कर्ष निकल सकता है।

    मामला आखिर शुरू कैसे हुआ?

    मामला झांसी की SC/ST विशेष अदालत के दो आदेशों के खिलाफ दाखिल आपराधिक अपीलों से जुड़ा था।

    अपीलकर्ताओं का कहना था कि SC/ST (Prevention of Atrocities) Rules, 1995 के तहत उन्हें निर्धारित राहत की पूरी राशि नहीं मिली।

    अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, जांच अधिकारी ने संबंधित मामलों में प्रत्येक पीड़ित के लिए ₹2 लाख राहत का प्रस्ताव भेजा था। प्रस्ताव के अनुसार राहत राशि चरणों में दी जानी थी—
    राहत का प्रस्तावित ढांचा

    25% — FIR दर्ज होने पर
    50% — चार्जशीट दाखिल होने के बाद
    25% — दोषसिद्धि के बाद

    इस हिसाब से चार्जशीट के चरण तक प्रत्येक पात्र पीड़ित के लिए ₹1.50 लाख देय होने का तर्क रखा गया। राहत की शेष राशि को लेकर विवाद विशेष अदालत से होते हुए हाईकोर्ट पहुंचा।

    ₹23.36 लाख और 10-12 लंबित मामलों का मुद्दा क्यों उठा?

    सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत के सामने बताया कि संतोष कुमार दोहरे और उनके परिवार के सदस्यों को अलग-अलग आपराधिक मामलों के संबंध में कुल ₹23,36,250 की राहत और वित्तीय सहायता मिली है।

    राज्य की ओर से यह भी बताया गया कि करीब 10 से 12 अन्य मामले जिला स्तरीय समिति के समक्ष लंबित हैं।

    हाईकोर्ट ने कहा कि राहत के दावों के इस पैटर्न की स्वतंत्र जांच जरूरी है। उद्देश्य यह पता लगाना है कि संबंधित मामलों में राहत और अन्य लाभ नियमों के अनुसार दिए या मांगे गए या नहीं।

    हाईकोर्ट ने झांसी में क्या जांच करने को कहा?
    हाईकोर्ट ने झांसी के जिलाधिकारी को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के साथ समन्वय कर जांच कराने का निर्देश दिया है।

    जांच में मुख्य रूप से देखा जाएगा—

    1. आपराधिक मामलों की पृष्ठभूमि
    संबंधित मामले किन परिस्थितियों में दर्ज हुए?

    2. राहत का पूरा रिकॉर्ड
    किन मामलों में कितनी राशि दी गई और किस आधार पर दी गई?

    3. लंबित दावे
    10 से 12 लंबित मामलों में राहत के दावों की स्थिति और आधार क्या है?

    4. सत्यापन प्रक्रिया
    सार्वजनिक धन जारी करने से पहले आवश्यक जांच और सत्यापन किया गया या नहीं?

    5. संभावित दुरुपयोग
    क्या SC/ST Act और उसके तहत बने नियमों की कल्याणकारी व्यवस्था का कहीं अनुचित उपयोग हुआ?

    हाईकोर्ट ने इस जांच को तीन महीने के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया है। 

    पूरे उत्तर प्रदेश के लिए भी बड़ा सवाल
    हाईकोर्ट ने मामले को केवल झांसी तक सीमित नहीं रखा।

    राज्य सरकार को पूरे उत्तर प्रदेश में यह देखने के निर्देश दिए गए हैं कि SC/ST Act, 1995 के नियमों और संबंधित सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाले लाभ—

    :-किस तरह मांगे जा रहे हैं,
    :-किस तरह उनकी जांच हो रही है,
    और किस प्रक्रिया से सार्वजनिक धन जारी किया जा रहा है।

    विशेष रूप से ऐसे मामलों पर प्रभावी निगरानी की जरूरत बताई गई है, जहां एक ही व्यक्ति या उसके परिवार के सदस्य बार-बार अलग-अलग मामलों में राहत का दावा कर रहे हों।

    यह इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण कानूनी पहलू है।

    हाईकोर्ट ने साफ किया है कि बार-बार मामले दर्ज होना या राहत का दावा करना अपने-आप कानून के दुरुपयोग का प्रमाण नहीं है।

    इसी तरह किसी आरोपी का बरी हो जाना या आरोप साबित न होना भी अपने-आप शिकायत को “फर्जी” साबित नहीं करता।

    किसी शिकायत के जानबूझकर झूठे होने का निष्कर्ष तथ्यों, साक्ष्यों और सक्षम कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

    जागरूकता का बड़ा संदेश: सच्चे पीड़ित को डरने की जरूरत नहीं –

    SC/ST अत्याचार निवारण कानून का उद्देश्य जाति और जनजाति के आधार पर होने वाले अत्याचारों के वास्तविक पीड़ितों को सुरक्षा और न्याय देना है।

    इसलिए यदि कोई व्यक्ति वास्तव में जातिगत अत्याचार, हिंसा या अपमान का शिकार हुआ है, तो उसे कानून का सहारा लेने से नहीं डरना चाहिए।

    -सच्ची शिकायत के लिए—
    -घटना की सही जानकारी दें।
    -उपलब्ध साक्ष्य सुरक्षित रखें।
    -जांच में सहयोग करें।

    -तथ्यों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने से बचें।
    -कानून की ताकत सच्चाई और सबूत से बढ़ती है।
    -जानबूझकर झूठी शिकायत करने पर क्या हो सकता है?
    -किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से जानबूझकर गलत जानकारी देना या झूठा आरोप लगाना गंभीर कानूनी विषय हो सकता है।

    यदि सक्षम जांच या न्यायिक प्रक्रिया में यह साबित हो जाता है कि किसी व्यक्ति ने जानबूझकर झूठी सूचना या गलत आरोप लगाकर किसी को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की, तो परिस्थितियों और लागू कानून के अनुसार उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

    लेकिन यहां भी एक सिद्धांत महत्वपूर्ण है—

    सिर्फ केस साबित न होने से शिकायत को फर्जी नहीं कहा जा सकता। जानबूझकर झूठे आरोप का निष्कर्ष अलग जांच और साक्ष्यों के आधार पर तय होता है।

    असली चुनौती: कानून की सुरक्षा भी, व्यवस्था की निगरानी भी

    इस पूरे मामले से व्यवस्था के सामने दो जिम्मेदारियां साफ दिखाई देती हैं।
    वास्तविक पीड़ित को समय पर न्याय और राहत मिले
    कोई वास्तविक पीड़ित केवल प्रशासनिक देरी या प्रक्रियात्मक जटिलताओं के कारण अपनी वैधानिक सहायता से वंचित न रहे।

    सार्वजनिक धन का उचित उपयोग सुनिश्चित हो
    हर राहत दावे का आवश्यक सत्यापन हो और यदि किसी स्तर पर जानबूझकर गलत जानकारी, दुरुपयोग या प्रशासनिक लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय की जाए।

    हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि जांच में यदि कानून या राहत व्यवस्था के दुरुपयोग की बात सामने आती है, तो जिम्मेदार व्यक्तियों—जिसमें दावों को संसाधित या मंजूर करने वाले अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं—के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

    निष्पक्ष टुडे के सवाल –

    झांसी का मामला किसी व्यक्ति को जांच से पहले दोषी घोषित करने की कहानी नहीं है।
    यह सवाल पूरी व्यवस्था की पारदर्शिता का है।
    क्या वास्तविक पीड़ितों को उनकी राहत समय पर मिल रही है?
    क्या राहत के हर दावे का पर्याप्त सत्यापन हो रहा है?
    क्या बार-बार किए जाने वाले दावों के लिए प्रभावी निगरानी तंत्र मौजूद है?
    और यदि जांच में दुरुपयोग या लापरवाही मिलती है, तो क्या जिम्मेदारी तय होगी?

    झांसी के इस मामले में अभी जांच होनी है और किसी व्यक्ति के खिलाफ अंतिम दोष सिद्ध नहीं हुआ है।

    हालांकि, राज्य सरकार द्वारा अदालत को ₹23.36 लाख की राहत/वित्तीय सहायता और 10 से 12 लंबित राहत दावों की जानकारी दिए जाने के बाद हाईकोर्ट ने झांसी में निष्पक्ष जांच तथा पूरे उत्तर प्रदेश में राहत वितरण व्यवस्था की व्यापक समीक्षा के निर्देश दिए हैं।

    इस मामले की सबसे बड़ी सीख यही है—

    सच्चे पीड़ित को पूरा संरक्षण मिले, हर दावे की निष्पक्ष जांच हो और किसी को भी कानून या सार्वजनिक धन के दुरुपयोग की अनुमति न मिले।

    “निष्पक्ष टुडे — तथ्यों के साथ सवाल, निष्कर्ष से पहले फैसला नहीं।”

  • आरजी अस्पताल में डॉ. संदीप पुरी ने संभाला चिकित्सा निदेशक का पद

    आरजी अस्पताल में डॉ. संदीप पुरी ने संभाला चिकित्सा निदेशक का पद

    स्टेट ब्यूरो पंजाब निष्पक्ष टुडे :-

    तीन दशक से अधिक के चिकित्सकीय, शैक्षणिक और प्रशासनिक अनुभव से अस्पताल को मिलेगी नई दिशा

    लुधियाना, 6 सितंबर।
    आरजी अस्पताल, लुधियाना में प्रसिद्ध चिकित्सक, चिकित्सा शिक्षाविद् और प्रशासक डॉ. संदीप पुरी ने चिकित्सा निदेशक के रूप में पदभार संभाल लिया है। चिकित्सा, चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और अस्पताल प्रशासन में तीन दशक से अधिक का उनका अनुभव अब अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती देने में उपयोगी होगा।

    डीएमसीएच के पूर्व प्राचार्य रह चुके हैं डॉ. पुरी

    डॉ. संदीप पुरी दयानंद चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल, लुधियाना के पूर्व प्राचार्य रह चुके हैं। उन्होंने इसी संस्थान से एमडी की उपाधि प्राप्त की और वर्ष 1992 में शिक्षक के रूप में अपने करियर की शुरुआत की।

    उन्होंने वर्ष 2001 से 2014 तक चिकित्सा अधीक्षक, वर्ष 2005 से 2014 तक चिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्ष और दिसंबर 2014 से फरवरी 2024 तक प्राचार्य के रूप में सेवाएं दीं।

    चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान में भी योगदान

    डॉ. पुरी के नाम 64 शोध-पत्र एवं शोध प्रकाशन हैं। इसके अलावा उन्होंने सात बहुराष्ट्रीय चिकित्सकीय परीक्षणों का नेतृत्व किया है। वे एपीआई चिकित्सा अद्यतन 2014 के संपादक रहे हैं और एपीआईकॉन 2014 तथा आईएसीएमसीॉन 2015 के आयोजन अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।

    वर्ष 2002 में उन्होंने एम्स, नई दिल्ली से वातरोग विज्ञान में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया।

    कई प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित

    चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और चिकित्सकीय सेवाओं में योगदान के लिए डॉ. पुरी को कई सम्मान मिल चुके हैं। इनमें विभिन्न चिकित्सा संस्थाओं की फेलोशिप, राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान अकादमी की सदस्यता, एपीआईकॉन 2017 में रवींद्रनाथ टैगोर व्याख्यान और दयानंद चिकित्सा महाविद्यालय का सर्वश्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार शामिल हैं।

    90 से अधिक बार कर चुके हैं रक्तदान

    डॉ. पुरी चिकित्सा सेवा के साथ सामाजिक सरोकारों से भी जुड़े रहे हैं। वे लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए जागरूक करते रहे हैं और अब तक 90 से अधिक बार रक्तदान कर चुके हैं।

    मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने पर जोर

    आरजी अस्पताल प्रबंधन ने डॉ. संदीप पुरी का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि उनके व्यापक अनुभव और नेतृत्व से अस्पताल में मरीजों की देखभाल की गुणवत्ता, चिकित्सा सेवाओं की उत्कृष्टता और नैतिक चिकित्सा पद्धतियों को और मजबूती मिलेगी।

    प्रबंधन का कहना है कि डॉ. पुरी के अनुभव से अस्पताल की चिकित्सा सेवाओं को नई दिशा मिलेगी और मरीजों को बेहतर, गुणवत्तापूर्ण एवं मानवीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के प्रयासों को गति मिलेगी।

  • राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा बदलाव, पहली बार पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति

    राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा बदलाव, पहली बार पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति

    अयोध्या ब्यूरो निष्पक्ष टुडे :-

    पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को मिली जिम्मेदारी, तीन नए न्यासी भी बनाए गए


    अयोध्या, 2 सितंबर 2026।श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बुधवार को महत्वपूर्ण बदलाव किए गए।

    अयोध्या में हुई ट्रस्ट की बैठक में पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO नियुक्त किया गया। इसके साथ ही तीन नए न्यासियों की नियुक्ति भी की गई।

    1. कौन हैं जितेंद्र मिश्रा

    ट्रस्ट के प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, जितेंद्र मिश्रा ने भारतीय वायुसेना में करीब 39 वर्ष सेवा की है। उन्हें नेतृत्व और प्रशासन का लंबा अनुभव रहा है तथा उन्हें परम विशिष्ट सेवा मेडल से भी सम्मानित किया गया है।

    मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, वह पश्चिमी वायु कमान में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल चुके हैं और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी वायु कमान के नेतृत्व से भी उनका नाम जोड़ा गया है।

    अब CEO के रूप में उनकी जिम्मेदारी राम मंदिर ट्रस्ट के प्रशासनिक, वित्तीय और संचालन संबंधी कामकाज को व्यवस्थित करने की होगी।

    2. ट्रस्ट में तीन नए न्यासी

    बैठक में तीन रिक्त पदों पर भी नियुक्तियां की गईं। नए न्यासी हैं—

    • महेश भागचंदका — दिल्ली
    • मदन मोहन पांडेय — अयोध्या
    • निर्मला यादव — शिकोहाबाद

    इन तीनों नामों की पुष्टि बैठक के बाद सामने आई कई मीडिया रिपोर्टों में भी हुई है।

    मदन मोहन पांडेय

    मदन मोहन पांडेय वरिष्ठ अधिवक्ता हैं और राम जन्मभूमि मामले में रामलला की ओर से कानूनी पैरवी करने वाली टीम से जुड़े रहे हैं।

    महेश भागचंदका

    महेश भागचंदका दिल्ली के कारोबारी और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े व्यक्ति हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उनका राम मंदिर आंदोलन से पुराना जुड़ाव रहा है और 2020 के भूमि पूजन कार्यक्रम में भी वे यजमानों में शामिल थे।

    निर्मला यादव

    निर्मला यादव शिकोहाबाद से हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उन्हें ट्रस्ट में शामिल किया गया है और वे ट्रस्ट की पहली महिला सदस्य हैं। हालांकि उनके विस्तृत परिचय की आधिकारिक जानकारी अभी सीमित है।

    3. तीन पद क्यों हुए खाली?

    मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ट्रस्ट में तीन पद खाली हुए थे। इनमें एक पद ट्रस्ट सदस्य विमलेन्द्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन के बाद खाली हुआ था।

    इसके अलावा 2026 में चढ़ावे से जुड़े विवाद के बीच चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद दो और पद रिक्त हुए। इन्हीं रिक्तियों को अब नई नियुक्तियों से भरा गया है।

    4. चढ़ावे की सुरक्षा और पारदर्शिता पर भी चर्चा

    बैठक में ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। प्रेस विज्ञप्ति में न्यायालय में विचाराधीन वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित मामले और विशेष जांच दल की जांच का उल्लेख किया गया है।

    ट्रस्ट के अनुसार, जांच से तथ्यों के सामने आने और जनमानस में किसी भी भ्रम को दूर करने में मदद मिल सकती है।

    5. नकदी गिनने की प्रक्रिया में तकनीक पर जोर

    प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, चढ़ावे की नकद राशि की गणना की प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप कम करने और तकनीक के इस्तेमाल पर भी विचार किया गया है।

    बैंकों और आईटी क्षेत्र से मिले प्रस्तावों का मूल्यांकन करने की बात कही गई है, ताकि इस प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सके।

    6. ट्रस्ट की वित्तीय स्थिति कितनी है?

    आपके उपलब्ध प्रेस विज्ञप्ति में वित्त वर्ष 2025-26 के वार्षिक लेखों का भी उल्लेख है।

    इसके अनुसार—-

    कुल आय — करीब 237 करोड़ रुपये
    कुल व्यय — करीब 91 करोड़ रुपये
    निर्माण आदि पर पूंजीगत व्यय — करीब 425 करोड़ रुपये
    31 मार्च 2026 को उपलब्ध कुल राशि — करीब 1,882 करोड़ रुपये

    इन आंकड़ों को ट्रस्ट की प्रेस विज्ञप्ति में प्रस्तुत वार्षिक लेखों के आधार पर ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

    7. पदाधिकारियों में भी बदलाव

    बैठक में पदाधिकारियों की जिम्मेदारियों पर भी चर्चा हुई।
    प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार स्वामी गोविंददेव गिरि महामंत्री के पद पर बने रहेंगे, जबकि महेश भागचंदका को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है।

    निष्पक्ष टुडे का निष्कर्ष 


    राम मंदिर ट्रस्ट में यह बदलाव केवल नए चेहरों की नियुक्ति तक सीमित नहीं है। पहली बार पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति, तीन नए न्यासियों का शामिल होना, वित्तीय प्रक्रियाओं में तकनीक के इस्तेमाल पर विचार और चढ़ावे से जुड़े मामलों में जांच—ये सभी फैसले ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे को अधिक व्यवस्थित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

    हालांकि, वित्तीय अनियमितताओं या चढ़ावे से जुड़े किसी भी आरोप को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि संबंधित जांच/कानूनी प्रक्रिया का परिणाम अलग विषय है।