Category: धर्म
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अखंड कीर्तन में बिंदु राज के भजनों ने बांधा समा, श्री बालाजी मंदिर दरबार में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
बालाजी समिति ट्रस्ट के अध्यक्ष जितेंद्र मणि तिवारी ने बताया कि इस संकीर्तन कार्यक्रम में पूरे प्रदेश से भजन कलाकार भाग ले रहे हैं। प्रत्येक दिन अलग-अलग कीर्तन दल अपनी प्रस्तुति देकर आयोजन को सफल बनाने में योगदान दे रहे हैं।
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श्री बालाजी मंदिर पर अखंड कीर्तन का आज दूसरा दिन
श्री बालाजी मंदिर में आयोजित नव दिवसीय अखंड कीर्तन कार्यक्रम के 216 घंटे का आज दूसरा दिन है। पूरे दिन भक्त गणों की अपार संख्या में उपस्थित रही है। पूरा तारामंडल राम राम के भजन से भक्तिमय हो गया है । यह आयोजन बालाजी सेवा समिति ट्रस्ट के द्वारा हो रहा है। समिति के अध्यक्ष श्री जितेंद्र मणि त्रिपाठी जी ने बताया की इस तरह का आयोजन अनवरत जारी रहेगा। बालाजी सेवा समिति ट्रस्ट की तरफ से सभी मातृ शक्तियों को करवाने चौथ व्रत की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं।
इस पवित्र शुभ अवसर पर बालाजी समिति के उपाध्यक्ष अमितेश्वर कुमार दुबे सचिव आशुतोष सिंह समिति के अन्य सदस्य गण उपस्थित रहें। आप सभी पर बालाजी की कृपा सदा बनी मनी रहें।
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बालाजी मंदिर में नौ दिन तक चलने वाला अखंड कीर्तन आज से प्रारंभ
गोरखपुर । श्रीबालाजी मंदिर (निकट विद्युत उपकेंद्र तारामंडल) में आज गुरुवार से नौ दिन 216 घंटे का अखंड कीर्तन शुरू होगा। यह मंदिर में आयोजित अनुष्ठान में सबसे बड़ा कार्यक्रम है। इसके लिए प्रतिदिन अलग-अलग टीमों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इस धार्मिक आयोजन को सफल बनाने के लिए बुधवार को मंदिर परिसर में हुई बैठक में तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया। इस बारे में जानकारी देते हुए बालाजी मंदिर समिति के अध्यक्ष जितेंद्र मणि तिवारी जी ने बताया कि सनातन धर्म
के व्यापक प्रचार-प्रसार में यह समिति मंदिर स्थापना से ही सक्रिय है। मंदिर परिसर में अनवरत धार्मिक कार्यक्रम पूजन, हवन, भंडारा एवं जागरण के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।इस अवसर पर बालाजी सेवा समिति ट्रस्ट के उपाध्यक्ष अमितेश्वर दुबे,सचिव आशुतोष सिंह, कोषाध्याय जयप्रकाश ओझा, के के त्रिपाठी,सभापति पांडे, रितेश त्रिपाठी छोटू, गोरख पांडेय आदि उपस्थित रहे।
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भक्ति रस में झूमा बालाजी मंदिर दरबार
गोरखपुर। दिनांक 29 सितम्बर, 2025 को श्री बालाजी मंदिर प्रांगण में माँ दुर्गा की महिमा का वंदन करते हुए भव्य जागरण का आयोजन किया गया। जागरण में प्रसिद्ध गायिका श्रीमती चेता सिंह एवं भजन गायक श्री अंशुमान शुक्ल ने अपनी मधुर वाणी में भजनों की प्रस्तुति देकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। उनके सुमधुर भजनों से संपूर्ण बालाजी दरबार गूँज उठा और श्रद्धालु देर रात तक भक्ति में लीन होकर आनंदित होते रहे।
कार्यक्रम की सफलता में विशेष सहयोग देने वाले समिति के पदाधिकारियों में अध्यक्ष श्री जितेन्द्र मणि तिवारी, उपाध्यक्ष श्री अमितेश्वर दुबे एवं श्री एस.के. सिंह, सचिव श्री राजेश सिंह तथा अन्य समस्त समिति सदस्यों ने आए हुए भक्तगणों का आभार व्यक्त किया।
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बाला जी सेवा समिति ट्रस्ट द्वारा जगराते का आयोजन
नवरात्रि का पर्व केवल एक उत्सव नहीं है, बल्कि यह आत्मा की जागृति और माँ दुर्गा के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का पावन अवसर है। जब हम भक्ति में लीन होकर माता रानी का गुणगान करते हैं, तो जीवन से नकारात्मकता दूर होकर आशा, विश्वास और शक्ति का संचार होता है। इसी पावन उद्देश्य से बाला जी सेवा समिति ट्रस्ट द्वारा एक भव्य और विशाल जागरण का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें दुर्गा माँ के चरणों में भक्ति सुमन अर्पित किए जाएंगे।
यह जागरण दिनांक 29 सितंबर 2025, दिन सोमवार को सायं 7 बजे से प्रारंभ होगा। इस दिव्य रात्रि में भक्ति रस की मधुर धारा बहेगी और श्रद्धालुजन माँ के जयकारों से वातावरण को पवित्र करेंगे। इस अवसर पर प्रख्यात लोकगायिका चेता सिंह अपनी मधुर वाणी से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करेंगी, वहीं भजन और लोकगायक अंशुमान शुक्ल ‘अंशु’ अपने सुरों से भक्ति का अनोखा वातावरण बनाएंगे।
समिति की यह पूर्ण आस्था है कि इस आयोजन में सम्मिलित होकर प्रत्येक भक्त माँ दुर्गा की दिव्य ऊर्जा का अनुभव करेगा। यह केवल एक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि श्रद्धा, भक्ति और आत्मिक शांति की साधना है। आप सभी भक्तजन सपरिवार इस पुण्य अवसर पर अवश्य पधारें और माँ भगवती का आशीर्वाद प्राप्त कर अपने जीवन को सुख, शांति और समृद्धि से आलोकित करें।
आयोजक – बाला जी सेवा समिति ट्रस्ट
अध्यक्ष – श्री जितेन्द्र मणि तिवारी
सचिव – श्री राजेश सिंह
कोषाध्यक्ष – श्री जय प्रकाश ओझा -

नवरात्रि के पवित्र अवसर पर बालाजी मंदिर में चौकी जागरण संपन्न
शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर पंचम दिवस पर श्री बालाजी सरकार मंदिर प्रांगण में भक्तिभाव से सम्पन्न चौकी जागरण।
भक्तों की उपस्थिति और भजनों की गूंज से सम्पूर्ण वातावरण माँ की भक्ति में रँग उठा। भजन संध्या को मधुर स्वर प्रदान किए, श्रद्धेय श्री वैभव दुबे जी ने।
निवेदक : श्री बालाजी सेवा समिति ‘ट्रस्ट’ एवं समस्त श्रद्धालुजन।“जय माँ विंध्यवासिनी”
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आम आदमी का जीवन दर्शन है रामचरितमानस : प्रीती रामानुज
गोला । रामचरितमानस देश के जनजीवन में रचबस गया है। इसका संबंध जनजीवन से दीपक तेल और बाती की तरह है। सगुण ब्रह्म की इतनी नजदीक उपासना कहीं और देखने को नहीं मिलती। यह आम आदमी का जीवन दर्शन है।
उक्त बातें कथावाचक प्रीती रामानुजम ने कही। वे गोला क्षेत्र के रामपुर बघौरा में चल रही रामकथा में उपस्थित श्रद्धालुओं को कथा का रसपान करा रहे थे। उन्होंने कहा कि राम कथा में प्रभु के आदर्श चरित्र व कृत्य को जानने और सुनने का सौभाग्य प्राप्त होता है। इसे सुनकर हम अपने जीवन में उनके गुणों को आत्मसात कर सकते हैं। जिससे हमारा जीवन भी मर्यादित हो सके। उन्होंने कहा कि अंधेरे को भगाने के लिए हम दीपक जलाते हैं। दीपक जलाने से अंधेरा दूर होता है और प्रत्येक वस्तु स्पष्ट दिखाई देती है। प्रकाश को बनाए रखने के लिए दीपक की लौ को बरकरार रखना पड़ता है और यह तभी संभव है, जब दीपक में बाती और तेल लगातार बना रहे। इसी तरह जीवन के अंधेरे को दूर करना है, परेशानी से बचते हुए जीवन को सुख शांति और वैभव से आगे बढ़ाना है तथा जीवन को प्रकाशवान बनाए रखना है तो हमें मर्यादा पुरूषोत्तम की तरह आचरण करना होगा और उनके नाम का हर क्षण निरंतरता बनाए रखनी होगी। उन्होंने कहा कि वेदों में निर्गुण उपासना और सद्गुण उपासना की व्यवस्था दी गई है। इसके अनुसार निर्गुण उपासक निराकार ब्रह्म की आराधना प्रतीकों के आधार पर करता है। जैसे अग्नि और वायु जो दृश्यमान नहीं होते। जिसका कोई आकार नहीं होता। ऐसे निराकार निर्गुण उपासना करने वालों की भी संख्या बहुत है। दूसरी उपासना सद्गुण उपासना है। जिसमें स्वरूप का आधार होता है। जिसे हम देख सकते हैं और उसके रूप गुण की प्रशंसा कर सकते हैं। इस उपासना में श्रीराम कथा को लिया जा सकता है। इस अवसर पर कथा के संयोजक पूर्व ग्राम प्रधान संजय श्रीवास्तव अमित शुक्ल विवेक श्रीवास्तव हनुमान शुक्ल संगम गुप्त सिद्धार्थ शुक्ल आदित्य शुक्ल अमन यादव सहित क्षेत्र के श्रोतागण उपस्थित होकर कथा का रसपान किया।
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भक्ति का विश्वास टूटने नहीं देती मां कोटही देवी
“मनोकामनाओं की पूर्ति: भक्त यह मानते हैं कि माँ कोटही देवी सच्चे मन से की गई प्रार्थनाओं को सुनती हैं और उनकी इच्छाओं को पूरा करती हैं, हृदय से भक्तों का माता जी के प्रति अटूट विश्वास है”
ब्यूरो प्रभारी : संतोष कुमार त्रिपाठी, खजनी गोरखपुर।
खजनी। गोरखपुर देवी-देवताओं (विशेषकर मां दुर्गा) को समर्पित भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करने की शक्ति रखती हैं कोटही माता तीन पिंडी के रूप में देवी मंदिर में स्थापित है, जहाँ भक्त माँ से अपनी इच्छाएँ पूरी करने के लिए प्रार्थना करते हैं। खासकर नवरात्रि जैसे त्योहारों के दौरान सबकी मुरादे पूर्ण करती है माता कोटही देवी। बंजारों के आराधना पर प्रकट हुई थीं माँ जगत की जननी।
रुद्रपुर खजनी में है प्राचीन माता कोटड़ी के मंदिर मे कुवार में नवरात्र के पर्व पर नवरात्रि के पहले दिन प्रथम शैलपुत्री के रूप में पूजा पाठ होता है सोमवार को रुद्रपुर स्थित मां कोटही मन्दिर में भक्तों का भोर के चार बजे से माता रानी के भक्तों का ताँता लगा रहा। मां के दर्शन व पूजन के लिए आस-पास के ही नहीं बल्कि दूर-दराज से भी श्रद्धालुओं का आगमन हो रहा है। ऐसी मान्यता है कि मां को यादकर जो भी मन्नतें मांगता है। उसकी मुरादें मां अवश्य पूर्ण करती है।
नवरात्रि के प्रथम दिन माता प्रथम दिन शैलपुत्री मां की पूजा आराधना करने में मां के भक्तों का तांता मंदिरों में देखने को मिला है, गोरखपुर से 18 किलोमीटर दूर खजनी रुद्रपुर गांव में स्थित माता कोटही देवी का सिद्ध पीठ मंदिर है इस मंदिर की महिमा अपरंपार है।
कोटही माता का महिमा अपरम्पार
माता जी का आशीर्वाद मिल जाने से कोई मुख्यमंत्री बना, तो कोई राज्यपाल बना, तो कोई मंत्री बना,तो कोई विधायक बना, कोई पहलवान बना । यही नहीं इस मंदिर पर पूजा अर्चना करने से इस क्षेत्र के आधा दर्जन लोग IAS PCS बन करके इस क्षेत्र के नाम को रोशन करने का काम किया है। सबसे बड़ी बात है कि वर्तमान के मुख्यमंत्री महंत योगी आदित्यनाथ ने भी इस मंदिर पर माथा टेका और आज उत्तर प्रदेश की कमान संभाले हुए हैं। कोटही मंदिर पर बहुत दूर-दूर से लोग आते हैं मां की पूजा अर्चना करते हैं और अपनी मुरादे को मां के सामने रखते हैं । साथ ही साथ आज तक इस मंदिर में सबको कुछ न कुछ तो दिया है।
कोटही माता के मंदिर का प्राचीन इतिहास
गोरखपुर शहर के दक्षिणांचल में 18 किमी के दूरी पर स्थित रुद्रपुर गांव से सटे पश्चिम व उत्तर दिशा के कोने पर मां कोटही का प्राचीन मन्दिर है। लोग बताते हैं कि यहां कभी बहुत बड़ा जंगल हुआ करता था। रात तो दूर दिन में भी भय के चलते लोगों का कभी इधर से आना-जाना नहीं होता था। इस घने जंगल में जानवरों एवं पंछियों के बीच केवल बंजारे ही रहते थे। उन्होंने ही अपने आराधना से मां कोटही को खुश किया और स्थापित मूर्ति के जगह ही मां ने प्रकट होकर उन्हें दर्शन दिया। बंजारे ही यहां मां कोटही की पिंडी स्थापित किए। उनके जाने के बाद जब धीरे-धीरे जंगल का कटान शुरू हुआ तो लोगों को एक पेड़ के नीचे पिंडी दिखाई दी। जहाँ बंजारों के होने के कई पहचान छुटे थे। इस पिंडी को शक्ति के रूप में पहचाना गया। उसी समय से लोगों ने पूजन-अर्चन शुरू कर दिया। बदलते समय के अनुसार रुद्रपुर के ही कुछ लोगों पिंडी के जगह मन्दिर का निर्माण करवाकर मूर्ति की स्थापना करवा दी। मां कोटही के दरबार में हर रोज सैकड़ों हाथ मन्नतों के लिए पसारे जाते हैं। भक्तगण कपूर, नारियल, अगरबत्ती लेकर पूजन-अर्चन करते हैं। चैत्र रामनवमी और दशहरा में यहाँ भव्य मेले का भी आयोजन रहता है।
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हर परिस्थिति में सनातन धर्म के प्रति समर्पण का भाव श्रीमद्भागवत कथा का वास्तविक मर्म : सीएम योगी
युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज व राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की पुण्य स्मृति के उपलक्ष्य में श्रीमद्भागवत कथा के विराम पर बोले मुख्यमंत्री
ज्ञानदायिनी, भक्ति से जोड़ने वाली और मुक्ति का मार्ग दिखाने वाली कथा है श्रीमद्भागवत : सीएम योगी
गोरखपुर, 10 सितंबर। मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हर परिस्थिति में सनातन धर्म के प्रति समर्पण का भाव बना रहे, यही श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का वास्तविक मर्म है। श्रीमद्भागवत कथा जीवन के ज्ञान का भान कराने वाली, भक्ति से जोड़ने वाली और मुक्ति का मार्ग दिखाने वाली कथा है।
सीएम योगी गोरखनाथ मंदिर में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 56वीं एवं राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 11वीं पुण्यतिथि समारोह के उपलक्ष्य में बुधवार शाम श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञानयज्ञ के विराम सत्र पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। मंदिर के दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार में कथा श्रवण करने तथा व्यासपीठ के समक्ष श्रद्धावनत होने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा पांच हजार वर्ष पहले पहली बार स्वामी शुकदेव जी ने महाराजा परीक्षित को मृत्यु के भय से अभय करने के लिए सुनाई थी। तबसे यह कथा कोटि-कोटि सनातन धर्मावलंबियों की मुक्ति का माध्यम बन रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की ऋषि परंपरा उद्घोष करती है कि भारत में जन्म लेना दुर्लभ है। उसमें भी मनुष्य रूप में जन्म लेना और भी दुर्लभ है। सनातन भारत ने ही ज्ञान, भक्ति और मुक्ति की दाता, जीवन के रहस्यों का उद्घाटन करने वाली श्रीमद्भागवत कथा का उपहार दिया है। उन्होंने कहा कि कथा का वास्तविक मर्म यह है कि हम हरहाल में अपने धर्म और देश के प्रति अडिग रहें। किसी भी परिस्थिति में बिना झुके, बिना रुके, बिना डिगे सनातन और भारत के प्रति समर्पण का भाव बनाए रखें।
व्यासपीठ पर विराजमान कथा व्यास, परिधान पीठ गोपाल मंदिर श्रीअयोध्याधाम से पधारे जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी महाराज की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए सीएम योगी ने कहा कि स्वामी रामदिनेशाचार्य जी ने अत्यंत सरलता और सहजता से श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कराया। इसका आनंद यहां आए श्रद्धालुओं के साथ मीडिया के जरिये लाखों लोगों ने प्राप्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी रामदिनेशाचार्य जी रामानंदाचार्य परंपरा से आते हैं। अगले वर्ष उनके श्रीमुख से यहां श्रीराम कथा का भी श्रवण कराया जाएगा।
कथा के विराम पर मुख्यमंत्री, संतजन व यजमानगण ने श्रीमद्भागवत महापुराण और व्यासपीठ की आरती उतारी। इस अवसर पर मस्तनाथ पीठ रोहतक हरियाणा के महंत राजस्थान विधानसभा के विधायक बालकनाथ, जूनागढ़ गुजरात से आए महंत शेरनाथ, गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ, काशी से आए जगद्गुरु संतोषाचार्य सतुआ बाबा, नैमिषारण्य से आए स्वामी विद्या चैतन्य, हनुमानगढ़ी अयोध्या से आए महंत राजूदास, यज्ञमान पूर्व विधायक अतुल सिंह, अजय सिंह, महेश पोद्दार सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता रही।
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स्थापना दिवस के पाॅंच माह पूर्ण होने पर अखंड रामायण के पाठ का आयोजन
गोरखपुर। श्री बालाजी मंदिर (निकट सेल टैक्स ऑफिस, विद्युत केंद्र तारामंडल, गोरखपुर) के स्थापना दिवस के पांच माह पूर्ण होने पर अखंड रामायण पाठ का आयोजन हुआ। श्री बालाजी सेवा समिति के अध्यक्ष श्री जितेंद्र मणि तिवारी एवं उपाध्यक्ष अमितेश्वर कुमार दुबे ने बताया की श्री बालाजी मंदिर की स्थापना 9 मई को हुआ था, तभी से बालाजी सेवा समिति ट्रस्ट के लोगों ने मिलकर हर माह की 9 तारीख को ,जब से मंदिर की स्थापना हुई तब से, कोई ना कोई आयोजन स्थापना दिवस के रूप में मनाते रहे हैं।
इसी क्रम में अखंड रामायण पाठ का आयोजन बालाजी मंदिर प्रांगण में प्रारंभ हुआ। 9 सितंबर को हवन प्रसाद वितरण का कार्यक्रम होगा। श्री जितेंद्र मणि तिवारी ने बताया की यह संकल्प अनवरत चलता रहेगा कि हर महीने की 9 तारीख को हम स्थापना दिवस के रूप में मानते रहेंगे।
जय श्री बालाजी।










