Category: उत्तर प्रदेश
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अमित बघेल पर दर्ज करें एफआइआर, सिंधी समाज ने दी तहरीर, सिंधी सभा के अध्यक्ष राजेश नेभानी के नेतृत्व में एसपी सिटी से मिले लोग
गोरखपुर। समाज के ईष्ट देव के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने वाले छत्तीसगढ़ के अमित बघेल के खिलाफ सिंधी समाज ने एफआइआर दर्ज कराने की मांग की है। सोमवार को सिंधी सभा के अध्यक्ष राजेश नेभानी के नेतृत्व में पहुंचे समाज के लोगों ने एसपी सिटी अभिनव त्यागी से मुलाकात की और तहरीर दी। अनुरोध किया कि तत्काल एफआइआर दर्ज कर अमित बघेल को गिरफ्तार किया जाए। अमित बघेल ने सिंधी समाज को पाकिस्तानी भी कहा है। वह छत्तीसगढ़ में क्रांतिकारी सेना संगठन का प्रमुख है।
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पुस्तक महोत्सव 2025 के दूसरे दिन चला पुस्तक परिचर्चा का कार्यक्रम
गोरखपुर। गोरखपुर पुस्तक महोत्सव 2025 के द्वितीय दिवस पर डिस्काउंट ग्रुप आफ पब्लिकेशन के स्टॉल पर पुस्तक परिचर्चा कार्यक्रम चला, जहां महाकुंभ मकरंद के लेखक मुकेश कुमार सिंह जी का स्वागत सौरभ कुमार सिंह प्रबंधक डिस्काउंट ग्रुप का पब्लिकेशन ने किया एवं साथ में श्री मुन्ना सिंह जी डीआईजी सशस्त्र सीमा बल गोरखपुर का आगमन हुआ एवं उनका भी स्वागत किया महाकुंभ मकरंद पुस्तक पर लेखक ने महाकुंभ में अपने ड्यूटी और महाकुंभ की व्यवस्था से प्रभावित होकर जो अपने भाव है उन्हें उसे पुस्तक में लिखा है मुन्ना सिंह जी ने काफी सवाल लेखक से पूछे तथा महाकुंभ के बारे में काफी चर्चाएं हुई।
दूसरा,
सुमन झा माहे जी की पुस्तक विश्वासघात
स्वेटर एक प्रेम कथा
पिघलते दर्द का कैनवस गजल संग्रह
इन तीनों पुस्तकों पर भी पर चर्चा हुआ, जिसमें सौरभ कुमार सिंह प्रबंधक ने सुमन झा जिसने पुस्तक लिखने की उनकी प्रेरणा एवं पुस्तक के भविष्य के ऊपर काफी चर्चाएं किया जिसमें उन्होंने विश्वासघात में अपने ऊपर बीती हुई घटना का जिक्र किया और काफी भावुक भी होगी जिसमें उन्होंने अपने पुत्र के वियोग के बारे में एवं दुर्घटना के बारे में काफी चर्चाएं किया इस परिचर्चा में डॉक्टर प्रियंका वर्मा डॉक्टर अजय शुक्ला अंग्रेजी विभाग डॉक्टर सरिता सिंह कवित्री श्रीमती पूजा गुप्ता कवित्री मिनत गोरखपुरी कवि आकृति विद्या कविता श्री राकेश राय पत्रकार आदि बहुत से लोग उपस्थित रहे एवं डॉक्टर प्रियंका वर्मा एवं राकेश राय जी ने विश्वासघात पुस्तक क्रय किया और सुमन झा जी से ऑटोग्राफ लिया एवं सेल्फी खिंचवाया स्टॉल पर।तीसरा,
द वंडरलैंड विदीन लेखिका रौनक श्रीवास्तव क्लास 11th में पढ़ने वाली बालिका अपने माता-पिता के साथ पुस्तक परी चर्चा में शामिल हुई जिससे सौरभ कुमार सिंह ने विभिन्न सवाल पूछे तथा परिचर्चा में गोरखपुर विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के विभिन्न प्रोफेसर भी उपलब्ध रहें जिसमें अंग्रेजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर सुनीता मुर्मू एवं प्रोफेसर गौर हरी बैहरा प्रोफेसर शिखा सिंह प्रोफेसर तूलिका मिश्रा प्रोफेसर रामदेव शुक्ल जी और विभिन्न लोग रहे।
तथा रौनक श्रीवास्तव के परिचर्चा में दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय की कुलपति माननीय प्रोफेसर पूनम टंडन एवं प्रोफेसर अनुभूति दुबे तथा प्रोफेसर विनीता पाठक आदि भी मौजूद रहे तथा कुलपति महोदया से सौरभ सिंह ने बच्ची के लिए आशीर्वाद स्वरुप दो शब्द कहने को कहा तो काफी बढ़िया मैडम ने बच्ची को आशीर्वाद दिया एवं आगे बढ़ाने के लिए उसे मंत्र दिए और पुस्तक पर अपनी विचार गर्वित किया।
गोरखपुर पुस्तक महोत्सव में विभिन्न विश्वविद्यालय के कुलपति पधारे और डिस्काउंट बुक स्टोर्स के स्टॉल पर उनका स्वागत हुआ प्रोफेसर शोभा गौड़ माननीय कुलपति मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय मिर्जापुर, प्रोफेसर संजीत गुप्ता माननीय कुलपति चंद्रशेखर विश्वविद्यालय बलिया
पुस्तक महोत्सव में स्टॉल पर माननीय विधायक डॉक्टर विमलेश पासवान, डॉ दिव्या रानी सिंह विभागाध्यक्ष गृह विज्ञान
माननीय विधान परिषद सदस्य श्री देवेंद्र सिंह जी आना हुआ जिन्हें सौरभ कुमार सिंह ने डॉक्टर फूलचंद गुप्ता द्वारा लिखित महायोगी गोरखनाथ का जीवन दर्शन पुस्तक भेंट किया और स्वागत किया तथा नेशनल पीजी कॉलेज बड़हलगंज के प्राचार्य एवं उदित नारायण पीजी कॉलेज पडरौना के प्रचार का आगमन हुआ।
आज तृतीय दिवस पर डिस्काउंट ग्रुप आफ पब्लिकेशन के स्टॉल पर डॉक्टर केशव गुप्ता के फार्मेसी की पुस्तक पर चर्चा 12:00 बजे होगी एवं डॉ अत्रेश सिंह के केमिस्ट्री के पुस्तक पर चर्चा 4:00 होगी तथा रविंद्र मोहन त्रिपाठी जी के रेल सेवा के 39 वर्ष पुस्तक पर परिचर्चा 2:00 बजे होना है एवं प्रोफेसर उषा सिंह विभागाध्यक्ष संगीत विभाग की पुस्तक पर परिचर्चा 3:00 बजे का कार्यक्रम है। -

एकता दिवस का महत्वः भारत की एकता और अखंडता की आधारशिला को नमन
गोरखपुर में सरदार पटेल जी को उनके जयंती वर्ष पर याद करते हुए सईद इज़हार , प्रबंधक,मदरसा नुरिया खाँरिया ने उक्त मदरसे में आयोजित जयंती वर्ष के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा के हर साल 31 अक्टूबर को भारत राष्ट्रीय एकता दिवस (Rashtriya Ekta Diwas) मनाता है ताकि सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती का सम्मान किया जा सके-एक ऐसे नेता जिनकी दूरदृष्टि और दृढ़ निश्चय ने एक एकीकृत भारत की नींव रखी। “भारत के लौह पुरुष के रूप में प्रसिद्ध पटेल के नेतृत्व में स्वतंत्रता के बाद 560 से अधिक रियासतों का एकीकरण हुआ, जिसने आज के इस अखंड, संप्रभु राष्ट्र को जन्म दिया। एकता दिवस केवल उनकी विरासत को श्रद्धांजलि नहीं है-it भारत की विविधता में एकता की स्थायी प्रतिबद्धता की पुनपुष्टि है।

“लौह पुरुष और भारत का एकीकरण”
जब 1947 में भारत स्वतंत्र हुआ, तब देश को 560 से अधिक रियासतों का एक जटिल ताना-बाना विरासत में मिला-प्रत्येक रियासत की अपनी स्वायत्तता और अलग-अलग निष्ठाएँ थीं। सरदार पटेल ने इन रियासतों को भारतीय संघ में सम्मिलित करने की चुनौती स्वीकार की-एक ऐसा कार्य जिसके लिए अद्वितीय कूटनीति, साहस और दृढ़ निश्चय की आवश्यकता थी। उनकी स्थिर दृष्टि और दृढ़ संकल्प ने उन्हें “लौह पुरुष का खिताब दिलाया।

राजनयिक समझदारी और व्यवहारिकता के संयोजन से पटेल ने लगभग सभी रियासतों का विलय कराया, जिनमें हैदराबाद, जूनागढ़ और जम्मू-कश्मीर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र भी शामिल थे। इससे भारत की क्षेत्रीय अखंडता सुनिश्चित हुई।पटेल ने एक बार कहा था-
“एकता के बिना मनुष्यबल कोई शक्ति नहीं है, जब तक वह उचित रूप से समन्वित और संगठित न हो जाए; तब वह एक आध्यात्मिक शक्ति बन जाता है।”
उनके लिए राष्ट्र की सच्ची शक्ति केवल सीमाओं में नहीं, बल्कि उसके लोगों की एकता में निहित थी।

“राष्ट्रीय एकता दिवस की शुरुआत”
2014 में भारत सरकार ने सरदार पटेल की जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। इसका उद्देश्य देशवासियों में एकता की भावना को पुनर्जीवित करना और पटेल की “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की दृष्टि को सम्मानित करना था।
इस दिन देशभर में रन फॉर यूनिटी, सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदर्शनी और शपथ समारोह आयोजित किए जाते हैं- शैक्षणिक संस्थानों से लेकर सेना और समुदायों तक। मुख्य समारोह गुजरात के एकता नगर स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (182 मीटर ऊँचा पटेल का भव्य प्रतिमा) पर आयोजित होता है, जो भारत की शक्ति, साहस और सामूहिक संकल्प का प्रतीक है।
“एक दृष्टि जो समय से परे है”
सरदार पटेल की राजनीतिक बुद्धिमत्ता और दूरदृष्टि आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी स्वतंत्रता के समय थी। उनका सामाजिक समरसता और समावेशिता में विश्वास आज के विभाजित विश्व में भी प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा था-
“धर्म के मार्ग पर चलो-सत्य और न्याय के मार्ग पर क्योंकि वही सभी के लिए सही मार्ग है।”
ये शब्द हमें याद दिलाते हैं कि भारत के सामाजिक ताने-बाने में न्याय, परस्पर सम्मान और शांति बनाए रखना हमारी साझा जिम्मेदारी है।
एकता दिवस उस भारत के विचार को पुनस्र्थापित करता है जो अपनी विविधता के कारण फलता-फूलता है, न कि उसके बावजूद। यह दिन हर नागरिक को राष्ट्रीय एकता के प्रति समर्पण की याद दिलाता है- भारत की सांस्कृतिक विविधता को संजोने और भाषा, क्षेत्र, और धर्म के बीच बंधन मजबूत करने का आह्वान करता है।
आधुनिक भारत में एकता दिवस आज जब भारत क्षेत्रीय असमानताओं, सामाजिक विभाजनों और वैचारिक मतभेदों जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है, तब एकता दिवस का संदेश और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। यह केवल एक औपचारिक उत्सव नहीं है-it राष्ट्रीय एकता और सामूहिक प्रगति की भावना को पुनर्जीवित करता है। कॉलेजों में एकता पर वाद-विवाद और निबंध प्रतियोगिताएँ होती हैं, सरकारी संस्थान परेड और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करते हैं, और नागरिक राष्ट्र की अखंडता बनाए रखने की शपथ लेते हैं।
हर वर्ष स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर आयोजित समारोह देशभक्ति और गर्व की भावना को फिर से जगाता है। यह संदेश देता है कि भारत चाहे जितना विशाल और विविध हो, उसका दिल और आत्मा एक है। पटेल के शब्द आज भी प्रेरणादायक हैं-
मेरी केवल एक इच्छा है कि भारत एक अच्छा उत्पादक बने और देश में कोई भूखा न रहे, किसी की आँखों में आँसू न हों।”
उनका दयालु राष्ट्रवाद सेवा और एकता पर आधारित नेतृत्व का सर्वोत्तम उदाहरण है।
“एकता की अमर विरासत”
राष्ट्रीय एकता दिवस केवल स्मरण का दिन नहीं है-it उस शक्ति की याद दिलाता है जो एकता से आती है।
सबसे यह भारत के संविधान, धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र, और उस कालातीत विचार का प्रतिबिंब है कि एकता ही बड़ी राष्ट्र एक विभाजित होती दुनिया में पटेल का उदाहरण हमें अनुशासन, एकजुटता, और सामूहिक नियति में विश्वास का संदेश देता है।
हर वर्ष 31 अक्टूबर को जब भारत एकता दिवस मनाता है, तब यह हमें याद दिलाता है कि पटेल की कल्पित एकता कोई स्थिर आदर्श नहीं, बल्कि एक जीवंत शक्ति है। उनके ये शब्द आज भी गूंजते हैं-
कार्य ही पूजा है, श्रम ही ईश्वर है, और जो व्यक्ति सही भावना से कार्य करता है, वह सदैव शांत और प्रसन्न रहता है।”
ये वचन हर पीढ़ी को राष्ट्र की प्रगति और एकता में योगदान देने का आह्वान करते हैं।
सरदार वल्लभभाई पटेल की विरासत इतिहास से परे है-वह भारत की आत्मा में जीवित है। हर वर्ष एकता दिवस यह सुनिश्चित करता है कि यह भावना कभी मंद न पड़े, भारत सदैव एक रहे, और पटेल का स्वप्नित सामंजस्य सदैव हमारा मार्गदर्शक बना रहे।
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CRITICON 2025 का भव्य शुभारंभ, पूर्वांचल में पहली बार स्वास्थ्य विशेषज्ञों का विराट संगम
गोरखपुर, 3 अक्टूबर 2025। पूर्वांचल के इतिहास में पहली बार स्वास्थ्य जगत के दिग्गज विशेषज्ञों का विराट संगम CRITICON 2025 सम्मेलन के रूप में गोरखपुर में आरंभ हुआ। पहले दिन की शुरुआत युवा चिकित्सकों द्वारा किए गए शोधपत्र प्रस्तुतिकरण से हुई, जिसे देश-विदेश से आए विशेषज्ञों ने सराहा।
सम्मेलन का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ माननीय मंत्री श्री कमलेश पासवान जी, सांसद एवं प्रसिद्ध अभिनेता श्री रवि किशन शुक्ला जी, विधायक बांसगांव डॉ. विमलेश पासवान जी, डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, आयोजन समिति अध्यक्ष डॉ. महिम मित्तल, सह-अध्यक्ष डॉ. संतोष शर्मा (एचओडी एनेस्थीसिया, एम्स), सचिव डॉ. ए. के. मल्ल, बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. राम कुमार, डॉ. आशीष अग्रवाल (अध्यक्ष ISCCM उत्तर प्रदेश), World federation of intensive and critical care के प्रेसिडेंट एलेक्ट डॉ. जेवियर फर्नांडेस, डॉ. ए. के. सिंह तथा संरक्षक डॉ. राजेश मिश्रा की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ।
मंच संचालन डॉ. प्रियंका द्विवेदी (एसोशिएट प्रोफेसर एम्स) द्वारा किया गया तथा अतिथियों का स्वागत डॉ. संतोष शर्मा (एचओडी एनेस्थीसिया, एम्स) ने किया।
अतिथियों ने अपने आशीर्वचन में कहा कि यह सम्मेलन पूर्वांचल में पहली बार ऐसा ऐतिहासिक अवसर है, जब भारत सहित अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, पोलैंड, जर्मनी, सऊदी अरब, बांग्लादेश और यूएई से स्वास्थ्य विशेषज्ञ एक ही मंच पर एकत्र हुए हैं।
इस अवसर पर 800 से अधिक प्रतिनिधियों, फैकल्टी और वक्ताओं ने भाग लिया। पहले दिन पेपर प्रेज़ेंटेशन, वर्कशॉप, स्किल स्टेशन और टॉक्स आयोजित हुए।• डॉ हेमोडायनामिक मॉनिटरिंग के जनक – डॉ. जे. एल. टेबूल का व्याख्यान
CRITICON 2025 के पहले दिन का सबसे बड़ा आकर्षण विश्वप्रसिद्ध विशेषज्ञ एवं हेमोडायनामिक मॉनिटरिंग के पायनियर डॉ. जे. एल. टेबूल का व्याख्यान रहा। उन्होंने इनोट्रॉप वी닝 एवं मॉनिटरिंग पर विस्तृत प्रस्तुति दी।हेमोडायनामिक मॉनिटरिंग क्या है?
गंभीर रोगियों (क्रिटिकल केयर) में हृदय और रक्त प्रवाह की गतिविधियों पर सतत निगरानी को हेमोडायनामिक मॉनिटरिंग कहा जाता है। इसके माध्यम से चिकित्सक रोगी के हृदय की पंपिंग क्षमता, रक्तचाप, ऑक्सीजन आपूर्ति और अंगों तक रक्त प्रवाह को समझते हैं। इस तकनीक से डॉक्टर यह तय कर पाते हैं कि कब और कितना दवा (जैसे इनोट्रॉप) कम या ज्यादा करनी है, ताकि रोगी को सुरक्षित और सटीक इलाज मिल सके।
डॉ. टेबूल ने कहा –“गंभीर मरीज की जान बचाने के लिए समय पर सही निर्णय लेना सबसे अहम है और हेमोडायनामिक मॉनिटरिंग इसमें डॉक्टरों की आंख और कान का काम करती है।”
उनका यह व्याख्यान युवा चिकित्सकों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के लिए अत्यंत शिक्षाप्रद एवं ऐतिहासिक रहा।
• डॉ. अशरफ एल-हौफी ने रेस्पिरेटरी इलनेस में एंटीबायोटिक डि-एस्केलेशन/एस्केलेशन पर विचार रखे।
• डॉ. सुमारा तंत्रे ने डिफिकल्ट एयरवे मैनेजमेंट पर चर्चा की।
• डॉ. जोस चाको ने आधुनिक गहन चिकित्सा तकनीकों पर व्याख्यान दिया।
कई अन्य अंतर्राष्ट्रीय व राष्ट्रिय चिकित्सों ने मंच पर विचारों का आदान प्रदान किया I
वर्कशॉप में ECMO, हेमोडायनामिक मॉनिटरिंग और ब्रॉन्कोस्कोपी पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यक्रम के अंत में सचिव डॉ. ए. के. मल्ल ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
CRITICON 2025 का यह पहला दिन पूर्वांचल के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ और स्वास्थ्य जगत में नई दिशा प्रदान करने वाला रहा। -

विजयदशमी शोभायात्रा की सुरक्षा को लेकर एसएसपी ने की समीक्षा
“गोरखनाथ थाने पर आयोजित गोष्ठी, अधिकारियों को दिए गए आवश्यक दिशा-निर्देश”
गोरखपुर। विजयदशमी पर्व पर गोरक्षनाथ मंदिर से निकलने वाली पारंपरिक शोभायात्रा एवं दर्शन-पूजन कार्यक्रम को सकुशल संपन्न कराने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राज करन नय्यर ने मंगलवार को गोरखनाथ थाने के मीटिंग हॉल में ड्यूटी पर तैनात सभी अधिकारियों के साथ गोष्ठी की। इस दौरान उन्होंने सुरक्षा, यातायात एवं भीड़-प्रबंधन से जुड़ी तैयारियों की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
एसएसपी ने कहा कि विजयदशमी का पर्व आस्था और श्रद्धा से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। ऐसी स्थिति में सभी अधिकारी व जवान पूरी सतर्कता के साथ ड्यूटी पर मुस्तैद रहें। उन्होंने निर्देश दिया कि शोभायात्रा के दौरान रूट पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। साथ ही, संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। शोभायात्रा के दौरान वाहनों के डायवर्जन की योजना पहले से लागू की जाए और मार्ग पर कहीं भी अव्यवस्था की स्थिति न बने। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को भीड़-प्रबंधन के लिए बैरिकेडिंग और निगरानी तंत्र को मजबूत रखने के निर्देश दिए।
एसएसपी ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारी स्वयं मौके पर मौजूद रहकर समन्वय स्थापित करें और हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहें।
गोष्ठी में पुलिस अधीक्षक नगर अभिनव त्यागी, पुलिस अधीक्षक अपराध सुधीर जायसवाल, एडीएम नगर अंजली कुमार सिंह, सीओ गोरखनाथ रवि सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
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संत कबीर राज्य हथकरघा पुरस्कार योजना
“गोरखपुर में चयन प्रक्रिया पूरी, डीएम दीपक मीणा करेंगे अंतिम घोषणा”

गोरखपुर। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा हथकरघा बुनकरों को प्रोत्साहित करने, उनके उत्कृष्ट कार्यों को मान्यता देने तथा समाज में हथकरघा उत्पादों के प्रति लगाव और जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से चलाई जा रही संत कबीर राज्य हथकरघा पुरस्कार योजना के अंतर्गत गोरखपुर में चयन प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। जिलाधिकारी दीपक मीणा अब अंतिम निर्णय लेकर विजेताओं की घोषणा करेंगे।
डीएम दीपक मीणा के निर्देश पर गठित टीम में एडीएम सिटी अंजनी कुमार सिंह और सिटी मजिस्ट्रेट उत्कर्ष श्रीवास्तव अपर एसडीएम सदर सुदीप तिवारी शामिल रहे। टीम ने वित्तीय वर्ष 2025-26 हेतु प्राप्त कुल 54 सैम्पल्स का गहन परीक्षण किया। एडीएम सिटी ने इनमें से तीन सर्वश्रेष्ठ सैम्पल्स का चयन कर डीएम दीपक मीणा को भेजा है, जिन पर अंतिम फैसला जिलाधिकारी करेंगे।
इस पूरी प्रक्रिया में सहायक आयुक्त, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग राजकुमार तथा टेक्सटाइल इंस्पेक्टर चेत सिंह ने भी महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया। आवेदन प्राप्ति और संकलन में इनकी भूमिका अहम रही।
संत कबीर राज्य हथकरघा पुरस्कार योजना के अंतर्गत परिक्षेत्रीय और राज्य स्तरीय दोनों स्तरों पर पुरस्कार दिए जाते हैं। परिक्षेत्र स्तर पर प्रथम पुरस्कार 20,000, द्वितीय पुरस्कार 15,000 तथा तृतीय पुरस्कार 10,000 निर्धारित है। प्रत्येक परिक्षेत्र में तीन-तीन पुरस्कार दिए जाएंगे, जिससे प्रदेशभर में कुल 39 बुनकरों को सम्मानित किया जाएगा।
राज्य स्तरीय पुरस्कारों का चयन प्रमुख सचिव/अपर मुख्य सचिव, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा किया जाएगा। इस प्रक्रिया में व्यक्तिगत बुनकरों के साथ-साथ डिजाइनर अथवा मास्टर बुनकरों को भी आवेदन करने का अवसर दिया गया था। यदि किसी ने संयुक्त रूप से आवेदन किया है, तो दोनों के लिए अलग-अलग आवेदन-पत्र व सैम्पल संलग्न करना अनिवार्य था।
गोरखपुर में चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब बुनकर समुदाय उत्सुकता से डीएम दीपक मीणा की घोषणा का इंतजार कर रहा है। यह योजना न केवल बुनकरों को सम्मान और प्रोत्साहन दिलाएगी बल्कि हथकरघा उद्योग में प्रतिस्पर्धा और गुणवत्ता सुधार को भी बढ़ावा देगी। साथ ही, पारंपरिक शिल्प और बुनकरी कला को संरक्षित रखते हुए इन्हें नई पहचान मिलेगी।
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डीआईजी रेंज खोए गए 753 मोबाइल किए वितरण
गोरखपुर। सीसीटीएनएस आपरेटर के मदद सात सौ तिरपन मोबाइल बरामद कर मोबाइल धारकों को डीआईजी रेंज ने पुलिस लाइन में वितरण किया गया।
गोरखपुर पुलिस अब तक 1785 खोए हुए मोबाइल बरामद कर मोबाइल धारकों को वितरित किया जा चुका है।
जिसकी अनुमानित कीमत दो करोड़ पांचाबे लाख सतासी हजार छ सौ है इस दौरान एसएसपी राज कारन नय्यर एसपी सिटी अभिनव त्यागी एसपी नार्थ जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव सहायक पुलिस अधीक्षक/सीओ गीडा अरुण कुमार एस सीसीटीएनएस प्रभारी अजीत कुमार।
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डीएम आफिस में शुरू हुआ मुलाकाती पर्ची का सिस्टम आसान होगा समास्याओं का समाधान
“तय होगी अधिकारियों की जवाबदेही”

गोरखपुर।डीएम ऑफिस में फरियादियों से मिलने का नया सिस्टम लागू किया गया है। अब हर व्यक्ति को डीएम से मिलने से पहले मुलाकाती पर्ची बनवानी होगी। यह पर्ची सिर्फ एंट्री पास नहीं होगी बल्कि इसके जरिए यह भी दर्ज होगा कि कोई फरियादी कब से अपनी पर्ची से पता चलेगा कि कोई व्यक्ति अपनी समस्या लेकर कब से दौड़ रहा है। इस पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी। जितनी बार शिकायत लेकर कोई आएगा, उसे उतनी बार पर्ची लेनी होगी। पुरानी पर्चियां भी साथ लानी होगी, जिससे यह पता चल सकेगा कि वह समस्या के निपटारा के लिए कब से प्रयास कर रहा है। फिर यह पता लगाया जाएगा कि समस्या का समाधान होने लायक है या नहीं। यदि होने लायक है तो संबधित अधिकारी से जवाब-तलब किया जाएगा।
रेलवे बस स्टेशन के पास पर्यटन विभाग के भवन परिसर में डीएम ऑफिस स्थित है। मुख्य द्वार से प्रवेश करने के बाद बाईं ओर डीएम का कक्ष है और दाहिनी ओर वह कमरा है जहां मुलाकाती पर्ची बनती है। हर पर्ची पर एक यूनिक नंबर होगा और उस पर फरियादी का नाम-पता दर्ज किया जाएगा। रजिस्टर में पूरी जानकारी लिखकर पर्ची दी जाएगी और उसके बाद ही फरियादी डीएम से मिल सकेगा।
सरकारी योजनाओं का प्रचार भी होगा पर्ची के एक हिस्से पर फरियादी की जानकारी होगी, जबकि दूसरी ओर सरकारी योजनाओं और नए अभियानों का विवरण दर्ज होगा। यानी पर्ची फरियादी के लिए समस्या निस्तारण का साधन होने के साथ-साथ योजनाओं की जानकारी देने का माध्यम भी बनेगी।
मुलाकाती पर्ची लेकर ही DM के पास जाना होगा। अगर कोई फरियादी वहां यह कहता है कि लंबे समय से दौड़ रहा है तो उससे पुरानी पर्चियां दिखाने को कहा जाएगा। उस पर्ची के नंबर के सहारे उसकी शिकायत के निपटारा की स्थिति जांची जाएगी।
हर दिन आने वाले आवेदनों को आईजीआरएस पर ऑनलाइन कर दिया जाता है। उसी के सहारे निगरानी होती है। पर्ची के नंबर से उस शिकायत को ऑनलाइन ढूंढ लिया जाएगा। उसके बाद यदि वह समस्या हल होने लायक होगी और लंबे समय तक हल नहीं हुई होगी तो संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी। फरियादी की समस्या का समाधान कराया जाएगा। यदि समस्या उस स्तर से निस्तारित होने लायक नहीं होगी तो आगे का रास्ता बताया जाएगा।
डीएम दीपक मीणा ने बताया-आईजीआरएस पर हर दिन आने वाले आवेदनों को ऑनलाइन दर्ज किया जाता है। अब पर्ची का नंबर डालकर संबंधित शिकायत की स्थिति आसानी से जांची जा सकेगी। जिन लोगों के पास मोबाइल पर मैसेज देखने की सुविधा नहीं है, उनके लिए यह हार्ड कॉपी काम करेगी।
उन्होंने कहा-यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि पता चल सके कि कोई मामला समाधान योग्य है या नहीं। अगर समाधान योग्य है और फिर भी नहीं हुआ है, तो इसे गंभीर माना जाएगा और जिम्मेदारी तय होगी। वहीं अगर समस्या उस स्तर पर निस्तारित होने योग्य नहीं है तो फरियादी को आगे का रास्ता बताया जाएगा। -

महायोगी गोरखनाथ विवि को अब एमबीबीएस की 150 सीटों की मान्यता
श्री गोरक्षनाथ मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में एक साल बाद ही बढ़ गईं एमबीबीएस की 50 सीटें
पिछले शैक्षिक सत्र में 100 सीटों पर हुआ था प्रवेश, शानदार तरीके से चल रही पढ़ाई
गोरखपुर, 10 सितंबर। गोरखपुर में निजी क्षेत्र के पहले विश्वविद्यालय महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय आरोग्यधाम के मेडिकल कॉलेज (श्री गोरक्षनाथ मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर) को नेशनल मेडिकल कमीशन से अब एमबीबीएस पाठ्यक्रम के लिए 150 सीटों की मान्यता मिल गई है। इसके पहले गत शैक्षिक सत्र में नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने 100 सीटों की मान्यता दी थी। श्री गोरक्षनाथ मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर की अपील पर जांचोपरांत एनएमसी ने अब एमबीबीएस की 50 और सीटों के लिए मान्यता प्रदान कर दी है।
यह जानकारी देते हुए श्री गोरक्षनाथ मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के प्राचार्य डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि अब इस वर्ष बढ़ी 50 सीटों सहित 150 एमबीबीएस सीटों पर प्रवेश लिया जाएगा। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के श्री गोरक्षनाथ मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर द्वारा एमबीबीएस सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए की गई अपील के परीक्षण में एनएमसी ने पाया कि 150 एमबीबीएस सीटों के लिए जरूरी हॉस्पिटल क्रियाशील है। साथ ही अन्य सभी आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर, फैकल्टी भी मानक के अनुरूप हैं। इसे देखते हुए एनएमसी में मेडिकल एसेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड के प्रेसिडेंट डॉ. एमके रमेश ने 9 सितंबर को श्री गोरक्षनाथ मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर को सत्र 2025-26 के लिए एमबीबीएस की 150 सीटों पर मान्यता प्रदान करने के संबंध में परमिशन लेटर जारी किया है।
महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय को एमबीबीएस कोर्स संचालन को लेकर यह बड़ी उपलब्धि विश्वविद्यालय स्थापना के मात्र चार साल में हासिल हुई है। नर्सिंग, पैरामेडिकल, फार्मेसी के तमाम रोजगारपरक पाठ्यक्रमों के साथ ही यहां गुरु श्री गोरक्षनाथ इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के अंतर्गत 2021 से ही बीएएमएस का पाठ्यक्रम संचालित है। एमबीबीएस की मान्यता बढ़कर 150 सीटों पर पहुंचने पर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सुरिंदर सिंह ने विश्वविद्यालय परिवार एवं पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोगों को बधाई देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में यह समूचे पूर्वांचल के युवाओं के लिए बड़ी सौगात है।
कुलपति ने बताया कि इस मेडिकल कॉलेज का हॉस्पिटल आने वाले समय में अपग्रेड होकर 1800 बेड का अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त हो जाएगा। महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद द्वारा महायोगी गुरु गोरखनाथ विश्वविद्यालय में स्थापित यह मेडिकल कॉलेज गोरक्षपीठाधीश्वर एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ड्रीम प्रोजेक्ट भी है। श्री गोरक्षनाथ मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के प्राचार्य डॉ. अनुराग श्रीवास्तव के अनुसार पहले वर्ष (शैक्षिक सत्र 2024-25) इस मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की 100 सीटों पर प्रवेश हुआ था। पहले बैच की पढ़ाई शानदार तरीके से चल रही है। अब मान्यता वृद्धि के चलते इस सत्र में कुल 150 सीटों पर प्रवेश लिया जाएगा। एमबीबीएस सीटों की मान्यता बढ़ जाने से न सिर्फ पूर्वांचल के प्रतिभाशाली छात्र-छात्रों को अपने घर के पास गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध होगी बल्कि गोरखपुर-बस्ती-आजमगढ़ मंडल से लेकर पश्चिमी बिहार और नेपाल की तराई तक के लोगों को अत्याधुनिक सुपरस्पेशलिटी सुविधाओं से लैस चौबीसों घंटे सेवा देने वाला अस्पताल भी सेवा दे रहा है। विश्वविद्यालय की इस उपलब्धि पर गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ,भारत सरकार के पूर्व औषधि महानियंत्रक डॉ. जीएन सिंह, महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के सभी पदाधिकारियों ने प्रसन्नता व्यक्त की है।
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इनरव्हील क्लब द्वारा आज होगा शिक्षक सम्मान समारोह
“गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः॥”गोरखपुर, 8 सितम्बर 2025। शिक्षा को संस्कार और ज्ञान का सर्वोच्च दीप मानते हुए आज इनरव्हील क्लब ऑफ़ गोरखपुर द्वारा एक भव्य शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम दोपहर 12:30 बजे गंगोत्री देवी महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय, गोरखपुर के प्रांगण में सम्पन्न होगा।
इस अवसर पर डिग्री कॉलेज एवं नर्सिंग कॉलेज के शिक्षकों को सम्मानित किया जाएगा। आयोजन का उद्देश्य गुरुओं के प्रति श्रद्धा, आदर और कृतज्ञता व्यक्त करते हुए शिक्षा की महान परंपरा का उत्सव मनाना है।
कार्यक्रम में शिक्षाविदों, समाजसेवियों एवं गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति अपेक्षित है। इनरव्हील क्लब की क्लब एडिटर परमप्रीत कौर ने बताया कि यह आयोजन समाज को शिक्षा के संस्कार और गुरु के महत्व का सशक्त संदेश देगा।














