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    हजारों करोड़ का बजट, फिर भी आपदाओं के आगे बेबस सुरक्षा

    आपदा से पहले तैयारी या तबाही के बाद भरपाई? हजारों करोड़ के बजट के बावजूद सुरक्षा की चुनौती!
    भारत में आपदा प्रबंधन पर बढ़ता निवेश, जान-माल की क्षति, संसाधनों के उपयोग और जमीनी तैयारियों के बीच अंतर—अब योजनाओं से आगे बढ़कर परिणाम देने का समय।

    भारत आज एक ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहाँ प्राकृतिक और मानवजनित आपदाएँ केवल मौसमी घटनाएँ नहीं रह गई हैं, बल्कि आर्थिक विकास, सामाजिक सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और राष्ट्रीय अवसंरचना के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी हैं। बाढ़, भूकंप, भूस्खलन, चक्रवात, बादल फटना, बिजली गिरना, लू, शहरी जलभराव और औद्योगिक दुर्घटनाएँ हर वर्ष हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित करती हैं। ऐसे में एक महत्वपूर्ण प्रश्न सामने आता है—जब देश में आपदा प्रबंधन के लिए हजारों करोड़ रुपये का प्रावधान है, तो क्या हमारी तैयारियाँ, मॉक ड्रिल और आपदा प्रबंधन योजनाएँ वास्तविक जोखिमों के अनुरूप पर्याप्त प्रभावी हैं?

    भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की वर्ष 2025 की रिपोर्ट इस चुनौती की गंभीरता उजागर करती है। देश में विभिन्न चरम मौसमी घटनाओं से लगभग 2,760 लोगों की मृत्यु दर्ज की गई। इनमें भारी वर्षा, बाढ़, बादल फटने और भूस्खलन से 1,370 से अधिक तथा आंधी-तूफान और बिजली गिरने से 1,310 से अधिक लोगों की जान गई। उत्तर प्रदेश में 410 से अधिक, मध्य प्रदेश में 350 से अधिक, महाराष्ट्र में 270 से अधिक और बिहार में 174 मौतें दर्ज हुईं। ये केवल आँकड़े नहीं, बल्कि आपदा जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व चेतावनी और स्थानीय तैयारियों को मजबूत बनाने की आवश्यकता के गंभीर संकेत हैं।

     

    सरकारी स्तर पर वित्तीय प्रतिबद्धता भी उल्लेखनीय है। पंद्रहवें वित्त आयोग ने वर्ष 2021–26 के लिए राज्य आपदा जोखिम प्रबंधन कोष के अंतर्गत ₹1,60,153 करोड़ तथा राष्ट्रीय आपदा जोखिम प्रबंधन कोष के लिए ₹68,463 करोड़ का प्रावधान अनुशंसित किया था। राज्य स्तरीय राशि का 80 प्रतिशत आपदा प्रतिक्रिया और 20 प्रतिशत जोखिम न्यूनीकरण के लिए निर्धारित किया गया। यह व्यवस्था महत्वपूर्ण है, क्योंकि आपदा के बाद राहत पहुँचाने के साथ-साथ आपदा से पहले जोखिम कम करने में निवेश करना भी आवश्यक है।

     

    आपदा प्रबंधन के प्रमुख वित्तीय प्रावधान | 2021–26
    राज्य जोखिम प्रबंधन कोष
    ₹1.60 लाख करोड़
    वित्त आयोग की अनुशंसा

    राष्ट्रीय जोखिम प्रबंधन कोष
    ₹68,463 करोड़
    वित्त आयोग की अनुशंसा

    ये बहुवर्षीय वित्तीय प्रावधान हैं, वास्तविक व्यय या उपयोगिता के आँकड़े नहीं। स्रोत: गृह मंत्रालय एवं 15वाँ वित्त आयोग।
    वित्तीय सहायता के वास्तविक प्रवाह पर भी ध्यान देना आवश्यक है। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 13 मार्च 2026 को जारी जानकारी के अनुसार, वित्त वर्ष 2025–26 में उस तिथि तक राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष के अंतर्गत 28 राज्यों को ₹20,735.20 करोड़ और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष से 21 राज्यों को ₹3,628.18 करोड़ जारी किए गए। इसके अतिरिक्त राज्य आपदा न्यूनीकरण कोष से ₹5,373.20 करोड़ और राष्ट्रीय आपदा न्यूनीकरण कोष से ₹1,189.56 करोड़ जारी किए गए। स्पष्ट है कि सरकार राहत के साथ जोखिम न्यूनीकरण के लिए भी वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रही है।

     

     

    लेकिन धनराशि का आवंटन, राज्यों को उसका जारी होना और धरातल पर उसका प्रभावी उपयोग—तीन अलग-अलग अवस्थाएँ हैं। जारी धनराशि को वास्तविक व्यय या सफल परिणाम मान लेना उचित नहीं होगा। इसके लिए परियोजनावार उपयोगिता प्रमाणपत्र, भौतिक प्रगति, स्वतंत्र मूल्यांकन और जोखिम में वास्तविक कमी के प्रमाण आवश्यक हैं।

    इस व्यवस्था में उपयोग और क्षमता निर्माण के बीच अंतर भी दिखाई देता है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, अप्रैल से दिसंबर 2025 के दौरान राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष की तैयारी एवं क्षमता निर्माण संबंधी वित्तीय व्यवस्था से ₹1,579.12 करोड़ जारी किए गए, जिनमें ₹994.05 करोड़ अग्निशमन सेवाओं के विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए थे। इसी अवधि में शहरी बाढ़ प्रबंधन के लिए तमिलनाडु और असम को ₹270.75 करोड़ तथा आर्द्रभूमि पुनर्जीवन के लिए असम को ₹155.71 करोड़ की सहायता जारी की गई। ये पहल दर्शाती हैं कि जोखिम न्यूनीकरण में निवेश का दायरा बढ़ रहा हैl
    फिर भी जमीनी स्तर पर कई महत्वपूर्ण कमियाँ मौजूद हैं। संसद की गृह संबंधी स्थायी समिति ने अपनी 261वीं रिपोर्ट में राज्यों और जिलों की आपदा प्रबंधन योजनाओं की गुणवत्ता में असमानता, वित्तीय संसाधनों के उपयोग में देरी, संस्थागत क्षमता की कमी तथा विभागीय समन्वय की चुनौतियों को रेखांकित किया है। समिति ने आपदा प्रबंधन योजनाओं की कम-से-कम प्रत्येक दो वर्ष में समीक्षा तथा राज्य और जिला स्तर पर प्रतिवर्ष कम-से-कम दो बहु-एजेंसी मॉक ड्रिल आयोजित करने की सिफारिश की है। ये सिफारिशें हैं, सभी संस्थानों पर लागू एकसमान वैधानिक अनिवार्यता नहीं।

    यहाँ एक और गंभीर प्रश्न उठता है—क्या मॉक ड्रिल वास्तव में हमारी तैयारियों की परीक्षा ले रही हैं या केवल औपचारिक आयोजन बनकर रह गई हैं? किसी अस्पताल में अग्निकांड, विद्यालय में भूकंप, औद्योगिक क्षेत्र में रासायनिक रिसाव या शहर में अचानक आई बाढ़ की स्थिति में सबसे पहले कौन प्रतिक्रिया देगा, कितने समय में बचाव दल पहुँचेगा और संवेदनशील नागरिकों को कैसे सुरक्षित निकाला जाएगा—इन प्रश्नों का उत्तर वास्तविक अभ्यास से ही मिल सकता है।

    प्रत्येक मॉक ड्रिल में पुलिस, अग्निशमन सेवाओं, स्वास्थ्य विभाग, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, स्थानीय निकायों और सामुदायिक स्वयंसेवकों की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए। अभ्यास के बाद प्रतिक्रिया समय, संचार व्यवस्था, उपकरणों की कार्यशीलता, सुरक्षित निकासी और प्राथमिक उपचार की क्षमता का स्वतंत्र मूल्यांकन किया जाना चाहिए। कमियों को दूर करने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना और जवाबदेही निर्धारित करना भी उतना ही आवश्यक है।

    ग्रामीण भारत में ग्राम पंचायतों की भूमिका विशेष महत्व रखती है। दिसंबर 2025 में केंद्र सरकार ने 20 राज्यों के 81 आपदा-संवेदनशील जिलों में पंचायती राज संस्थाओं के माध्यम से सामुदायिक आपदा जोखिम न्यूनीकरण को मजबूत करने के लिए ₹507.37 करोड़ की परियोजना स्वीकृत की। यह पहल स्थानीय संस्थाओं को केवल राहत वितरण तक सीमित रखने के बजाय जोखिम पहचान, जनजागरूकता, प्रशिक्षण और पूर्व तैयारी में सक्रिय भागीदार बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है।

     

    आने वाले वर्षों में वित्तीय प्रावधान और बढ़ने की संभावना है। सोलहवें वित्त आयोग ने वर्ष 2026–31 के लिए राज्य आपदा जोखिम प्रबंधन कोष हेतु ₹2,04,401 करोड़ और राष्ट्रीय स्तर के कोष के लिए ₹79,406 करोड़ की अनुशंसा की है। लेकिन बढ़ता बजट तभी सार्थक होगा, जब उसका उपयोग वैज्ञानिक जोखिम आकलन, प्रारंभिक चेतावनी, सुरक्षित अवसंरचना, स्थानीय प्रशिक्षण और नियमित मॉक ड्रिल जैसे परिणामोन्मुख कार्यों में दिखाई दे।

     

    भारत को अब ‘आवंटन से परिणाम’ और ‘राहत से जोखिम न्यूनीकरण’ की दिशा में निर्णायक परिवर्तन करना होगा। प्रत्येक जिले में अद्यतन बहु-आपदा प्रबंधन योजना, स्थानीय जोखिम मानचित्र, आपातकालीन संसाधनों की डिजिटल सूची, प्रशिक्षित सामुदायिक स्वयंसेवक और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तैयारी संकेतक विकसित किए जाने चाहिए। विद्यालयों, अस्पतालों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों और शहरी निकायों की तैयारियों का नियमित परीक्षण भी आवश्यक है।

    आपदा प्रबंधन पर होने वाले खर्च की सफलता केवल उपयोगिता प्रमाणपत्रों से नहीं, बल्कि बचाई गई जिंदगियों, कम हुई आर्थिक क्षति, घटे प्रतिक्रिया समय और मजबूत हुई सामुदायिक क्षमता से मापी जानी चाहिए।

    भारत को अब यह तय करना होगा कि आपदा प्रबंधन की सफलता का पैमाना तबाही के बाद बाँटी गई राहत राशि होगी या आपदा आने से पहले बचाई गई जिंदगियाँ। क्योंकि सच्चा आपदा प्रबंधन वही है, जिसमें राहत की आवश्यकता कम पड़े और नागरिकों की सुरक्षा अधिक सुनिश्चित हो।

    — डॉ. राकेश कुमार भट्ट
    आपदा जोखिम प्रबंधन, पर्यावरण एवं सामाजिक विकास विशेषज्ञ

  • चौधरी ऋषिपाल सिंह, मुकेश कुमार सिंह, तेज प्रताप सिंह, दिनेश चौधरी, विष्णु गुप्ता के हाथों फीता काटकर ब्रज भाषा की फीचर फ़िल्म देहाती बीबी की शूटिंग शुरू

    चौधरी ऋषिपाल सिंह, मुकेश कुमार सिंह, तेज प्रताप सिंह, दिनेश चौधरी, विष्णु गुप्ता के हाथों फीता काटकर ब्रज भाषा की फीचर फ़िल्म देहाती बीबी की शूटिंग शुरू

    जीत प्रताप सिंह, सीमा सिंह की अखिलेश पाण्डेय के निर्देशन में ब्रज भाषा की फ़िल्म ‘देहाती बीबी’ की शूटिंग ग्रैंड मुहूर्त करके शुरू अलीगढ़ में

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  • बड़हलगंज का पटना चौराहा अब राम-परशुराम चौराहा, मूर्तियां स्थापित

    बड़हलगंज का पटना चौराहा अब राम-परशुराम चौराहा, मूर्तियां स्थापित

                  ब्यूरो प्रभारी —-विनय तिवारी

     बड़हलगंज /गोरखपुर(निष्पक्ष टुडे) बड़हलगंज क्षेत्र के ऐतिहासिक पटना चौराहे को अब नई पहचान मिल गई है। इस चौराहे का नाम बदलकर अब आधिकारिक रूप से ‘राम-परशुराम चौराहा’ कर दिया गया है। शनिवार को यहाँ एक भव्य समारोह के दौरान चिल्लूपार विधायक राजेश त्रिपाठी और नगर पंचायत अध्यक्ष डॉ. प्रीति महेश उमर ने संयुक्त रूप से भगवान श्री राम और महर्षि परशुराम की मूर्तियों की स्थापना कर उनका अनावरण किया।

      मूर्तियों के अनावरण के बाद पूरा चौराहा वैदिक मंत्रोच्चार और “जय श्रीराम” के जयकारों से गूँज उठा। इस दौरान विधायक राजेश त्रिपाठी ने कहा कि रामजानकी मार्ग पर स्थित यह वही पावन और ऐतिहासिक चौराहा है, जहाँ पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान राम और महर्षि परशुराम का मिलन तथा संवाद हुआ था। इस पौराणिक महत्त्व को सहेजने और आने वाली पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने के लिए इस चौराहे पर इन मूर्तियों के स्थापना की लंबे समय से मांग की जा रही थी, जिसे अब धरातल पर उतार दिया गया है।

      चेयरमैन डॉ प्रीति महेश उमर ने कहा कि यह चौराहा अब केवल आवागमन का मार्ग नहीं रहेगा, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक आस्था का एक प्रमुख केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि यह स्थल हमारी सनातन संस्कृति के गौरवशाली इतिहास को दर्शाता है और यहाँ इन मूर्तियों की स्थापना से बड़हलगंज क्षेत्र का मान और बढ़ गया है। इस दौरान आचार्य वेदप्रकाश त्रिपाठी, व्यापार मंडल अध्यक्ष श्रीकांत सोनी, राजीव पांडेय, सभासद दीपक शर्मा, राकेश राय, लक्ष्मण शाहनी, सूरज सोनकर, अमूल्य चतुर्वेदी, रमेश शाही, आलोक तिवारी, आनन्द तिवारी,राजकुमार निगम, आचार्य मुन्ना निगम, सुरेश उमर, कृष्णा गुप्ता सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहें।

  • सत्य, ज्ञान और ब्रह्म स्वरुप ‘देवरहा बाबा’ पर बनेगी फ़िल्म

    “बड़े पर्दे पर दिखेगी ‘योगीराज देवरहा बाबा’ की अलौकिक गाथा, बायोपिक फिल्म बनाने की भव्य घोषणा”

    भारत के महान संतों में शिरोमणि और अद्भुत सिद्धियों के स्वामी योगीराज ‘देवरहा बाबा’ के अलौकिक जीवन पर जल्द ही एक भव्य बायोपिक फिल्म बनने जा रही है। सदियों तक अपनी आध्यात्मिक चेतना और निष्काम भक्ति से करोड़ों श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन करने वाले महासंत ‘देवरहा बाबा’ की जीवन यात्रा को अब बड़े पर्दे पर जीवंत किया जाएगा।

    उल्लेखनीय है कि योगिराज ‘देवरहा बाबा’ का प्रभाव केवल आम जनमानस तक ही सीमित नहीं था। प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी और मदन मोहन मालवीय जैसी महान राजनीतिक और सामाजिक हस्तियां उनका आशीर्वाद लेने उनके आश्रम पहुंचती थीं।विदित हो कि देवरहा बाबा का जीवन रहस्यों और असीम कृपा से भरा रहा है। गंगा और सरयू नदी के तट पर लकड़ी के ऊंचे मचान पर रहकर साधना करने वाले बाबा अपने मस्तक-स्पर्श और चरणों के आशीर्वाद से श्रद्धालुओं के सभी दुख-दर्द दूर कर देते थे। वे कभी अन्न ग्रहण नहीं करते थे और वर्षों तक केवल नदी का जल पीकर साधना में लीन रहे। फिल्म में उनकी अद्भुत जल-सिद्धियों, वन्य जीवों पर उनके प्रेम और बिना किसी आधुनिक संचार साधन के देश-दुनिया की खबर रखने की अलौकिक क्षमता को प्रमुखता से दर्शाया जाएगा।

    फिल्म निर्मात्री ने बताया कि ‘योगीराज ‘देवरहा बाबा’ के अलौकिक जीवन पर बनने जा रही यह सिनेमा इतिहास में आध्यात्मिक क्षेत्र पर बनने वाली अब तक की सबसे बड़ी और शोध-आधारित फ़िल्म होगी।’ उन्होंने आगे कहा कि ‘योगीराज देवरहा बाबा की जीवनी, आध्यात्मिक यात्रा, मचान से आशीर्वाद, अद्भुत दीर्घायु और राजनीतिक दिग्गजों से जुड़ाव आदि वर्णन सिल्वर स्क्रीन पर दिखाया जाएगा। उक्त फ़िल्म की शूटिंग उत्तर प्रदेश की पावन स्थली वृंदावन, देवरिया, प्रयागराज और वाराणसी के घाट पर की जाएगी।’

    फिल्म के निर्देशक ने बताया कि ‘देवरहा बाबा किसी एक युग या कालखंड के संत नहीं थे। उन्होंने कई पीढ़ियों को सत्य और भक्ति का मार्ग दिखाया। हमारी कोशिश उनके आध्यात्मिक दर्शन और जन-कल्याणकारी जीवन को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।’ उन्होंने आगे बताया कि ‘इस फिल्म का गीत-संगीत को अध्यात्म से परिपूर्ण मधुर एवं कर्णप्रिय बनाया जा रहा है, ताकि दर्शकों को सिनेमाघर में ही शांति और भक्ति का अनुभव हो सके। फिल्म के कलाकारों और आधिकारिक शीर्षक की घोषणा जल्द ही एक भव्य कार्यक्रम में की जाएगी।’

  • पितृ तृप्ति व रुद्र महायज्ञ की निकली भव्य शोभायात्रा

    पितृ तृप्ति व रुद्र महायज्ञ की निकली भव्य शोभायात्रा

    शोभा यात्रा में सैकड़ों संत, महंत के साथ हजारों लोग हुए शामिल

                   ब्यूरो प्रभारी —-विनय तिवारी

    बडहलगंज/गोरखपुर(निष्पक्ष टुडे) बड़हलगंज: पवित्र सरयू तट पर स्थित मुक्ति पथ पर आयोजित सप्त दिवसीय पितृ तृप्ति रुद्र महायज्ञ की भव्य कलश यात्रा रविवार को धुरियापार स्थित ऐतिहासिक बाबा धवलेश्वरनाथ शिव मंदिर से निकाली गई। शोभा यात्रा में सैकड़ों संत, महंत के साथ हजारों लोग शामिल हुए।देवी-देवताओं की आकर्षक झांकियों ने मन मोह लिया। ____शोभा यात्रा सैकड़ों वाहनों व संत-धर्माचार्य के साथ निकली तो सनातन प्रेमियों द्वारा उसका उरुवा, गोला, मदरिया और झुमिला आदि स्थानों पर जोरदार स्वागत किया गया। इसके बाद शोभा यात्रा बड़हलगंज के रामलीला रंगमंच पहुंची जहां लक्ष्मी-नारायण मंदिर घाट से सरयू के पवित्र जल से भरे कलश लेकर चेयरमैन प्रीति उमर के नेतृत्व में हजारों महिलाएं शामिल हुईं। इसके बाद कलश यात्रा मुक्ति पथ स्थित यज्ञ मंडप पहुंची,जहां प्रधान यज्ञाचार्य ब्रह्मानंद दूबे के नेतृत्व में विद्वान आचार्यों ने वैदिक विधि-विधान से मंडप कलश का मण्डप प्रवेश कराया।

          यज्ञ के आयोजक विधायक राजेश त्रिपाठी व संयोजक महेश उमर ने बताया कि यज्ञ प्रतिदिन सुबह आठ बजे से शाम चार बजे तक चलेगा। दोपहर 12 से दो बजे तक सरयू महोत्सव के कार्यक्रम होंगे। शाम चार से सात बजे तक आचार्य पुंडरीक गोस्वामी श्रीमद्भागवत कथा सुनाएंगे। इसके बाद संत-महंत और धर्माचार्यों के प्रवचन होंगे। विधायक राजेश त्रिपाठी व महेश उमर ने नगर सहित पूरे चिल्लूपार क्षेत्र के लोगों से यज्ञ में शामिल होने की अपील की।

  • नवरात्रि पर पार्श्वगायिका प्रियंका सिंह की सुरीली आवाज में देवीगीत ‘माई के मंद मंद मुस्कनिया’ वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड्स ने किया रिलीज

    नवरात्रि पर पार्श्वगायिका प्रियंका सिंह की सुरीली आवाज में देवीगीत ‘माई के मंद मंद मुस्कनिया’ वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड्स ने किया रिलीज

    भोजपुरी सिनेमा के पावर स्टार पवन सिंह, ग्लोबल स्टार खेसारी लाल सहित तमाम सुपरस्टार की फिल्मों के गानों में अपनी सुरीली आवाज का जादू चला चुकी मोस्ट पॉपुलर पार्श्वगायिका प्रियंका सिंह की सुरीली आवाज में देवी गीत ‘माई के मंद मंद मुस्कनिया’ शारदीय नवरात्रि पर्व पर रिलीज किया गया है। नवरात्रि के प्रथम दिन पर ऑडियंस के बीच रिलीज हुआ यह देवी गीत वर्ल्ड लवाइड रिकॉर्ड्स भोजपुरी के ऑफिसियल यूट्यूब चैनल पर देखा जा सकता है। इस देवी गीत को ऑडियंस और माता जी के भक्तों का भरपूर प्यार मिल रहा है। इस गीत को सुनकर माता के भक्तों में एक अलग ही उमंग और उत्साह दिखाई दे रहा है। माता के पंडालों में भी इस देवी गीत को खूब बजाया जा रहा है और उसके तान व धुन पर लोग झूम रहे हैं और गुनगुना रहे हैं। इस गीत का फिल्मांकन देखते ही बन रहा है। इसके वीडियो में सिंगर प्रियंका सिंह खुद माता की भक्ति भाव में डूबी नजर आ रही हैं और माताजी की मोहिनी मुस्कान को देखकर जहां भाव विभोर हो रही हैं और साथ ही साथ माताजी के मुस्कुराहट एवं रूप श्रृंगार का वर्णन भी कर रही हैं। ये देवीगीत देख व सुनकर हर किसी का मन मयूर झूठ उठ रहा है।

    लिंकः https://youtu.be/3zsKUmYD6BM?si=2UY-u9Jd_iQ6PhZi

    वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड्स प्रस्तुत नवरात्रि स्पेशल देवीगीत ‘माई के मंद मंद मुस्कनिया’ के निर्माता रत्नाकर कुमार हैं। इस गीत को सिंगर प्रियंका सिंह ने मधुर आवाज में गाया है। गायकी के साथ-साथ इस गीत के वीडियो में भी प्रियंका सिंह ने खुद मुख्य भूमिका निभाई है। पारंपरिक परिधान में सज-धजकर उन्होंने वीडियो में जो अभिनय और एक्सप्रेशन्स दिए हैं, वे सीधे दर्शकों के दिलों को छूते हैं। इस गाने को गीतकार संतोष उत्पती ने लिखा है, जबकि संगीतकार विनीत शाह ने मधुर संगीत दिया है। वीडियो डायरेक्टर विनीत शाह हैं। इस गाने का ऑल राइट वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड्स के पास है।

    वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड्स के एम डी एवं फ़िल्म निर्माता रत्नाकर कुमार ने कहा कि ‘​इस देवी गीत की सबसे बड़ी खासियत गायिका प्रियंका सिंह की सुरीली आवाज और शानदार अभिनय है। उन्होंने बहुत सारी फिल्मों में कई हिट गीत गाये हैं। म्यूजिक वीडियो अल्बम गीत में भी बहुत सारा हिट गीत गाया है। ये देवी गीत हर पूजा पंडाल और घर-घर में गूंज रहा है। इस गीत प्यार देने और पसंद करने के लिए सभी श्रोताओं और श्रद्धालुओं को दिल से धन्यवाद!’

    वही सिंगर प्रियंका सिंह ने कहा कि ‘वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड्स के एमडी एवं फिल्म प्रोड्यूसर रत्नाकर कुमार सर संगीत और कला के पारखी जौहरी है। उन्हें पारस पत्थर भी कह सकते हैं। उन्होंने इस देवी गीत का निर्माण बड़े शिद्दत से किया है, जिसे हर कोई खूब पसंद कर रहा है। इसके लिए रत्नाकर सर को दिल से थैंक्यू और ऑडियंस को भी तहेदिल से आभार व्यक्त करती हूं।’

  • धनंजय सिंह के पक्ष में हाईकोर्ट के फैसले की उम्मीद, समर्थकों में खुशी की लहर

    धनंजय सिंह के पक्ष में हाईकोर्ट के फैसले की उम्मीद, समर्थकों में खुशी की लहर

    नेशनल डेस्क निष्पक्ष टुडे :-

    मल्हनी की सियासत में बढ़ी हलचल, हाईकोर्ट के आदेश और आगामी राजनीतिक समीकरणों पर टिकी नजर


    जौनपुर। पूर्व सांसद धनंजय सिंह से जुड़ी बड़ी राजनीतिक और कानूनी खबर सामने आ रही है। जौनपुर कोर्ट से मिली सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में चल रही कानूनी प्रक्रिया को लेकर उनके पक्ष में फैसला आने की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    क्या है मामला ?

    जौनपुर कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में कानूनी प्रक्रिया चल रही है।

    सूत्रों के हवाले से धनंजय सिंह के पक्ष में फैसला आने की उम्मीद जताई जा रही है।

    हालांकि, हाईकोर्ट का आधिकारिक आदेश आने तक इसे अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता।

    समर्थकों में उत्साह –

    संभावित फैसले की चर्चाओं के बीच धनंजय सिंह के समर्थकों में खुशी और उत्साह का माहौल बताया जा रहा है। समर्थकों की नजर अब हाईकोर्ट के आधिकारिक आदेश पर टिकी है।

    मल्हनी चुनाव को लेकर बढ़ी चर्चा –

    इसी बीच मल्हनी विधानसभा सीट से धनंजय सिंह के चुनाव मैदान में उतरने की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
    गठबंधन के नेताओं से संपर्क?

    सूत्रों के अनुसार, राजनीतिक स्तर पर भाजपा गठबंधन के विभिन्न दलों के नेताओं से मुलाकात और संपर्क का सिलसिला जारी होने की चर्चा है। हालांकि, इस संबंध में किसी औपचारिक राजनीतिक घोषणा की पुष्टि सामने नहीं आई है।

    अब नजर हाईकोर्ट के आदेश पर –

    फिलहाल जौनपुर की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या हाईकोर्ट का फैसला धनंजय सिंह के पक्ष में आता है? अगर ऐसा होता है तो मल्हनी की चुनावी राजनीति और राजनीतिक समीकरणों पर इसका क्या असर पड़ेगा?

    मल्हनी की सियासत में हलचल बढ़ चुकी है और अब सबकी नजर हाईकोर्ट के आधिकारिक फैसले तथा आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम पर है।

  • राम नगीना साहनी प्रकरण पर निषाद पार्टी की प्रतिक्रिया राम नगीना साहनी प्रकरण पर निषाद पार्टी ने जताई नाराजगी

    राम नगीना साहनी प्रकरण पर निषाद पार्टी की प्रतिक्रिया राम नगीना साहनी प्रकरण पर निषाद पार्टी ने जताई नाराजगी

    गोरखपुर ब्यूरो निष्पक्ष टुडे :-

    घटना को बताया दुर्भाग्यपूर्ण, दोषियों पर कार्रवाई की मांग; कार्रवाई न होने पर लखनऊ में लोकतांत्रिक घेराव की चेतावनी


    राम नगीना साहनी जी के साथ हुई घटना को लेकर निषाद समाज और निषाद पार्टी की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद के कथन का समर्थन करते हुए कहा गया है कि उनके साथ हुई घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।

    क्या कहा गया?

    बयान में आरोप लगाया गया है कि इस घटना में समाजवादी पार्टी से जुड़े लोग शामिल थे। इसे लेकर समाजवादी पार्टी के राजनीतिक व्यवहार और सोच पर सवाल उठाए गए हैं।

    बयान में यह भी कहा गया है कि इस घटना से यह चिंता पैदा होती है कि यदि समाजवादी पार्टी सत्ता में आती है, तो निषाद समाज के साथ उसका व्यवहार कैसा होगा।

    अखिलेश यादव से स्पष्ट रुख की मांग

    निषाद पार्टी की ओर से समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से इस मामले पर स्पष्ट और आधिकारिक रुख सामने रखने की मांग की गई है।

    साथ ही, घटना के लिए जिम्मेदार बताए जा रहे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
    लखनऊ कार्यालय के घेराव की चेतावनी
    बयान में कहा गया है कि यदि मामले में स्पष्ट कार्रवाई नहीं होती है, तो निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार निषाद के नेतृत्व में लोकतांत्रिक तरीके से समाजवादी पार्टी के लखनऊ स्थित कार्यालय का घेराव किया जाएगा।

    निषाद समाज के सम्मान का मुद्दा –

    बयान में स्पष्ट किया गया है कि निषाद समाज के सम्मान और अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार के अन्याय को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
    अब सवाल यह है कि राम नगीना साहनी प्रकरण पर समाजवादी पार्टी नेतृत्व की ओर से क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आती है और मामले में क्या कार्रवाई होती है?

  • 15 विभूतियों के स्मृति में दिया जाएगा सरयू रत्न सम्मान

    15 विभूतियों के स्मृति में दिया जाएगा सरयू रत्न सम्मान

                 ब्यूरो प्रभारी —-विनय तिवारी
    बड़हलगंज/गोरखपुर(निष्पक्ष टुडे) बड़हलगंज: आगामी 11 अक्टूबर से 17 अक्टूबर तक चलने वाले पितृ तृप्ति रुद्र महायज्ञ के दौरान होने वाले सरयू महोत्सव में इस बार विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ठ कार्य कर चुके चिल्लूपार क्षेत्र के 15 विभूतियों के स्मृति में 15 लोगों को सरयू रत्न सम्मान दिया जाएगा।
    शुक्रवार को चिल्लूपार विधायक राजेश त्रिपाठी ने अपने आवास पर एक पत्रकार वार्ता के दौरान पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि चिल्लूपार क्षेत्र में एक से बढ़कर एक विभूतियों ने इस क्षेत्र को अपने उत्कृष्ठ कार्यों के जरिए अभिसिंचित किया है। ऐसे लोगों को समाज के साथ साथ नवीन पीढ़ी को अवगत कराने के उद्देश्य के साथ 15 विभूतियों के स्मृतियों में 15 लोगों को सरयू रत्न सम्मान दिया जाएगा।

    अध्यात्म के क्षेत्र का सरयू रत्न सम्मान तपस्वी जी महराज जी के स्मृति में डा रामानंद दास जी महाराज को दिया जाएगा।

    शिक्षा के क्षेत्र का सरयू रत्न सम्मान स्व रामछबिले श्रीवास्तव जी के स्मृति में केसी भारती जी को दिया जाएगा।

    साहित्य के क्षेत्र का सरयू रत्न सम्मान रघुनाथ चंद तिवारी जी के स्मृति में फूलचंद तिवारी जी को दिया जाएगा।

    पत्रकारिता के क्षेत्र का सरयू रत्न सम्मान उदयभान मिश्र जी के स्मृति में अखिलेश गुप्ता जी को दिया जाएगा।

    चिकित्सा के क्षेत्र का सरयू रत्न सम्मान मुरलीधर दुबे जी के स्मृति में डा बीके राय जी को दिया जाएगा।

    क्रीड़ा के क्षेत्र का सरयू रत्न सम्मान ब्रह्मदेव मिश्र उर्फ गामा पहलवान जी के स्मृति में श्याम दुलारे यादव जी को दिया जाएगा।

    समाजसेवा के क्षेत्र का सरयू रत्न सम्मान काली बाबू जी अग्रवाल के स्मृति में राजू चंद जी को दिया जाएगा।

    वीरता के क्षेत्र का सरयू रत्न सम्मान शहिद धन्तेश्वर मौर्य जी के स्मृति में आईपीएस जितेन्द्र मणि त्रिपाठी जी को दिया जाएगा।

    उद्यम के क्षेत्र का सरयू रत्न सम्मान रामबेलास यादव जी के स्मृति में सत्यप्रकाश तिवारी जी को दिया जाएगा।

    पर्यावरण के क्षेत्र का सरयू रत्न सम्मान बाबू अनुरुद्ध शाही जी के स्मृति में महीप श्रीवास्तव जी को दिया जाएगा।

    लोक कला एवं संस्कृति के क्षेत्र का सरयू रत्न सम्मान ओम प्रकाश पाण्डेय जी के स्मृति में प्रियव्रत मिश्र जी को दिया जाएगा।

    कृषि के क्षेत्र का सरयू रत्न सम्मान नवल चंद शुक्ल जी के स्मृति में कर्मजीत सिंह सैंथवार जी को दिया जाएगा।

    श्रम के क्षेत्र का सरयू रत्न सम्मान राम स्नेही मौर्य जी के स्मृति में आजम मिस्त्री जी को दिया जाएगा।

    विज्ञान के क्षेत्र का सरयू रत्न सम्मान एच एन त्रिपाठी जी के स्मृति में अनुराग शुक्ल जी को दिया जाएगा।

    इसके अतिरिक्त स्व तारा देवी उमर जी के स्मृति में प्रधान संगीता गुप्ता जी को अपराजिता का सरयू रत्न सम्मान दिया जाएगा।