Category: धर्म

  • भक्ति मानव की आत्मा को पूर्ण करती है: राजन जी महाराज

    भक्ति मानव की आत्मा को पूर्ण करती है: राजन जी महाराज

    ब्यूरो प्रभारी —-विनय तिवारी

    बड़हलगंज/गोरखपुर(निष्पक्ष टुडे) बड़हलगंज जीवन में जय जयकार करने से कभी नहीं चूकना चाहिए क्योंकि ब्राह्मण को वेद उच्चारण से जो लाभ प्राप्त होता है, वही लाभ प्रभु के नाम के जय जयकार करने से सभी को मिलता है। भक्ति मानव की आत्मा को पूर्ण करती है

    उक्त बातें अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक राजन महाराज ने रविवार को नेशनल इंटर कॉलेज के मैदान में चल रहे नौ दिवसीय श्रीराम कथा के चतुर्थ दिवस धनुष यज्ञ की कथा सुनाते हुए कही। कथा का विस्तार करते हुए कहा कि जब तक अपने को रिक्त नहीं मानेंगे तब तक कुछ नहीं जानेंगे। घर यदि सुंदर है तो जीव फोटो खिंचवाने आते है, अगर मन पावन हो जाय तो स्वयं भगवान फोटो खिंचवाने चले आते हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य को हमेशा संत के शरण में रहना चाहिए क्योंकि संत भगवान के एजेंट होते हैं। माता अहिल्या के श्राप की कथा सुनाते हुए राजन महाराज ने कहा कि अगर आपका श्रेष्ठ, आप पर क्रोध करता है तो उस क्रोध में भी मंगल छिपा होता है। कोई व्यक्ति अरबपति या खरबपति होकर सुखी नहीं हो सकते, क्योंकि अधिक संपत्ति विपत्ति में बदल जाती है, लेकिन अगर व्यक्ति के अन्दर भगवान की भक्ति मिल जाय तो वह तृप्ति को प्राप्त कर सकता है। भक्ति का कोई समय नहीं होता, शरीर जब तक ठीक है भक्ति करते रहना चाहिए। इससे पूर्व ब्लॉक प्रमुख राम आशीष राय, डॉ रमेश सिंह, सुनीता सिंह, अमित पांडेय, प्रीति पांडेय आदि ने व्यास पीठ की आरती उतार कर कथा का शुभारंभ कराया। इस दौरान सूबेदार राय, कुलदीप राय, अनिल पांडेय, डॉ सुमित मिश्रा, डा एएन चौबे, कमलेश सिंह,गिरधारी लाल स्वर्णकार, तारा राय सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहें।

  • रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के 1 साल पूरे होने पर उत्सव

    रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के 1 साल पूरे होने पर उत्सव

    50 क्विंटल फूलों से सजा राम मंदिर, 56 प्रकार के भोग लगे: अयोध्या में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के 1 साल पूरे, 3 दिवसीय उत्सव,

    अयोध्या में भगवान रामलला की स्थापना 22 जनवरी 2024 को हुई थी। हालाँकि, हिंदी पंचांग के आधार पर देखें तो कल शुक्रवार (11 जनवरी 2025) को प्राण प्रतिष्ठा के एक साल पूरे हो गए हैं। इस दिन को प्रतिष्ठा द्वादशी उत्सव के रूप में मनाया गया। यह उत्सव तीन दिनों तक चलेगा। पिछले साल 22 जनवरी को जो मुहूर्त था, वही मुहूर्त 11 जनवरी को भी था।
    प्राण प्रतिष्ठा द्वादशी उत्सव कल 11 जनवरी से शुरू होकर 13 जनवरी तक चलेगा। कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं उपस्थित होकर भगवान राम का पूजन किया। इसके अलावा, उत्सव में कई साधु संन्यासी भी शामिल हुए। सीएम योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर में रामलला की विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक और आरती की।

    इस उत्सव में कई तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना है, जिसमें रामलीला और भजन-कीर्तन आदि शामिल है। इन आयोजनों में भारत की प्राचीन संस्कृति के दर्शन के साथ-साथ भारतीय लोक गीतों और लोक नृत्यों भी शामिल है। इन सबके लिए स्थानीय प्रशासन की ओर से अयोध्या में बड़े स्तर पर तैयारियाँ की गई हैं।
    श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की ओर से बताया गया है, “प्रतिष्ठा द्वादशी के पावन पर्व पर आयोजित श्री राम राग सेवा के अंतर्गत लब्धप्रतिष्ठित श्रीमती ऊषा मंगेशकर, श्रीमती गौरी यादवाडकर तथा गायक श्री मयूरेश पई द्वारा प्रभु के समक्ष श्री राम भजन प्रस्तुत किए गए हैं।”

    राम मंदिर में आयोजित उत्सव को लेकर मंदिर परिसर को 50 क्विंटल फूलों से सजाया गया। भगवान राम को 56 प्रकार के भोग लगाए गए और इस भोग को श्रद्धालुओं में वितरित किए जाने की बात कही जा रही है। इस दिन भगवान श्रीराम को, सोने की आभा वाले, सलोने रंग के वस्त्र पहनाए गए।

  • बिना राम के विश्राम नही – राजन जी

    बिना राम के विश्राम नही – राजन जी

     

    ब्यूरो प्रभारी —-विनय तिवारी

    बड़हलगंज/गोरखपुर(निष्पक्ष टुडे) :- बडहलगंज जिस प्रकार समुंद्र का जल नही नापा जा सकता है, उसी प्रकार भगवान सुख के समुंद्र हैं, उनके द्वारा दिए जाने वाले सुख को नही नापा जा सकता। भगवान राम ही हमें विश्राम दिलाते हैं अर्थात बिना राम के विश्राम नही हैं।

    उक्त बातें शनिवार को अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथा वाचक पूज्य संत राजन जी महाराज ने बड़हलगंज के नेशनल इंटर कॉलेज के मैदान में श्री हनुमान सेवा समिति के तत्वाधान में आयोजित श्री राम कथा के तीसरे दिन कथा सुनाते हुए कही। कथा वाचक राजन जी महाराज ने कहा कि प्रभु के नाम को जपने के दौरान गिनती नहीं करनी चाहिए। जीवन का धर्म अर्थ है तथा परम धर्म परमार्थ है। जिसके पास भगवान की भक्ति है, संसार में उससे बड़ा कोई धनी नही है।

    उन्होंने कथा का रसपान कराते हुए कहा कि सबरी माता और केवट रघुनाथ जी के पास नही गए हैं, बल्कि रामजी स्वयं उनके पास गए हैं, उदाहरण देते हुए कथावाचक ने कहा कि आप भगवान को मत ढूंढिए, बल्कि भक्ति में लीन रहिए भगवान स्वयं आपके पास आयेंगे। प्रभू राम जी के जन्म की कथा सुनाते हुए राजन जी ने कहा कि अयोध्या में भगवान श्री राम के जन्म लेने पर एक मास तक उत्सव होता रहा। उन्होंने बताया कि राम जन्म उत्सव पर भगवान शिव भी मौजूद थे क्योंकि बाल राम शंकर जी के इष्ट देव हैं। उन्होंने कहा कि माया के पाप को अपने आप से बचाने के लिए रघुनाथ जी का भजन करना चाहिए। मनुष्य के मन में किसी प्रकार की चतुराई नही होनी चाहिए। जिस पर जितनी रघुनाथ जी की कृपा होती है, उसे उतना ही सुख मिलता है। कथा शुभारंभ के पहले चेयरमैन श्रीमती प्रिती उमर, प्रतिनिधि महेश उमर, डा. देवेश दूबे व नेहा दूबे, शैलेंद्र मिश्र एवं श्रीमती सरोज मिश्र, राकेश पाण्डेय मारीशस ने कथा व्यास पीठ का आरती कर कथा आरम्भ कराया । आयोजक सूबेदार व अनिल पाण्डेय ने सभी आगुन्तको के प्रति आभार ज्ञापित किया ।इस दौरान सूबेदार राय, अनिल पाण्डेय, कुलदीप राय, डा. ए.न .चौबे, कैलाश नाथ मिश्र, विमला मिश्र, रामहर्ष गुप्ता, कमलेश सिंह, राकेश सिंह, राजीव राय, अजय प्रसाद राय, योगेश राय, मुकेश राय, तारा राय, सरोज पाण्डेय, सुस्मिता, कविता, प्रेमसागर तिवारी आदि श्रद्धालु उपस्थित थे ।

  • कन्यादान से बड़ा कोई यज्ञ नहीं, कोई दान नहीं:राजनजी महाराज

    कन्यादान से बड़ा कोई यज्ञ नहीं, कोई दान नहीं:राजनजी महाराज

    कन्यादान से बड़ा कोई यज्ञ नहीं, कोई दान नहीं:राजनजी महाराज,

    रामकथा के दूसरे दिन शिव विवाह की कथा सुन भावविभोर हुए श्रोता,

    बड़हलगंज /गोरखपुर (निष्पक्ष टुडे) बड़हलगंज के नेशनल इण्टर कालेज खेल मैदान में चल रही नौ दिवसीय रामकथा के दूसरे दिन कथा वाचक राजन जी महाराज ने शिव पार्वती के विवाह का प्रसंग सुनाकर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। इस दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
    शुक्रवार को उपस्थित श्रद्धालुओं पर भक्ति रस की बौछार करते हुए कथा वाचक राजन जी महाराज ने कहा कि इस संसार में बेटी के कन्या दान से बड़ा कोई यज्ञ नहीं।कोई दान नहीं।जिस घर में बेटियों का सम्मान होता है,जहां पर बेटी के पायल की छम-छम की आवाज सुनाई देती है,उस घर में देवताओं का निवास होता है।शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि नारद जी के कहने से माता पार्वती ने कई वर्षों तक शिव को पति के रूप में पाने के लिए तपस्या किया। उधर तारकासुर ब्रह्मा जी से शिव पुत्र के हाथों मृत्यु का वरदान पा खुद को अमर मान देवताओं को भयंकर दुःख दे रहा था। सभी देवता ब्रह्मा जी के पास पहुंचे तो उन्होंने शिव को समाधि से जगाने के लिए कामदेव को कहा। कामदेव खुद की आहुति दे शिव को समाधि से बाहर किया। इसके बाद उन्हें विवाह के लिए ब्रह्मा जी ने तैयार किया। शिव बारात का बेहतरीन वर्णन करते हुए राजन जी महाराज ने बताया कि जब शंकर जी दूल्हा बनकर चले तो उनके साथ देवताओं, भूत-प्रेत नाना प्रकार के रूप बनाकर हिमाचल के नगर की तरफ शोर-गुल मचाते हुए चल दिए।बारात जब राजा हिमाचल के नगर में प्रवेश करती है तो उसे देखते ही लोग लोग भाग खड़े हुए।रानी मैनावती के हाथों से पूजा की थाली गिर जाती है। विकराल वेश में शंकर को देखकर सभी लोग नारद जी को दोष देने लगे। मैनावती माता पार्वती को गोद में लेकर जोर से विलाप करने लगीं। कहती हैं कि इस पागल के साथ मैं अपनी बेटी का विवाह नहीं करूंगी चाहे जो भी हो जाए। नारद जी आये और बताया कि जिसे आप अपनी बेटी समझ रहीं हैं, वे शक्ति स्वरूपा हैं। किसी तरह विवाह संपन्न हुआ।विदाई के समय मैना रानी पार्वती जी से कह रही हैं कि हमेशा अपने पति की सेवा करना। पति-धर्म से बड़ा कोई धर्म नहीं है। पत्नी के लिए पति से बड़ा संसार में कोई देवता नहीं है।श्रद्धालुओं को रामकथा का अमृतपान कराते हुए राजनजी ने कहा कि माता पार्वती जी महल छोड़कर आईं थीं और कैलाश के पत्थरों पर भी काफी खुश थीं।उनके जीवन से यह सीख मिलती है कि जीवन में सुख साधन से नहीं हो सकता है। जीवन में सुख मन के स्वीकार करने की शक्ति से होता है।अगर आपने परिस्थिति को स्वीकार कर लिया तो दुनिया की कोई ताकत आपको दु:खी नहीं कर सकती है।उन्होंने कहा कि शिव-पार्वती का विवाह संसार में अद्वितीय है।इनके विवाह से काफी प्रसन्न देवता वर्षों तक संतान उत्पन्न न होने से काफी दुःखी रहने लगे क्योंकि तारकासुर नामक राक्षस का उत्पात बढ़ता जा रहा था और उसका संहार शिवपुत्र के हाथों ही होना था।देवताओं की प्रबल इच्छा कुछ समय बाद पूर्ण हुई और छः मुख वाले भगवान कार्तिकेय का जन्म हुआ।शिव-शिवा के इन्हीं पुत्र के हाथों तारकासुर का वध हुआ।देवता चिन्तामुक्त हुए और प्रसन्न हो पुष्प वर्षा किये।इसके पूर्व आज के मुख्य यजमान डाक्टर ए एन चौबे के साथ रानी चौबे, प्रवीण राय के साथ सुप्रिया, शिवम् शुक्ला के साथ जया शुक्ला एवं नागेन्द्र सिंह रघुवंशी के साथ अमरावती सिंह ने व्यास पीठ का पूजन व आरती कर कथा का शुभारम्भ कराया।आयोजक सूबेदार राय ने सभी आगंतुकों के प्रति आभार ज्ञापित किया। इस अवसर पर एन पी जी के प्राचार्य डॉ राकेश पाण्डेय , डा अचला पाण्डेय,अनिल पाण्डेय, कुलदीप राय,शैलेश शाही, कमलेश सिंह आदि सहित हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

  • महाकुंभ को लेकर भारत-नेपाल बॉर्डर पर अलर्ट

    महाकुंभ को लेकर भारत-नेपाल बॉर्डर पर अलर्ट

    महाकुंभ को लेकर भारत-नेपाल बॉर्डर पर अलर्ट, बॉर्डर की सुरक्षा का जायजा लेने पहुंचे ADG. नेपाल के अफसरों के साथ की समीक्षा व्यवस्था बैठक, महाकुंभ सुरक्षा पर सहयोग पर हुई चर्चा। ड्रोन से रखी जाएगी बॉर्डर पर सुरक्षा, बॉर्डर पर पेट्रोलिंग भी बढ़ाई जाएगी। नेपाल के साथ चेकिंग प्वाइंट बढ़ाने पर भी हुई बात
    प्रयागराज में 13 जनवरी से भव्य, दिव्य और नव्य महाकुंभ का शुभारंभ होगा. महाकुंभ को देखते हुए पूरे प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था को चाक चौबंद कर दिया गया है. इसी कड़ी में महाकुंभ को देखते हुए सिद्धार्थनगर जिले की भारत नेपाल सीमा पर भी सतर्कता बढ़ा दी गई है. सीमावर्ती क्षेत्रों और बॉर्डर चेक पोस्ट पर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए बस्ती रेंज के डीआईजी विनोद कुमार पी सिद्धार्थनगर पहुंचे. इस दौरान डीआईजी विनोद कुमार पी के साथ पुलिस कप्तान अभिषेक महाजन ने अलीगढ़वा बॉर्डर पर जाकर एसएसबी के जवानों और स्थानीय लोगों से मुलाकात की और उनके समस्याओं से रूबरू हुए.

  • 22 जनवरी को हुई थी रामलला की प्राण प्रतिष्ठा, तो फिर 11 जनवरी को क्यों मनाई जाएगी वर्षगांठ

    22 जनवरी को हुई थी रामलला की प्राण प्रतिष्ठा, तो फिर 11 जनवरी को क्यों मनाई जाएगी वर्षगांठ

    अयोध्या: 22 जनवरी को हुई थी रामलला की प्राण प्रतिष्ठा, तो फिर 11 जनवरी को क्यों मनाई जाएगी वर्षगांठ,

     भगवान श्रीराम के भव्य और दिव्य मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को संपन्न हुई थी।

     लेकिन इस बार राम मंदिर प्रबंधन द्वारा प्राण प्रतिष्ठा की वर्षगांठ 11 जनवरी 2025 को मनाने की घोषणा की गई है।

    पिछले वर्ष यह तिथि अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 22 जनवरी को पड़ी थी. लेकिन इस वर्ष कूर्म द्वादशी की तिथि 11 जनवरी को पड़ रही है. इसलिए इस वर्षगांठ का उत्सव 11 जनवरी को ही मनाया जाएगा।

  • धर्म के पथ पर चलना सिखाती है राम कथा

    धर्म के पथ पर चलना सिखाती है राम कथा

    बड़हलगंज/गोरखपुर (निष्पक्ष टुडे) बड़हलगंज रामायण हमें धर्म के पथ पर चलना सिखाती है। आप जहां भी रहे हैं वहां की अच्छाइयों को देखने का प्रयास करें। जीवन के केंद्र में धर्म व आध्यात्म का होना बहुत जरूरी है। जिसके जीवन में धर्म व सदाचार नहीं है वह इस धरती पर भार के समान है। राम कथा के श्रवण से प्रभु के आदर्श चरित्र व कृत्य को जानने और सुनने का सौभाग्य प्राप्त होता है। इसे सुनकर हम अपने जीवन में उनके गुणों को आत्मसात कर सकते हैं। जिससे हमारा जीवन भी मर्यादित हो सके। अंधेरे को भगाने के लिए जिस प्रकार दीपक जलाना पड़ता है इसी तरह जीवन के अंधेरे को दूर करना है, परेशानी से बचते हुए जीवन को सुख-शांति और वैभव से आगे बढ़ाना है तथा जीवन को प्रकाशवान बनाए रखना है तो हमें मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान राम की तरह आचरण करना होगा और उनके नाम का हर क्षण निरंतरता बनाए रखनी होगी,
    यह बातें अंतरराष्ट्रीय कथावाचक राजनजी महाराज ने कही। वे नेशनल इंटर कालेज के मैदान पर शुरू हुए नौ दिवसीय रामकथा के पहले दिन उपस्थित श्रोताओं को कथा का रसपान करा रहे थे। कहा कि श्रीराम कथा कलयुग में कामधेनु के समान है। निस्वार्थ भाव से की गई कामना रामकथा के श्रवण से पूरी हो जाती है। कलिकाल में राम नाम स्मरण व श्रीराम कथा श्रवण मात्र से ही जीव कष्टों से छुटकारा पा सकता है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने श्री रामचरित मानस के रूप में अमृत प्रदान किया है। आज के विसंगतिपूर्ण वातावरण में अगर श्रीराम के आदर्श को आत्मसात किया जाय तो आदर्श समाज की स्थापना होगी। भाव के साथ रामकथा को श्रवण करें, बेड़ा पार हो जायेगा। राजन जी ने कहा कि जीवन में नाम का विशेष महत्व है। फिर चाहे व्यक्ति विशेष का नाम हो चाहे स्थान का या प्रतिष्ठान का। जीवन मे जबतक निमित्त को मानते रहेंगे, अभिमान व अंहकार से बचे रहेंगे। गोस्वामी तुलसीदास ने मानस की रचना कर अपने मन मे रखी और उचित समय पर भगवान शिव के मुखारविंद से माता पार्वती को सुनायें। गोस्वामी जी कहते है कि रामचरित महादेव के मानस से प्रकट हुई है। रामकथा के श्रवण से मानव धन्य हो जाता है। आचार्य ने रामकथा के गुढ़ रहस्य को बताते हुए कहा कि जो वर्तमान को स्वीकार नही करते वह डिप्रेशन मे चले जाते है। इसलिए हर मनुष्य अगर वर्तमान ठीक रखे तो भविष्य अपने आप ठीक हो जायेगा,
    जीवन मे वर्तमान को स्वीकार कर विश्राम करने वाला सुखी होता है। इसके पहले पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी, डा. ए एन चौबे, रानी चौबे, सूबेदार राय, तारा राय ने व्यास पीठ की आरती कर कथा आरंभ कराया। राम हर्ष गुप्ता, कमलेश सिंह, कुलदीप राय,राजीव,अजय, जितेंद्र, पीयूष,अनिल पांडेय, शैलेश शाही,नीरज, आदर्श,जय सिंह, गौरव,अमरीश , भूवनेश्वर चौबे, अजय दूबे, सुशील, आशीष तिवारी आदि मौजूद रहे।

    https://youtu.be/TfMTAK9Yg68?si=QfFsb2SHwNA0r7PW

  • महाकुम्भ की वेबसाइट पर आए 183 देशों के 33 लाख से ज्यादा यूजर्स

    महाकुम्भ की वेबसाइट पर आए 183 देशों के 33 लाख से ज्यादा यूजर्स

    लखनऊ: महाकुम्भ की वेबसाइट पर आए 183 देशों के 33 लाख से ज्यादा यूजर्स

    सीएम योगी के डिजिटल महाकुम्भ के संकल्प को साकार कर रही महाकुम्भ की वेबसाइट kumbh.gov.in

    महाकुम्भ 2025 के करीब आते ही प्रतिदिन लाखों यूजर्स वेबसाइट पर कर रहे विजिट

    भारत समेत 183 देशों के 6200 से ज्यादा शहरों के यूजर्स ने किया वेबसाइट पर अवलोकन

    भारत के साथ अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और जर्मनी से सबसे ज्यादा हो रहा लॉगिन

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 6 अक्टूबर को महाकुम्भ की वेबसाइट को किया था लांच ।

  • मुसमलानों ने कहा है कि महाकुंभ जिस जमीन पर आयोजित किया जा रहा है, वो वक्फ की संपत्ति है

    मुसमलानों ने कहा है कि महाकुंभ जिस जमीन पर आयोजित किया जा रहा है, वो वक्फ की संपत्ति है

    प्रयागराज के स्थानीय मुसमलानों ने कहा है कि महाकुंभ जिस जमीन पर आयोजित किया जा रहा है. वो वक्फ की संपत्ति है. महाकुंभ पर वक्फ वाले दावे की इनसाइड स्टोरी का सच क्या है, आइए आपको बताते हैं. महाकुंभ को लेकर खड़ी गई की एक कंट्रोवर्सी के बारे में आपको बताएंगे क्योंकि महाकुंभ को लेकर करा दी गई है वक्फ वाले दावे की एंट्री. दरअसल ये दावा आया है प्रयागराज के स्थानीय मुसलमानों की तरफ से जिनका कहना है कि जिस धर्मक्षेत्र में महाकुंभ का आयोजन हो रहा है वो वक्फ की संपत्ति है. कुछ मुसलमानों का दावा है कि जिस जमीन पर संतों के अखाड़े लगे हुए हैं. वो भी वक्फ की संपत्ति है.

    कुल मिलाकर 54 बीघा जमीन पर वक्फ वाला दावा ठोका गया है और इन दावों के साथ कहा गया है कि जो जमीन वक्फ की है उस पर मुसलमानों की एंट्री नहीं रोकी जा सकती है.

  • रामकथा से ही मनुष्य भवसागर को करता है पार

    रामकथा से ही मनुष्य भवसागर को करता है पार

    बड़हलगंज जिस पर प्रभु की कृपा होती है वही सत्संग में भाग लेता है। राम की कृपा से ही सब काम संभव है। राम का नाम से ही सब दुख दुर हो जाते है। रामकथा से ही मनुष्य भवसागर को पार कर जाता है। यह बाते अयोध्या से चल कर आये प्रख्यात कथा वाचक श्री अतुल पांडेय जी महाराज ने बड़हलगंज विकास खंड के मुजौना गांव में श्री खुदी राम ब्रम्ह स्थान पर श्री राम कथा का रसपान कराते हुए कही। उन्होंने कहा कि रामनाम में बहुत शक्ति है, जहा कथा होती है वहा बैठने मात्र से ही सारे पाप कट जाते है। उन्होंने शनिवार देर रात तक श्रद्धालुओ को अपने कथा का रसपान कराया। क्षेत्र के मुजौना गांव में तैतालीस वर्षो से श्री खुदीराम ब्रम्ह मंदिर पर नौ दिवसीय राम चरीत मानस नवान्ह परायण पाठ व अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। लम्बे समय से चले आ रहे कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए कथा वाचक अतुल जी महाराज ने आयोजक मंडल की सराहना करते हुए कहा कि सनातन धर्म का प्रचार प्रसार राम के नाम से ही संभव है। कथा का शुभारंभ यजमान राघवेन्द्र मिश्र, प्रेम प्रेमनारायन तिवारी व बिष्णुदयाल तिवारी ने ब्यास पीठ की आरती कर किया। इस दौरान जोखन मिश्र, वीरेन्द्र तिवारी, जितेंद्र तिवारी, राजीव तिवारी, अशोक पान्डेय, आचार्य कमला तिवारी, रामआशीष पान्डेय,शिवेन मिश्र, भोला शर्मा, जितेंद्र शर्मा, अमरनाथ गौड़, विश्वनाथ शर्मा आदि लोग मौजुद थे

    https://youtube.com/shorts/M86a1rk8doc?si=BFOHWnK1o2hAlM_p